religion and politics
Nov 5, 2024
Columnist
न शर्म न हया: संविधान की रोज हत्या.?
इस तरह कुल मिलाकर आज की राजनीति से ‘जनसेवा’ का पूरी तरह लोप हो चुका है और वह पूरी तरह ‘स्व-सेवा’ बनकर रह गई है