Thursday

03-04-2025 Vol 19

Climate Change

जलवायु परिवर्तन का बतगंड

अमेरिका का 47वां राष्ट्रपति बनते ही डोनाल्ड ट्रंप ने जिन दर्जनों कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए, उसमें से एक ‘पेरिस जलवायु समझौते’ से अमेरिका को बाहर करना भी रहा।

अब प्रतीकात्मक भी नहीं

डॉनल्ड ट्रंप ने ह्वाइट हाउस में लौटते ही जो फैसले सबसे पहले लिए, उनमें एक जलवायु परिवर्तन पर पेरिस संधि से अमेरिका को निकालने का है।

खबर एक ही है, सिर्फ एक- मौसम!

हरे भरे चरागाहों, संसाधनों तथा जिंदगी जीने लायक अनुकूल मौसम और स्थितियों को तलाशते रहने की नियति लिए हुए है!

इसलिए छाया है धुआं

भारत अब दुनिया प्रति वर्ष सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करने वाला देश बन गया है। भारत का उत्सर्जन चीन की तुलना में 22 गुना तेजी से बढ़ रहा है।

कोई तो सोचे जलवायु परिवर्तन पर?

नवंबर का महीना शुरू हुआ तो एक आंकड़ा सामने आया कि इस साल का अक्टूबर पिछले सवा सौ साल का सबसे गर्म अक्टूबर रहा।

hot weather: मानसून में जुलाई का यह दिन 84 सालों में सबसे गर्म, सारे रिकॉर्ड टूटे…

ताजा आंकड़ों के अनुसार 21 जुलाई ने (hot weather) सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए इतिहास में अब तक का सबसे गर्म दिन बना.

मानव त्रासदी की यह सदी!

न अमेरिका और ब्रिटेन जैसे सिरमौर विकसित देश मौसम का बिगड़ना रोक पा रहे हैं और न संयुक्त राष्ट्र और उसकी एजेंसियां

खाद्य सुरक्षा पर खतरा

चर्चा यहां तक शुरू है गई है कि दालों की तरह भारत में गेहूं के आयात की स्थितियां भी लगातार बनी रह सकती हैं।

पर पेट्रोल, कोयला ईधन क्या खत्म होगा?

सीओपी28 जलवायु सम्मेलन में एक समझौता मंजूर हुआ  है। इसमें दुनिया को तेल, गैस और कोयले जैसे फॉसिल फ्यूल से दूर रहने का स्पष्ट आव्हान है।

दुबई की सीओपी बैठक में होगा क्या?

हम अपनी पृथ्वी का क्या बुरा हाल कर रहे हैं, इस बारे में खतरे की घंटी पेरिस में सन 2015की सीओपी (कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज) शिखर बैठत में बजा दी...

करे कोई, भरे कोई

सब कुछ चलता रहा, तो इस सदी के अंत तक धरती का तापमान औद्योगिक युग शुरू होने के समय की तुलना में तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका होगा।

दो समझौतों से उम्मीद

अगले 30 नवंबर से दुबई में शुरू होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन से ठीक पहले दो समझौतों से उम्मीद बंधी है कि ग्लोबल वॉर्मिंग को रोकने की दिशा...

फेफड़ों की बीमारी में अधिक जोखिम बढ़ा सकता है जलवायु परिवर्तन

एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी फेफड़ों की समस्याओं से पीड़ित बच्चों और वयस्कों को जलवायु परिवर्तन से...

अब यह नया खतरा

दुनिया अब तक कोरोना महामारी और यूक्रेन युद्ध के असर से नहीं उबरी है। ये घटनाएं खाद्य संकट और महंगाई का कारण बनीं।

दुनिया की सुदंरतम जगहों में बरबादी!

सूखे, ज्वलनशील पदार्थों की अधिक मौजूदगी, तेज हवाओें और लापरवाही - इन सबको त्रासदी का कारण माना जा रहा है। लेकिन क्या हम इससे कुछ सबक लेंगे?

पृथ्वी की गर्मी पर दो खलनायकों की गरमागरमी

विकासशील देशों की तरह बीजिंग भी चाहता है कि पहले अमरीका यह माने कि अतीत में उसके द्वारा किया गया प्रदूषण ही क्लाइमेट चेंज के लिए ज़िम्मेदार है।

भारत का हरित विकास और ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तन पर फोक्स: मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-20 देशों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में कहा कि जलवायु परिवर्तन को रोकने की दिशा में भारत ने अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया...

हर जगह मौसम की मार

जलवायु परिवर्तन का असर एक बार फिर यही जाहिर कर रहा है कि कुदरत किन्हीं सरहदों का ख्याल नहीं करती।

जलवायु परिवर्तन भेद्यता सूचकांक में यूपी के बच्चे शीर्ष पर

उत्तर प्रदेश जलवायु परिवर्तन के संबंध में बाल भेद्यता सूचकांक शीर्ष पर है। भारत के राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आपदा स्कोरकार्ड अनुसार उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक...

भारत के लिए मौसम होगा बड़ी चुनौती

एक ताजा शोध में कहा गया है कि अगर दुनिया का तापमान बढ़ता रहा, तो सबसे ज्यादा असर भारत पर होगा।

एवरेस्ट भी जलवायु परिवर्तन का मारा!

इंसान ने 70 साल पहले दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर विजय पताका फहराई थी। लेकिन अब वहा भी जलवायु परिवर्तन का संकट है।

अगर राजनीतिक साहस हो

भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय की सलाहकार समिति ने एक उचित सिफारिश की है।

यूक्रेन-रूस युद्ध सहित वैश्विक चिंता का समाधान बुद्ध के उपदेशों में: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यूक्रेन-रूस युद्ध, मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चिंता इस सदी की सबसे बड़ी चुनौती है उसका समाधान बुद्ध के...

जलवायु परिवर्तन के लिए धन उपलब्ध नहीं कराने पर पश्चिम देशों की खिंचाई

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जलवायु उद्देश्यों हासिल करने के लिए धन उपलब्ध नहीं कराने को लेकर पश्चिम देशों की खिंचाई की।

सचमुच, अभी नहीं तो कभी नहीं!

दुनिया को लास्ट वार्निंग जारी कर दी गई है। और यह हमारी धरती और हमारे लिए अच्छी खबर नहीं है।

सुन भर लेने की चेतावनी

जलवायु परिवर्तन से संबंधित चेतावनियों से पहले भी कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा था, लेकिन अब तक इनका महत्त्व बस सुन भर लेने लायक बचा है।

जलवायु परिवर्तन की मार

जलवायु परिवर्तन का असर अब दुनिया पर इतनी तेजी से दिखने लगा है कि ऐसी आपदाएं अब आम खबर जैसी हो गई हैं।

हाशिए के मुद्दे आगे बहुत सताएंगे।

भारत के सामाजिक, राजनीतिक विमर्श में पहाड़, नदी, हवा, पानी, जंगल, पर्यावरण, जलवायु आदि की चर्चा नहीं के बराबर होती है।