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29-03-2025 Vol 19

Navratri 2025: कब से शुरू है चैत्र नवरात्रि, जानें घटस्थापना मुहूर्त और पूजा विधि

Chaitra Navratri 2025 : हिंदु धर्म में सभी व्रत और त्योंहारों का बहुत महत्व है। सभी व्रत और त्योंहारों अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। वेदों और शास्त्रों में हिंदु धर्म में सभी त्योंहारों का विशेष महत्व बताया गया है।

नवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे पूरे भारत में बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। इस पर्व का उल्लेख प्राचीन शास्त्रों में भी मिलता है, जो इसे शक्ति उपासना का एक प्रमुख समय बताते हैं। (Chaitra Navratri 2025)

नवरात्रि का यह पावन पर्व मां दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की आराधना और साधना के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा स्वयं धरती पर अवतरित होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं और उनकी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं।

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नवरात्रि शब्द दो शब्दों – ‘नव’ और ‘रात्रि’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है ‘नौ रातें’। इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। यह स्वरूप हैं – मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।

प्रत्येक दिन एक विशेष देवी की पूजा का विधान है, और भक्त इन दिनों में व्रत रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं तथा मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए साधना में लीन रहते हैं। (Chaitra Navratri 2025)

चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि, वर्ष में दो बार मनाई जाती हैं। चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु में आती है और इसे हिंदू नववर्ष का आरंभ भी माना जाता है, जबकि शारदीय नवरात्रि शरद ऋतु में आती है

इसे विशेष रूप से दुर्गा पूजा के रूप में बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों में भव्य रूप से मनाया जाता है। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर दुर्गा पूजा पंडाल सजाए जाते हैं, रामलीला का आयोजन किया जाता है और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। (Chaitra Navratri 2025)

चैत्र नवरात्रि इस बार 8 दिन का… (Chaitra Navratri 2025) 

2025 में चैत्र नवरात्रि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस वर्ष यह पर्व नौ दिनों की बजाय केवल आठ दिनों का रहेगा। इस बार नवरात्रि का शुभारंभ घटस्थापना से होगा, जो पूरे अनुष्ठान का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है।

घटस्थापना के दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की जाती है, जिसमें गंगाजल, सुपारी, आम के पत्ते, नारियल और सप्तधान्य का प्रयोग किया जाता है। इसके बाद पूरे नौ दिनों तक अखंड ज्योत जलाने का नियम होता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। (Chaitra Navratri 2025)

नवरात्रि के दौरान भक्तजन विशेष रूप से मां दुर्गा के विभिन्न मंत्रों और स्तुतियों का पाठ करते हैं। देवी महात्म्य, दुर्गा सप्तशती, और श्री दुर्गा चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही इन दिनों में सात्विक और शुद्ध भोजन ग्रहण करने की परंपरा होती है।

कुछ भक्तजन नौ दिनों तक उपवास रखते हैं और केवल फलाहार या एक समय का भोजन ग्रहण करते हैं। इस दौरान कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, दूध और फल आदि का सेवन किया जाता है। (Chaitra Navratri 2025)

अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। अष्टमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है, जिसमें नौ कन्याओं को माता का स्वरूप मानकर उनका पूजन और भोजन कराया जाता है।

नवमी तिथि को दुर्गा सप्तशती का पूर्ण पाठ कर हवन का आयोजन किया जाता है। इन अनुष्ठानों के माध्यम से भक्तजन मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं। (Chaitra Navratri 2025)

नवरात्रि केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और साधना का भी समय होता है। यह पर्व हमें आत्मसंयम, भक्ति, और अनुशासन का संदेश देता है। इन नौ दिनों में किए गए धार्मिक अनुष्ठान और तपस्या जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं और आत्मबल को सुदृढ़ करते हैं।

अतः, नवरात्रि का यह पावन पर्व आध्यात्मिक उन्नति का समय है, जब हम अपनी अंतरात्मा को जाग्रत कर मां दुर्गा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि कैसे हम अपने जीवन की नकारात्मकता को दूर कर शक्ति, समृद्धि और शांति का स्वागत करें। (Chaitra Navratri 2025)

चैत्र नवरात्रि 2025 घटस्थापना मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है और इसे नववर्ष की शुरुआत के रूप में भी देखा जाता है। इस पावन अवसर पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है, जिसे कलश स्थापना भी कहा जाता है। (Chaitra Navratri 2025)

यह एक विशेष अनुष्ठान होता है, जो पूरे नवरात्रि के दौरान सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का संचार करता है। लेकिन घटस्थापना को सही विधि और शुभ मुहूर्त में करना अत्यंत आवश्यक होता है, जिससे देवी की कृपा प्राप्त हो सके।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि 2025 की घटस्थापना रविवार, 30 मार्च 2025 को की जाएगी। इस दिन घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे—

प्रथम मुहूर्त: प्रातः 06 बजकर 13 मिनट से 10 बजकर 22 मिनट तक।

द्वितीय मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 01 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक।

इन दोनों मुहूर्तों में से किसी भी समय घटस्थापना करना अत्यंत शुभ माना जाएगा।

घटस्थापना की विधि

शुद्धता और पवित्रता: घटस्थापना के लिए सबसे पहले घर या पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर पवित्र करें।

कलश की स्थापना: मिट्टी के पात्र में जौ बोकर उस पर तांबे, पीतल, या मिट्टी के कलश की स्थापना करें।घटस्थापना या कलश स्थापना के लिए शुद्ध मिट्टी में जौ मिलाकर. मां दुर्गा की प्रतिमा के बगल में रखें. (Chaitra Navratri 2025)

फिर इसके ऊपर एक मिट्टी का कलश रखकर उसमें गंगाजल भरें. अब कलश में लौंग, हल्दी की गांठ, सुपारी, दूर्वा और एक रुपये का सिक्का डालें.

जल से भरना: कलश को गंगाजल, पवित्र नदी के जल, या स्वच्छ पानी से भरें और उसमें अक्षत (चावल), सुपारी, सिक्का और पंचपल्लव डालें।

नारियल और मौली: कलश के ऊपर एक नारियल रखें और उसे लाल या पीले वस्त्र में लपेटकर मौली (कलावा) से बांधें। (Chaitra Navratri 2025)

देवी की प्रतिमा: कलश स्थापना के पास देवी दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और दीप जलाकर पूजा प्रारंभ करें।

मंत्रोच्चारण: घटस्थापना के समय दुर्गा मंत्रों का जाप करें, जैसे—

“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।”

नैवेद्य और भोग: मां दुर्गा को फल, फूल, मिठाई, पंचामृत और नारियल अर्पित करें।

अखंड ज्योति: नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक अखंड दीप जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

चैत्र नवरात्रि का महत्व

चैत्र नवरात्रि न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का भी अवसर होता है। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। (Chaitra Navratri 2025)

इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, और भगवान राम का जन्म भी चैत्र मास की नवमी तिथि को हुआ था। इसीलिए इस नवरात्रि को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

घटस्थापना का कार्य शुभ मुहूर्त में ही करें।

पूजा स्थल को साफ और व्यवस्थित रखें।

अखंड ज्योति जलाने पर उसकी सुरक्षा का ध्यान रखें।

पूजा में सात्विकता बनाए रखें और व्रत नियमों का पालन करें।

Naya India

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