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कच्चा तेल नरम, फिर बढ़े पेट्रोल, डीजल के दाम

नई दिल्ली। अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में कमी आने के बावजूद विदेशी बाजार में गुरुवार को कच्चे तेल के दाम में थोड़ी नरमी आई। मगर भारत में फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि हो गई। तेल बाजार के जानकारों के मुताबिक, तेल उत्पादक देशों का समूह ओपेक द्वारा अगले साल तेल की मांग कमजोर रहने की आशंका जताने के कारण कीमतों में नरमी आई है, मगर नरमी रहने की संभावना कम है। जानकार बताते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में तेजी या नरमी का असर पेट्रोल या डीजल की कीमतों पर करीब दो सप्ताह बाद दिखता है। कच्चा तेल बुधवार को मई के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर चला गया था, जो आगे आपूर्ति कम रहने की संभावनाओं से प्रेरित था।

ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा के अनुसार, वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल रहने के कारण ओपेक की ओर से आशंका जताई गई है कि अगले साल तेल की मांग नरम रह सकती है इसलिए कीमतों में थोड़ी कमजोरी आई है मगर फिलहाल तेल के दाम में नरमी की संभावना कम है। ब्रेंट क्रूड का नवंबर वायदा गुरुवार को इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज पर 0.58 फीसदी की कमजोरी के साथ 79.28 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ था। इससे पहले बुधवार को ब्रेंड क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया था। अमेरिकी लाइट क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई 0.67 फीसदी की नरमी के साथ 69.90 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ था।

इससे पहले डब्ल्यूटीआई बुधवार को 70 डॉलर के पार चला गया था। घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सितंबर डिलीवरी कच्चा तेल वायदा बुधवार को 31 रुपय यानी 0.61 फीसदी की बढ़त के साथ 5,075 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि दैनिक कारोबार के दौरान वायदे में 5,140 रुपये प्रति बैरल का उछाल आया। गणेश चतुर्थी का अवकाश रहने के कारण गुरुवार को एमसीएक्स पर दिन के सत्र के दौरान कारोबार बंद रहा। दिल्ली में गुरुवार को पेट्रोल फिर 13 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया और डीजल के दाम में 11 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। देश की राजधानी में पेट्रोल 81 रुपये प्रति लीटर और डीजल 73.08 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

एंजेल ब्रोकिंग के ऊर्जा विश्लेषक व वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि तेल भंडार घटने को लेकर जो प्रतिक्रिया आनी थी वह बुधवार को पहले ही आ गई थी और मौजूदा नरमी अस्थाई है फिर तेजी की संभावना बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध के कारण तेल की आपूर्ति कम होने और अमेरिका में लगातार तेल का भंडार घटने से कच्चे तेल के दाम को सपोर्ट मिल रहा है। गुप्ता ने कहा, ओपेक देशों के बीच अगर आगे तेल का उत्पादन बढ़ाने को लेकर सहमति बनेगी तो ही तेल के दाम में नरमी आएगी। जब तक सऊदी अरब तेल का उत्पादन नहीं बढ़ाएगा तब तक आपूर्ति पर दबाव बना रहेगा क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंध के कारण ईरान से तेल की आपूर्ति लगातार घट रही है।

अमेरिकी एजेंसी एनर्जी इंफोर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी ईआईए की बुधवार की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में तेल का भंडार सात सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह को 53 लाख बैरल घटकर 39.62 करोड़ बैरल रह गया। उधर, ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोटिर्ंग कंट्रीज यानी ओपेक ने 2019 में तेल की मांग को लेकर अपने अनुमान में पिछले महीने से 20,000 बैरल की कटौती की है। ओपेक की इस महीने की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में तेल की रोजाना मांग 14.1 लाख बैरल बढ़ सकती है।

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