कनाड़ा में सब खाली-खाली सा

विवेक सक्सेना
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मैं आदत के मुताबिक यह बताने से खुद को रोक नहीं पा रहा हूं कि कनाड़ा में वेतन भले ही अच्छा हो पर खर्च भी उसी के अनुरूप होता है। जैसे कि इस देश के हर राज्य में कार के बीमा की किश्त अलग-अलग है। जहां कारें जैसे भारतीयो वाले सटी इलाके में ज्यादा चौड़ी होती है वहां बीमा ज्यादा होता है। सबसे ज्यादा होंडा कार पसंद की जाती व उसके बीमा का प्रीमियम तो मर्सीडीज से भी ज्यादा है। 

अगर आप एक साधारण कार भी खरीदे तो उसका हर माह प्रीमियम देना पड़ता है। भारत की तरह से यहां सालाना किश्त नहीं देनी पड़ती है। मेरे बेटे को कार का हर महीने 300 डालर या 15,000 रुपए बीमा राशि देनी पड़ती है। यहां सेटटॉप बाक्स 150 डालर का व चैनल के लिए हर माह 150 डालर देने पड़ते हैं। समोसा एक डालर का है। इलेकट्रॉनिक सामान भारत की तुलना में सस्ता है। हालांकि बैटरी, दवाएं कोल्ड ड्रिंक सब्जियां आदि महंगी है। 

मकानों का किराया भी काफी ज्यादा है। मगर इस्तेमाल किये जाने वाली बिजली और पानी सस्ता है। सभी मकान सेंट्रली हीटेड हैं। अर्थात उसे अंदर से गर्म रखने की व्यवस्था की गई है। सबके फर्श व दीवारे लकड़ी की है जो कि पता नहीं चलता है। केवल बाथरूम में ही टाइल नजर आती हैं। घर काफी गर्म रहते हैं व बाहर निकलने पर ठंड का पता चलता है। 

कनाडा के शहर काफी खाली-खाली नजर आते है। लोगों के दरवाजे अंदर से बंद रहते हैं और पड़ौसी की शक्ल नजर नहीं आती हैं। सेलफोन का उपयोग महंगा है। जहां भारत मे महज 200 रुपए में आप  महीने भर तक मनचाही कॉल कर सकते हैं वहीं यहां ऐसा नहीं है। ऐसा लगता है कि यहां के लोग अखबार व खबरें पढ़ने के शौकीन नहीं है। मैं इतना घूमा और तमाम तरह के बाजार में गया मगर कहीं भी कनाड़ा में प्रकाशित होने वाला कोई अच्छा दैनिक अखबार नजर नहीं आया।

जो अखबार मिले उन्हे समुदायिक अखबार कहा जा सकता हैं। हिंदी, अंग्रेंजी व गुरुमुखी से छपने वाले ये अखबार रोजमर्रा के उपयोग की सामग्री के विज्ञापनों से भरपूर थे। सब मुफ्त मे देने के लिए थे और बड़े डिपार्टमेंटल स्टारों के बाहर रखे हुए थे। 

कनाडा में मेरे जैसे के लिए समय काटना अपने आप में एक समस्या है। अड़ोसी-पड़ोसी का पता नहीं चलता और न ही सड़क पर टहलते हुए लोग दिखते हैं। सारा दिन लोगों को समय नहीं है। मॉल में हर तरह का भारतीय सामान मिल जाता है। इनमे इमली, गजक, इडली पाउडर से लेकर बेलन तक शामिल है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत की तुलना में इनके दाम ज्यादा होने की वजह उन्हें बेचने वाले कर्मचारियों का बड़ा वेतन, मॉल का किराया व टैक्स की चोरी न करते हुए पूरा कर चुकाना भी शामिल होता है। 

एक अहम बात यह है कि अगर आप किसी खरीदी गई वस्तु से संतुष्ट नहीं हैं तो कुछ दिनों के अंदर आप उसे वापस कर सकते हैं और आपको पूरा पैसा वापस कर दिया जाता है। मौसम, मकान और जगह के अलावा कनाडा में सिक्ख ही सिक्ख नजर आते हैं। मैं जहां रह रहा हूं उस सिक्ख बाहुल्य सरी का इलाका अपने सामने स्थित मूल कनाड़ावासी बाहुल्य डेल्टा इलाके की तुलना में सस्ता है। कनाडा में रहने वाले व उसे जानने वालो की सलाह पर मैंने बेटे को डेल्टा में ही रहने की प्राथमिकता दी थी क्योंकि सरी को तिलक नगर का एक्सटेंशन माना जा सकता है। 

भारतीयों ने अपने घर के तहखानों को विभिन्न हिस्सो में बांट कर पलंग व अल्मारियां लगाई हुई है जो भारत से आने वाले छात्रों व दूसरे लोगों को किराए पर दी जाती है। बच्चे अपने कपड़े धोने के लिए पड़ोस में स्थित लाउंड्री में जाते हैं। जहां पैसे देकर मशीन में गंदे कपड़े डाल कर उन्हें धो सकते हैं। मशीन से धुलकर, निचोड़ कर निकलने वाले कपड़े लगभग सुखे होते हैं। इन तमाम सुविधाओं, आसान जीवन के बावजूद कई बार लगता है सुनसान में जीना आसान नहीं होता। 

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