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24 घंटे में अमेरिका रिर्टन

विवेक सक्सेना
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कनाड़ा में प्रवेश के बाद डाक्टर साहब हमें पहले सिएटल नहीं बल्कि पूरे अमेरिका के बहुचर्चित स्पेस नोहल पर ले गए। यहां यह बताना जरूरी हो जाता है कि अमेरिका में दो वाशिंगटन है। एक वाशिंगटन जहां हम गए थे, वह देश के 43 राज्यों में शामिल एक राज्य है जोकि कनाड़ा की सीमा से लगता है जबकि दूसरा वाशिंगटन डीसी है जोकि अमेरिका की राजधानी है और दिल्ली की तरह से केंद्र शासित इलाका है। डीसी का मतलब डिस्ट्रिक्ट कोलंबियां है। 

सिएटल राज्य वाशिंगटन का राजधानी शहर है। इसकी आबादी 75 लाख है। इसके बावजूद यह अमेरिका के काफी अहम शहरों में से एक है क्योंकि दुनिया की बहुचर्चित माइक्रोसॉफ्ट सरीखी इलेक्ट्रॉनिक तकनीक की कंपनी व इंटरनेट व्यापार कंपनी ऑमेजन यही पर है। यह इस देश का पाचवां सबसे तेजी से विकसित होने वाला शहर है।ष इन कंपनियों में नौकरी करने के लिए वहां गए भारतीय व विदेशी बच्चे सिएटल ही जाते हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा वेतन यही पर है। यहां न्यूनतम वेतन 15 डॉलर व अधिकतम 19 अमेरिकी डॉलर प्रति घंटा है। 

इस इलाके की खोज सैकड़ो साल पहले वेंकूवर की खोज करने वाले यूरोपीय नाविक जार्ज वेंकूवर ने की थी। पहले वह यहां के पेड़ों के करण, अपने लकड़ी उद्योग के कारण देश में चर्चित रहा। क्लोंहाइक सोने की खोज अभियान के कारण दूर-दूर से लोग यहां आने लगे। यह अलास्का का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। हम लोग यहां की पहचान माने व कहे जाने वाले स्थान स्पेस नीडल पर पहुंचे जोकि 605 मीटर ऊंची एक आब्जरवेशन टावर है। यहां का प्रवेश टिकट काफी महंगा है। बुजु्र्गों को 50 डालर अदा करने पड़ते हैं व उसके बाद लिफ्ट की मदद से इस छह मंजिली इमारत पर चढ़ा जा सकता है। 

इसके सबसे ऊपरी तल पर एक रेस्तरां है जिसका फर्श मोटे कांच का है। अगर आम भाषा में समझना हो तो यह क्नाट प्लेस स्थित रेस्तरां परिक्रमा जैसा है। इस जगह तमाम सारे सुंदर भवन संग्रहालय आदि है जिनका निर्माण 1962 में आयोजित विश्व मेले के दौरान किया गया था। एक इमारत तो रंगीन स्टील से बने फूलों जैसी है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब 1962 में मेला लगा था तो उस दौरान 23 लाख या 20000 लोगों ने प्रतिदिन आकर एक रिकार्ड बनाया था। 

यह स्पेस नीडल सिएटल के लिए वैसी ही है जैसे दिल्ली के लिए इंडिया गेट व आगरा के लिए ताजमहल। कुछ देर तक वहां टहलने के बाद हम लोगों ने 'डाउन टाउन' मुख्य शहर जाने का मन बनाया और डा त्यागी हम लोगों को पाइक प्लेस इलाके में ले गए जो संमुद्र के किनारे पर स्थित एक बड़ा बाजार है। बताते है कि 1905 में स्थापित इस बाजार में कभी किएचन अपना सामान बेचने आते थे। आजकल वहां ग्रीनविले व दिल्ली हॉट की तरह स्थानीय सामान व कलाकृति बेचने की बाजार हैं। 

हम लोग यहां करीब एक घंटे तक लगातार चक्कर काटते रहे। फिर भी हमें पार्किंग के लिए कोई जगह नहीं मिली। बाकी जगह वहां काफी महंगी 10 से 30 डालर प्रतिघंटे पार्किंग थी। एक अमेरिकी डालर 71-72 रुपए का होता है। मतलब डेढ़ दो हजार रुपए तो महज पार्किंग फीस ही थी। अंततः डा सीमा त्यागी ने बताया कि जब वे लोग पहले आए थे तो उन्होंने पाइक प्लेस के नीचे गाड़ी पार्क की थी। अंततः हम लोग वहां गए और वहां आराम से महज चार डालर में ही पार्किंग मिल गई। इस देश में आप कहीं भी कार पार्क करके नहीं जा सकते हैं। 

वहां ऊपर काफी खुला बैठने का स्थान था जहां से संमुद्र व आपसी नजारों का मजा लिया जा सकता था। तट पर अनेक बड़े जहाज खड़े हुए थे। कुछ देर वहां खड़े होकर धूप सेंकने का मजा लेने के बाद हम लोग चल पड़े क्योंकि भूख लग आई थी। हम लोग पाइक बाजार की एक मशहूर दुकान में गए जहां रखी मछली व दूसरे संमुद्री जीवों को ताजा तल कर खिलाया जाता है। पत्नी ने शाकाहारी होने के कारण आइसक्रीम ले ली। वहां खाने के बाद हम लोग, बाजार के नजारे लेने के लिए निकल पड़े। 

डा सीमा ने बताया कि दुनिया की चर्चित स्टारबक कॉफी कंपनी यहीं ही है। वे इस कॉफी कंपनी के मुख्यालय ले गई। जहां काफी भीड़ थी। खाने-पीने का सामान खासतौर से कॉफी बेचने वाली इस अंर्तराष्ट्रीय कंपनी का दुनिया में तीसरा नंबर है और पूरी दुनिया में उसकी 28,218 शाखाएं हैं। भारत में उसने जानी-मानी टाटा कंपनी के साथ व्यापारिक समझौता किया है। इसकी स्थापना मार्च 1971 में सानफ्रासिस्को विश्व विद्यालय के तीन छात्रों ने की थी। आज वह अपनी भूनी हुए बीजों की तैयार कॉफी के लिए दुनिया में मशहूर है।

हालांकि आलोचको का कहना है कि कंपनी में बीज जल जाने की हद तक तक भून दिए जाते हैं। उस पर तरह-तरह के आरोप है जैसे कि उसने अपना काम फैलाने के लिए अपने प्रतिस्पर्धियो को बर्बाद किया। बरिस्ता सरीखे काफी निर्माता जहां से अपना धंधा कर रहे थे, उन जगहों को खरीदा। उसके तमाम कर्मचारी उसके खिलाफ अदालत गए व मुकदमें जीते। उस कंपनी पर दिल्ली, लंदन व मुंबई की तुलना में बीजिंग में काफी महंगी कॉफी बेचने के आरोप लगे। यह कंपनी भारत में काठी पनीर व चिकेन रोल भी बेचती है। 

सिएटल में हम लोग एक पनीर की दुकान में भी गए। जहां पनीर चखाएं जा रहे थे। यह सब हमारे ताजा पनीर से अलग स्वाद वाले थे। वे स्वाद में अमूल चीज जैसे लग रहे थे। लौटते हुए डाक्टर त्यागी ने हम लोगां को एक बहुत बड़े व्यापारिक स्थल पर छोड़ा जहां कपड़ों, जूतों, घडि़यों के बहुत सारे मॉल थे। वहां बेटे ने नाइक के जूते व पत्नी ने एक सुंदर कोट खरीदा। कहा जाता है कि यहां का सामान कनाड़ा की तुलना में बेहतर व सस्ता होता है। बेटे ने जूते पहन लिए व पत्नी ने अपना कोट, पहले से पहने हुए कोट के अंदर पहन लिया। बेटे ने जूते गाड़ी के पिछले हिस्से में डाल लिए। 

सारा भुगतान अमेरिकी डालर वाले क्रेडिट कार्ड से हुआ जो कि मैं लेकर आया हूं। मालूम हो कि अमेरिकी के कानून के मुताबिक अगर कोई बाहरी व्यक्ति वहां से कोई सामान अधिकतम 800 रुपए तक का खरीद कर लाता है तो उसके लिए उसे वहां 48 घंटे रहना अनिवार्य है। डाक्टर त्यागी आए और हम लोग 8.30 बजे वापस निकल लिए। लौटते समय सीमा पर कार में पेट्रोल भरवाया व दूध खरीदा क्योंकि अमेरिका में पेट्रोल व दूध काफी सस्ता है। पूरी टंकी भरवाने में 20 डालर का फायदा हुआ। हम लोग वापस लौटने के लिए कस्टम पर पहुंचे जहां कनाड़ाई कर्मचारी मौजूद थे। डा त्यागी ने सबके पासपोर्ट दिए। सुरक्षा कर्मी ने पूछा कि हम लोग कब वहां व क्यों गए थे। उन्होंने जवाब दिया कि सुबह घूमने गए थे। उसने पूछा कि क्या कुछ लाए तो उन्होंने मुस्कुराकर कहा दो डब्बे दूध। उसने पासपोर्ट वापस करते हुए ही वापस जाने का इशारा किया। हम चल पड़े। हमने देखा की कनाड़ा से सीमा पार कुछ लोग सिर्फ अपनी कार की टंकी भरवाने आते हैं। इस वाकलोलो के बच्चे में ऐसा कुछ भी नहीं था जो कि हमें प्रभावित करता। और महज 15 मिनट में हम लोग सीमा पार करके वेंकूवर घर वापस आ गए। मैं अमेरिका रिटर्न हो चुका था।

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