रिपोर्टर डायरी

चाऊ की वह थी व्यवसायिक जोखिम

अखबार में दो खबरें पढ़ कर दिल दहल गया। पहली खबर दिल्ली के बहुचर्चित सिग्नेचर ब्रिज पर मोटर साइकिल दुर्घटना में दो युवाओं की मौत की थी। दूसरी खबर देश के और पढ़ें....

दुनिया में जवाब नहीं मठारूओं का!

पहली बार मठारू सरनेम से मेरा सामना कोई 20 साल पहले हुआ था। जब मैंने अपनी सोसायटी के निर्माण का ठेका दो अलग-अलग ठेकेदारों को दिया ताकि उनके बीच और पढ़ें....

प्रथम महायुद्धः गुमनामी में भारतीय सैनिक

जब यह पता चला कि 11 नवंबर को प्रथम विश्व युद्ध समाप्त होने के 100 साल पूरे हो गए तो लगा कि किसी ने यह गीत बहुत सही लिखा कि इट हैपंस इन इंडिया, यह सिर्फ भारत में और पढ़ें....

कलम-दवात की पूजा और अनुभव

लेखक होने व एक पढ़े-लिखे परिवार से संबंध रखने के कारण हमेशा पेन (कलम) के लिए मेरे दिल में विशेष सम्मान रहा  है। मैंने आज तक अपनी पेन की रिफिल खत्म होने पर और पढ़ें....

एक वो भी दीवाली थी

दीपावली के अगले दिन सो  कर उठा तो सुबह के आठ बज रहे थे। खिड़की के बाहर झांका तो लगा जैसे बादल छाए हुए हो। रोशनी की जगह बदली नजर आ रही थी। हालांकि इसके लिए और पढ़ें....

चौटाला को घर में ही मार

बात उन दिनों की है जब मैं दिल्ली प्रेस में था। एक बार किसी औद्योगिक घराने के आपसी टकराव की खबर अखबार में छपी तो मैंने उस बारे में संपादक परेशनाथजी से बात और पढ़ें....

सरकार में समय की कीमत कहां?

बात तब की है जब रूस का विघटन नहीं हुआ था। मेरे एक परिचित वहां किसी काम से गए। जब वे वहां से वापस लौटे तो मैंने अपनी आदत के मुताबिक उनसे उनके अनुभवो के बारे और पढ़ें....

पटाखे कैसे हो सकते ग्रीन?

पहले रंगों के कारण त्वचा को होने वाले नुकसान का मुद्दा गरमाया था और अब सुप्रीम कोर्ट की नजर पटाखों के कारण फैलने वाले प्रदूषण पर है। सच कहूं पहले से ही और पढ़ें....

तीर्थ में गंदगी दर्शन

इतने दिनों के अपने निजी अनुभवों के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि स्वच्छता ओर हम भारतीयों के बीच 36 का आंकड़ा है। नरेंद्र मोदी सरीखे नेता तो दूर रहे और पढ़ें....

खेल हो तो मोईन कुरेशी जैसा

जाने-माने कलाकार सआदत हसन मंटो की एक कहानी बहुत चर्चित है। इसका नाम है कि जिन लाहौर के रूप नहीं वह जन्मा ही नहीं। इसकी याद मुझे इसलिए आ गई क्योंकि जब मैं यह और पढ़ें....

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