Loading... Please wait...

सरकार में समय की कीमत कहां?

विवेक सक्सेना
ALSO READ

बात तब की है जब रूस का विघटन नहीं हुआ था। मेरे एक परिचित वहां किसी काम से गए। जब वे वहां से वापस लौटे तो मैंने अपनी आदत के मुताबिक उनसे उनके अनुभवो के बारे में विस्तार से चर्चा करनी शुरू कर दी। वहां के खान-पान व रेस्टोरेंट के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वहां हाल ही में खुला एक भारतीय रेस्तरां बहुत लोकप्रिय हो गया है। वजह पूछने पर उन्होंने कहा कि इसकी वजह खाना न होकर सेवा है। 

उन्होंने बताया कि इस रेस्तरां में खाना काफी जल्दी मेज पर आ जाता है। जबकि अगर आप रूसी रेस्तरां में जाएं तो एक कर्मचारी आपका आर्डर लेने आएगा व उसे पर्ची में नोट करके दूसरे कर्मचारी को देगा। वह उस आर्डर को रजिस्टर में चढ़ाकर रसोई में देगा। वहां तीसरा व्यक्ति उसे पकाने के लिए चौथे को देगा। चौथा उसमें लगने वाले सामान को तौलने वाले को देगा। 

वह व्यक्ति सामान तौल कर पहले वाले को देगा। वह सामान तैयार करके अगले सुपरवाइजर को देगा जोकि यह जांच करेगा कि सामान उतना ही तो है जितने के लिए आदेश दिया गया था। फिर वहां जांच का रिकार्ड तैयार करके उसे बैरे को देगा जोकि उसे आपकी मेज तक लाएगा। पानी देने वाला व्यक्ति अलग होता है व भुगतान लेने के लिए अलग व्यक्ति आता है। 

अतः अगर आप नाश्ता भी करना चाहे तो आपके आने से बाहर निकलने तक 6-7 लोगों का काम शुरू हो जाता है व इसमें काफी वक्त लगता है। जबकि भारतीय रेस्तरां में आर्डर लेने वाला बैरा ही सीधे सामान मेज तक ले आता ह। और रेस्तरां जाने व वहां खा-पीकर बाहर निकलने में काफी कम समय लगता है। लोग इससे काफी प्रभावित हुए है व वह भारतीय रेस्तरा चल निकला। 

उसने बताया कि जब उसने सरकारी रेस्तरां में लगने वाली इस देरी की वजह जाननी चाही तो रूस के एक बड़े सरकारी अधिकारी ने उसे बताया कि हमारी भूमिका कल्याणकारी राज्य की है जहां हर किसी को नौकरी देना हमारा कर्तव्य है। इसलिए हमने इतने सारे लोगों को काम दिया हुआ है। पिछले दिनो धनतेरस पर जब व्यासजी व भाभीजी से मिलने के बाद निकला तो रास्ते में पत्नी ने कहा कि आज पूजा के लिए धातु का कुछ लेना है। रास्ते में सरकारी कंपनी एमएमटीसी का मुख्यालय पड़ता था। अतः वहां चला गया। सीजीओ कामलैक्स स्थित मुख्यालय तो कार से उतरते ही सामने नजर आया पर जब अंदर जाकर पूछा कि चांदी का सिक्का कहां मिलेगा तो सिक्योरिटी वाले ने बताया कि इसके लिए सातवीं मंजिल पर जाना पड़ेगा। खैर लिफ्ट से हम लोग सातवीं मंजिल पर पहुंचे। बाहर निकले तो वह फ्लोर विभिन्न हिस्से में बंटा हुआ था। कहीं भी यह नहीं लिखा था कि सिक्के कहां मिलेंगे? 

पूछता हुआ जब उस हाल तक पहुंचा जहां लोगों की लाइन लगी हुई थी तो किसी ने एक लाइन में लगने का इशारा किया। काफी लंबे अरसे बाद लाइन में लगा था। ऐसा लगा कि मानों राशन खरीदने के लिए लाइन में लगा हुआ हूं। 10-15 मिनट बाद नंबर आने पर काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने कहा कि आपके पास कार्ड है? मेरे न कहने पर बोला कि यहां सिर्फ एटीएम कार्ड के जरिए ही सिक्के खरीदे जा सकते हैं। आपको दूसरे हाल में जाना पड़ेगा। 

तब तक देखा की साथ वाले काउंटर पर बैठा कर्मचारी लोगों से कह रहा था कि एटीएम स्वैप करने वाली उसकी मशीन खराब हो चुकी है अतः वे लोग किसी और लाइन में लगें। दूसरे हाल में गया तो वहां तीन-चार लाइनें लगी थी। कहीं कुछ लिखा नहीं था। पूछने पर पता चला कि पहले लाइन में लग कर एक पर्चा लेना होगा जिस पर यह लिखा जाएगा कि हमें क्या खरीदना है? खैर लाइन में लगा नंबर आने पर कर्मचारी ने कहा कि 10 ग्राम वाले चांदी के सिक्के खत्म हो चुके है अब सिर्फ आठ ग्राम का ही मिलेगा। उसने परचे पर पूछकर मेरा नाम व सिक्को की संख्या लिखी।  तब तक चाय व समोसे लेकर एक और कर्मचारी उसके पास आया और कहने लगा कि 10 ग्राम के तमाम सिक्के हैं। उसने दोबारा कागज लिखा जिसे लेकर मैं पूछताछ कर तीसरी लाइन में लगा वहां नंबर आने पर मैंने पर्ची उस कर्मचारी द्वारा गणना किए हुए पैसे दिए। उसने कंप्यूटर से रसीद निकाली। रसीद लेकर अगली लाइन में लगा। वहां पैसे जमा करवाए उसने तीन रसीदो पर एक मोहर मारी। उस कागज को लेकर उस काउंटर पर गया जिहां सिक्को की डिलीवरी हो रही थी। उसने एक कागज अपने पास रखते हुए बाकी पर डिलीवर्ड की मोहर लगाकर सिक्के मुझे दे दिए। जब बाहर निकला तो लगभग आधा घंटा लग चुका था। यह सब देखकर लगता था कि जो काम एक ही व्यक्ति कर सकता था उसके लिए सरकार के इस प्रतिष्ठान में आधा दर्जन लोगों की जिम्मेदारी लगाई हुई थी। इसमें समय बर्बाद हुआ वह अलग। तब सोवियत संघ का वह हाल याद हो आया। मुझे लगता है कि हमारे देश में लोग फालतू है और जो काम कर रहे हैं उनके लिए अपने लोगों के समय की कोई कीमत नहीं है। क्या मिठाई की दुकान पर भी इतना समय लगता है?

270 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2018 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech