Loading... Please wait...

विशाल पार्क, एकदम साफ सुथरा!

विवेक सक्सेना
ALSO READ

परदेश में घूमना कई अनुभव लिए होता है। बेटे की छुट्टी थी तो उसने जब कहा कि आज हम लोग घूमने चेलेंगे तो सोचने लगा समय कितनी जल्दी बदल जाता है। एक समय था जब मैं बच्चों को घुमाने ले जाता था। खुद ड्राइव करता और उन्हें सामान खरीद कर देता। मगर अब हालात यह है कि वह हमें बताता है कि हम कहां जा रहे हैं। वहीं कार चलाता है और जब कहीं कुछ खाते-पीते हैं तो बिल का भुगतान भी वहीं करता है। इसकी बड़ी वजह यह है कि यहां की मुद्रा डालर उसी के हाथ में होता हैं और वही बिल देखकर पता लगाता है कि उसे ठीक तरह से पैसे वापस किए गए या नहीं? 

वह हमें स्टेनली पार्क लेकर गया जो कि हमारे घर से करीब 30 किलोमीटर दूर है। कुछ साल पूर्व दुनिया के सबसे खुबसूरत स्थानों में गिना जाने वाला यह पार्क 400 एकड़ में फैला हुआ है। उसके एक और लंबा चौड़ा समुद्र है जहां तमाम जहाज तैर रहे थे। समुद्र के साथ मुंबई के मैरीन ड्राइव की तरह करीब 6 फुट ऊंची एक दीवार है जिस पर लोग टहलते हैं और  उसकी सड़क के साथ एक पतली करीब 6-7 फुट चौड़ी सड़क है जिस पर लोग साईकिल चलाते हैं। 

कुछ लोग दीवार के साथ बनी सीढ़ी से उतर कर समुद्र तक गए जहां संमुद्री चिडि़या तैर रही थी। वहां रखे पत्थरों  पर समुद्री शैवाल नजर आ रहे थे। वहां लगे बोर्डों पर समुद्री शैवालों व जीव-जंतुओं के बारे में जानकारी देने के साथ ही बताया गया कि यहां के समुद्र में ज्वार भरने के कारण दिन में दो बार पानी चढ़ता उतरता है। व उसके कारण ही समुद्री वनस्पति जीवित रहती है। सड़क के साथ के पहाड़ी स्थाजन पर काफी मौटे लगभग 15-20 फुट व्यास वाले देवदार के पेड़ लगे हुए थे। यह ग्रेट ब्लू हेरन नाम बत्तख व हंस से मिलते-जुलते पक्षी का आश्रय स्थतल भी है जहां इस पक्षी के तमाम घौंसले हैं। 

ये पक्षी लुप्तप्राय घोषित हो चुके है। यहां देवदार का एक पेड़ बेहद चर्चित रहा। करीब 100 साल पहले उसकी एक तस्वीर छपी थी जिसके खोखले हो चुके पेड़ में खड़े एक हाथी द्वारा महिला को सूड़ से उठाया हुआ दिखाया गया था। इससे इस पेड़ की विशालता का अनुमान लगाया जा सकता है। 2008 में आंधी के कारण इस पेड़ को काफी नुकसान पहुंचा। वेंकूवर का पहला अधिकारिक हरित स्थान कहा जाने वाला स्टेनली पार्क 1888 में लोगों के लिए खोला गया था। इससे पहले यहां काम व धंधे की तलाश में आए स्पेनिश व ब्रिटिश लोग रहते थे। ये लोग वहां 1858 में सोने की खोज में आए थे। 

यह पार्क 1001 एकड़ में फैला हुआ है जोकि अमेरिका के सेंट्रल पार्क की तुलना में काफी बड़ा हे। इसकी देखरेख वेंकूवर की सरकारी एजेंसियां व पार्क की देखभाल के लिए बनाया गया एक बोर्ड करता हे। समुद्र के साथ बनाई गई 100 साल पुरानी सी वाल करीब 8.8 किलोमीटर लंबी है जिस पर भागते, साईकिल चलाते लोग आसानी से दिख जाएंगे। सबसे ऊंचा पेड़ करीब 75 फुट ऊंचा है व आमतौर सभी पेड़ 100 साल से ज्यादा पुराने हैं। यह एक प्राकृतिक जंगल जैसा है। पहले इस जगह पर कनाड़ा के मूल निवासी फर्स्ट नेशनल रहते थे। जब सरकार ने वहां पार्क बनाने का फैसला किया तो तमाम लोगों से जबरन घर खाली करवाए गए। 

पहले यहां उनका होई-होई नामक गांव था। वे लोग यहां शिकार करते, जानवरों से मांस व घर हासिल करते व संमुद्र में मछलियां पकड़ कर अपना जीवन यापन करते। चूंकि तब इस जगह पर अंग्रेंजों का राज था। अतः कनाड़ा के तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड फ्रैडरिक स्टेनली के नाम पर इसका नाम स्टेनली पार्क रखा गया। शुरू में यहां रहने वाले कई परिवारों ने उन्हें हटाए जाने का विरोध किया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया। मूल निवासियों के घरों में आग लगा दी गई व उनके पशुओं को खोलकर जंगल में भगा दिया गया। उसके बावजूद कुछ लोग यहां 1930 तक रहते रहे। 

पार्क में यहां आने वाले जबरदस्त तूफानों से भी पेड़ों को काफी नुकसान पहुंचा और वे टूट गए जिन्हें जंगलों में होने वाले अग्निकांड से बचाने के लिए हटाना पड़ा। इसकी लोकप्रियता का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि इसे देखने के लिए यहां हर साल कोई 80 लाख लोग आते हैं। यहां बहुचर्चित टोटम पिलर (खंबे) भी हैं जोकि मूल निवासी द्वारा स्थापित किए गए थे। लकड़ी के इन नक्काशीदार खंबों को कहीं और से लाकर यहां स्थापित किया गया है। यहां एक न्यू मछलीघर एक्वेरियम व मिनी ट्रेन भी है। मिनी ट्रेन गर्मियों में चलती है। जब हम लोग यहां पहुंचे तो देखा कि पार्किंग वाली जगह पर कोई आदमी नहीं था बल्कि खंबे पर लगी मशीन में खुद अपनी गाड़ी का नंबर व उसे पार्क करने का समय डाल कर एक घंटे के लिए डेढ़ डालर करीब 80 रुपए का किराया देकर टिकट हासिल करना होता है। 

मैंने बेटे से पूछा कि अगर हम ऐसा न करे तो क्या होगा? उसने कहा कि यह गलती कभी नहीं करना वरना पकड़े जाएंगे और जुर्माना होगा। बताया कि दो घंटे से ज्यादा गाड़ी पार्क नहीं की जा सकती है। यहां की सरकार का लक्ष्य इसे 2020 में पुरी दुनिया के सबसे बड़े व अच्छे पार्क में शामिल करना है। मुझे तो वहां टहलते समय सांस लेने में भी बहुत अच्छा लग रहा था। गंदग विहीन ऐसे पार्क को देखकर मुझे अच्छा लगना स्वाभाविक था। इसके आस-पास का इलाका काफी महंगा है। वैसे यहां की सफाई की एक और वजह वहां खाने-पीने को कोई भी सामान न बेचा जाना लगता है। यहां चलाने के लिए किराए पर साईकिलें मिलती हैं। जब लौट रहा था तो सोच रहा था कि क्या हम अपने देश में भी ऐसे साफ-सुथरे  स्थान की कल्पना कर सकते हैं।

195 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2019 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech