कनाडा से नाता ढूढ़ते हुए जो जाना

विवेक सक्सेना
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हम मनुष्यों में एक बड़ी अजीब आदत होती है। हम अपनी परिचित वस्तुओं लोगों व जगहों का उल्लेख आते ही खुद को उससे जोड़ने की कोशिश करने लगते हैं। जैसे कि अगर किसी फिल्म में अपने शहर की या किसी घूमी हुई जगह की शूटिंग हो तो उछल पड़ते हैं। बीती रात नई फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिंदुस्तान’ देख रहा था तो अभिनेता आमिर खान को यह कहते हुए सुनने पर अच्छा लगा कि वह कानपुर से है। वैसे हमारा उससे क्या लेना। 

जब कनाड़ा आया तो यहां से खुद को जोड़ने के लिए तमाम खोजबीन कर डाली। पता चला कि यह तो हमारी काफी परिचित जगह है। पहले पता चला कि टाईटेनिक जहाज इसी की सीमा के निकट समुद्र में डुबा था व इसकी जमीन फेयर कैम्प पर मरने वाले तमाम लोगों को दफानाया गया। फिर पता चला कि यह देश भले ही भारत से 11,121 किलोमीटर दूर हो मगर इसके बारे में तो हम बहुत पहले से जानते आए हैं। 

जब छठी सातवीं में पढ़ते तो हमें टुंडा के बारे में पढ़ाया जाता था कि उस एक शहर में बर्फ जमी होती है। लोग बर्फ के घर इग्लू बनाते है और स्थानीय जानवरों का शिकार करके उनका मांस खाते हैं। व उनकी खालों से कपड़े तैयार करते हैं व घर के अंदर की छतो व फर्श पर लगाते हैं। पता चला कि कनाड़ा तो टुडा के काफी पास है। जिस वेंकुवर शहर में मैं रहता हूं वह यहां से केवल 2235 किलोमीटर की हवाई दूरी पर है। 

जैसा कि हम जानते है कि पृथ्वी दो ध्रुवों में बंटी है। उसके ऊपरी हिस्से पर उत्तरी ध्रुव व सबसे निचले हिस्से पर दक्षिणी ध्रुव स्थापित हैं। उत्तरी ध्रुव वास्तव में पृथ्वी की 20 फीसदी भूमि पर फैला हुआ है। यह वीरान इलाका है जहां कुछ भी नहीं उगता है। इसकी वजह यह है कि यहां जमीन फर्माफ्रास्ट कहलाती है जो कि एक मीटर से 1 किलोमीटर तक जमी हुई है। 

यहां साल के 10 महीनों में तापमान -45 डिग्री सेंटीग्रेड तक रहता है। जब कि दो माह की गर्मियों में वहां 24 घंटों के लिए सूरज निकलता है। उसकी गर्मी से बर्फ को पिघलने से पृथ्वी के बड़े-बड़े हिस्से दलदल बनकर बह जाते हैं व वहां झीले बन पानी उत्तरी ध्रुव, रूस, फिनलैंड, कनाड़ा व अमेरिका में फैलता है। यहां सफेद भालू, बारहासिंघा कुछ पक्षी व पहाड़ी लोमड़ी सरीखे जानवर व पक्षी रहते हैं। लोग उनका मांस खाकर पक्षियों के अंडे बटोर कर अपना जीवन यापन करते हैं। 

यहां बड़ी तादाद में तेल मिलता है। पहले यहां का अलास्का इलाका रूस के पास में था जोकि उसने बाद में उसे दो सेट/एकड़ की दर पर अमेरिका को बेच दिया व कनाड़ा इसका विरोध करता रह गया। यहां पेड़ नहीं उगते कुछ छोटे पौधे जरूर उग आते हैं। सबसे अहम बात यह है कि दुनिया के सबसे ज्यादा अनुयायियों वाले ईसाई धर्म के सांता क्लाज का घर अलास्फा माना जाता है। वह महज 2252 जनसंख्या वाले इस शहर में हर साल लाखों लोग सांता क्लाज के घर को देखने आते हैं। 

इस घर की भी एक अलग कहानी है। 1949 में एक परिवार यहा आया। इसमें पति कॉन व पत्नी नीली मिलर थे। उन्होंने अपने जीवन यापन के लिए वहां एक परचून की दुकान खोली ली। कॉन हर साल क्रिसमस पर लाल कपड़े पहनकर सांता बनते थे व बच्चे को टाफियां व उपहार बांटते थे। इस बीच वहां सरकारी हाईवे बनाने का फैसला किया और उनकी जगह सड़क से दूर हो गई व उन्होंने 13 किलोमीटर दूर मुख्य सड़क पर अपनी दुकान खोली ली।  उन्होंने उसके सामने सांता क्लाज की एक काफी बड़ी प्लास्टिक की मूर्ति व एक पुरानी गाड़ी रख दी। जब वे यहां आए तो उनके पास महज 140 डालर व दो भूखे बच्चे थे। क्रिसमस पर सांता बनने के कारण व बच्चों में काफी लोकप्रिय हो गए जब वहां काफी कम लोग रहते थे। अतः पोस्टमैन उनकी दुकान पर ही लोगों को डाक दे जाता था। वे लोकप्रिय हुए। उनकी पत्नी 20 साल तक वहां के पोस्ट आफिस की प्रमुख रही। बाद में उन्होंने अपनी दुकान पर क्रिसमस का सजावटी सामान मिठाईयां उस पर बेचने शुरू कर दिए। और वह लोगों के बीच लोकप्रिय होते गए। 

उन्होंने अपनी दुकान के बाहर सांता क्लाज हाऊस लिख दिया। उसके बाद उन्होंने एक नया काम यह किया कि क्रिसमस के मौके पर जो लोग उन्हें पत्र लिखते उसका जवाब वे एक विशिष्ट लैटरहैड पर लिख देते। उन्हें बधाई देते उसके लिए उन्होंने विशेष लैटरहैड छापा। जब कोई उन्हें पत्र लिखता है तो उसे उनके साथ अपना नाम पता लिखा व डाक टिकट लगा हुआ लिफाफा भेजना पड़ता है। जवाब में वे पेन से उनका नाम लिखकर उसे पत्र भेजते हैं। साथ में सांता की फोटो वाला एक डालर होता है। लिफाफे पर लगी मोहर पर लिखा होता है कि हैडपोस्ट मास्टर सांता क्लाज हाऊस नार्थ पोल पोस्ट आफिस है। लोगों ने इसका संप्रदृश्य करना शुरू कर दिया है। 

माना जाता है कि पत्र का जवाब मिलने के लिए यह जरूरी है कि वह क्रिसमस के 10 दिन पहले तक उन तक पहुंच जाए। सबसे ज्यादा पत्र रूस, फिनलैंड, इंग्लैंड, फ्रांस व कनाड़ा से आते हैं। इस साल इन देशों से 40 लाख पत्र भेजे थे जिन सबका उन्होंने जवाब दिया। इस काम में मदद देने के लिए अमेरिका के कई एनजीओ सामने आए हैं। लेखकों, अखबारों, सोशल मीडिया व प्रचार माध्यमों ने इसे बेहद लोकप्रिय बना दिया है। 

अब समझ में आया कि वेंकूवर में सर्दी इतनी ज्यादा क्यों पड़ती है व यहां की रातें इतनी लंबी क्यों होती है। सर्दी बहुत ज्यादा है वरना टुंडा जरूर जाता। टुंडा न सही सर्दी तो छू ही ली है। वैसे वेंकूवर भी काफी खाली-खाली है। वेंकूवर अलास्पा राज्य से लगने वाले ब्रिटिश कोलंबिया राज्य में आता है जबकि महज 7.5 लाख की जनसंख्या वाला यह अमेरिकी राज्य सबसे कम आबादी वाले राज्यों में आता है।

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