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चीन के लोगों का निवेश और मकान

विवेक सक्सेना
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कनाड़ा गजब का देश है और उसके नियम-कानून भी उतने ही गजब-अजब हैं। पिछले दिनों यहां की सरकार ने एक नया सट्टेबाजी-टैक्स कानून बनाया है जोकि यहां खाली पड़ी संपत्ति मकानों के मालिकों को देना होगा। असल में वेंकूवर की एक बड़ी समस्या यह है कि यहां पिछले कुछ वर्षों में मकान की कीमतों में काफी बढोतरी हुई है। इसका असर किराए पर भी पड़ा है। जिससे इस देश के नागरिक भारी प्रभावित हुए हैं। इसी सिलसिले में स्पेक्युलेशन व वेकेंसी टैक्स (सट्टेबाजी व खाली मकान) टैक्स इसलिए लगाया रहा है ताकि इस शहर व देश में बड़ी तादाद में विदेशी निवेश करने के लिए मकान खरीदे। 

ज्यादातर लोग ऐसे हैं जिनके परिवार अपने मूल देश में रहते हैं। उन्होंने अपने घर खाली छोड़े हुए हैं। उन्होने इन्हे किराए पर भी नहीं चढ़ाया है। इनमें से ज्यादातर लोग चीन के हैं। पिछले लगभग एक दशक से ज्यादा समय में चीनी लोगों ने यहां जम कर संपत्ति में निवेश किया। इसके कई कारण रहे। पहले हांगकांग में रहने वाले चीनियों ने वहां राजनीतिक अस्थिरता की संभावना को देखते हुए निवेश किया व फिर चीन में रहने वाले पैसे वाले लोग यहां पैसा लगाने लगे।  कनाड़ा में सबसे ज्यादा तादाद में चीनी लोग रहते हैं। ये व्यापार करते हैं और पैसे वाले लोगों से जोकि चीन से आने वाले अपने लोगों की मदद भी करते हैं। अमेरिका की तुलना में यहां शिक्षा अच्छी व सस्ती है। इसलिए बड़ी तादाद में चीनी मां-बाप अपने बच्चों को पढ़ने के लिए यहां भेज रहे हैं। चीन के कम्युनिस्ट देश होने के कारण वे बाहर बसना पसंद करते हैं क्योंकि एक वामपंथी देश होने के कारण वहां के नागरिको की सारी संपत्ति की मालिक सरकार ही होती है। 

वैसे भी कनाड़ा में पढ़ाई व नौकरी की संभावनाएं काफी अच्छी है। यह एक साफ-सुथरा विकसित देश है। पिछले 10 वर्षों में यहां आने वाले चीनी छात्रों की संख्या में 173 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यहां आने वाले अंतर्राष्ट्रीय छात्रों में से एक-तिहाई चीन के हैं। चीनियों को जमीन-जायदाद में हमेशा से रूचि रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां रियल एस्टेट का सकल घरेलू उत्पाद में हिस्सा 11 फीसदी है। वहां के बीजिंग, शंघाई जैसे बड़े शहरों में जमीन के दामों में काफी बढ़ोतरी हुई है। 

हां, चीन के प्रदूषण भरे शहर में जितने में एक फ्लैट मिलता है उतनी ही राशि में कनाड़ा के खूबसुरत वेंकूवर सरीखे शहर में एक बड़ा मकान मिल जाता है। इसके अलावा कनाड़ा सरकार ने यहां लोगों को बसने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक नियम बनाया है। जैसे कि फ्रेंच भाषी क्यूबेक राज्य में अगर तीन सालों में 8 लाख डालर का निवेश करते हैं तो आप वहां की नागरिकता हासिल कर सकते हैं। पिछले साल यहा पढ़ने के लिए 1.32 लाख चीनी छात्र आए थे। 

कनाड़ा के अलावा अमेरिका, आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड से भी बड़ी तादाद में छात्र जा रहे हैं। इसे देखते हुए प्रापर्टी डीलर इन देशों में काफी सक्रिय हो गए हैं। इन देशों के प्रापर्टी डीलर्स ने चीन की सबसे बड़ी प्रापर्टी डीलर कंपनी हुवाई डॉट कॉम से संपर्क किया हुआ है जोकि 80 देशों में 20 लाख मकानों की खरीद-फरोख्त करती है। वे इसके माध्यम से चीनियो को मकान बेच रहा हैं। 

यहां चीनी लोग थोक के भाव से मकान खरीद रहे हैं जोकि उनके न रहने पर खाली पड़े रहते हैं। इसे आप निवेश कह सकते हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में यहां की संपत्ति में जबरदस्त तेजी आई है। इसे लेकर कनाड़ा सरकार थोड़ी चिंतित भी है क्योंकि इससे सुरक्षा संबंधी खतरें पैदा हो सकते हैं। जिनमें आर्थिक खतरे भी शामिल हैं। चीनी यहां आर्थिक रूप से संपन्न है व उन्होंने अपनी बड़ी कंपनियां खड़ी कर रखी है। इसे देखते हुए यहां की सरकार ने अपने नियमों में कड़ाई की। 

कुछ साल पहले ब्रिटिश कोलंबिया सरकार ने यहां संपत्ति खरीदने वाले विदेशियों को संपत्ति पर 15 फीसदी कर लगाया जोकि मेट्रो वेंकूवर ने बाद में बढ़ा कर 20 फीसदी कर दिया गया। इसके साथ ही मकान खरीदने के लिए दिए जाने वाले बैंक कर्ज को भी महंगा कर दो से तीन फीसदी सालाना कर दिया। उधर चीन की सरकार ने भी कार्रवाई करते हुए अपने नागरिकों द्वारा विदेश भेजी जाने वाली अधिकतम विदेशी मुद्रा को 50,000 अमेरिकी डालर से घटाकर 24,000 डालर कर दिया। 

अब वृहद वेंकूवर की नगर पालिका ने अगले माह यहां के मकान मालिकों को नोटिस भेजने का फैसला किया है जिससे कि अपने सोशल इंश्योरेंस (हमारे आधार नंबर) तथा तमाम दूसरी जानकारियां देने के बाद यह कहना होगा कि उन पर क्यों न 31 मार्च 2019 तक यह कर लगाया जाए? अगर एक व्यक्ति के परिवार में कई संपत्तियां है तो हर संपत्ति को उसे ब्यौरा देना होगा। ऐसा करके यहां की विदेशी मकान मालिको व निवेश के लिए मकान खरीदने वालो का पता लगाया जा सकेगा। 

यहां के हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक युवा 25 वर्षीय कनाड़ाई युवक के मुताबिक जब वह महज 5 साल का था तब उसके मां-बाप ने 12,000 डॉलर का एक घर खरीदा था व दो साल बाद जब उसके दो भाई बहन हुए तो उन्होंने मात्र 12 हजार डालर की लागत से एक मंजिल और बनाई मगर अब महज दो दशक से भी कम समय में मकान की कीमत 50 लाख डालर हो गई जोकि यहां मकानों की बढ़ती कीमता का उदाहरण है। यह माना जा रहा है कि सरकार घर खाली रखने वाले विदेशी नागरिकों पर लगने वाले गृहकर में आधे फीसदी की बढ़ोतरी करेगी। जहां और ज्यादा संख्या में किराए पर लेने के लिए घर मिलेंगे वहीं सरकार को राजस्व भी हासिल होगा और आवास की समस्या हल करने में मदद मिलेंगी।
 

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