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अनोखे थे बुश, उपलब्धियों के साथ

विवेक सक्सेना
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अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति लंबी जिदंगी जीने का रिकार्ड बनाते हुए इस दुनिया से चले गए। जार्ज एम डब्ल्यू बुश के बेटे लगातार दो बार वहां के राष्ट्रपति बने। उन्होंने इस देश के 43वें राष्ट्रपति के पिता होने का गौरव हासिल किया। उन्हें बुश सीनियर कहकर संबोधित किया जाता था। वे 94 साल के थे। उन्होंने बहुत उथल-पुथल भरे समय में अमेरिका का नेतृत्व संभाला व इनके चलते जबरदस्त आर्थिक दिक्कतो का सामना करने वाले इसे देश ने उन्हें दोबारा राष्ट्रपति बनने का मौका नहीं दिया। महज 8 महीने पहले ही उनकी पत्नी बारबरा बुश का 74 साल की आयु में निधन हुआ। 

वे टेक्सास से दो बार सांसद बने व संयुक्त राष्ट्र में राजदूत रहे। वाटरगेट कांड में अमेरिका दुनिया भर में बदनाम हुआ उस समय वे रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के अध्यक्ष थे। जब रोनाल्ड रीगन राष्ट्रपति थे तब वे उपराष्ट्रपति बने। कुख्यात खुफिया एजेंसी सीआरए के निदेशक व चीन में अमेरिका के राजदूत बने। उनके पिता भी अमेरिकी सांसद थे। उन्होंने इस देश का ऐसा राष्ट्रपति होने का गौरव हासिल किया जिसका बेटा जार्ज डब्ल्यू बुश भी अमेरिका का राष्ट्रपति था। हालांकि वे अपने पिता से भी दो कदम आगे निकले व इस पद के लिए दोबारा चुनाव जीत गए। 

वे अंतिम ऐसे सैनिक थे जिसने द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लिया और राष्ट्रपति भवन पहुंचे। जब ईराक ने अगस्त 1990 में कुवैत पर कब्जा किया तब उन्होंने बहुत गजब का कमाल किया। पड़ोसी अरब राष्ट्रो को साथ लेकर एक अंतर्राष्ट्रीय सेना बनाई और सबने मिलकर कुवैत को आजाद करवा कर ईराक को वहां से भगा दिया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छवि बेहद अच्छी होने के बावजूद वे दोबारा इस पद के लिए चुनाव नहीं जीत पाए। वे पाकिस्तान व चीन के बढ़ते असर से भलीभांति परिचित थे। 

जब अफगानिस्तान से सोवियत संघ की सेनाओं की वापसी हुई तो उनके द्वारा खतरा पैदा होने की संभावनाएं और बढ़ गई। उन्होंने पाकिस्तान को यह सर्टिफिकेट देने से इंकार कर दिया कि उसने परमाणु बम नहीं बनाया है। उनके कार्यकाल में 1985 में तत्कालीन रक्षामंत्री केसी पंत अमेरिका जाने वाले दूसरे भारतीय रक्षा मंत्री थे। इससे पहले 1964 में यशवंत चव्हाण वहां गए थे। जब उन्हें लगा कि भारत व पाकिस्तान के बीच परमाणु तनाव बढ़ रहा है तो उन्होंने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार राबर्ट गेट्स को भारत व पाकिस्तान भेजा। उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र द्वारा कश्मीर मुद्दा सुलझाने के लिए यह मसला जनमत संग्रह के जरिए हल करने के पक्ष में नहीं है। 

उन्होंने शिमला समझौते की तरह द्विपक्षीय बातचीत के जरिए दोनों पक्षो से इसे हल करने को कहा। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि खाड़ी युद्ध के दौरान अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मुंबई में ईधन भरने की छूट व अनुमति प्रदान करने के लिए भारत को मनाना था। वीपी सिंह व चंद्रशेखर की सरकारों ने कई महीनों तक इस काम को चुपचाप जारी रहने दिया। जब एक अखबार में मुंबई के अमेरिकी सैन्य विमान में तेल भरे जाने की तस्वीर छपी तो जमकर हंगामा हुआ। उन्होंने सबसे अहम रिकार्ड यह बनया कि वे अमेरिका के ऐसे एकमात्र राष्ट्रपति थे जिसने अपनी पत्नी के साथ सबसे ज्यादा समय बिताया। 

उन्होंने 1945 में बारबरा पियर्स से शादी की और वे दोनों 73 साल तक एक साथ रहे। जब वे 1988 में चुनाव लड़ रहे थे तब उनकी कही यह बात बहुत लोकप्रिय हुई कि मेरे ओठों को पढ़े कोई नया कर नहीं। हालांकि उन्होंने अपने इस वादे को पूरा नहीं किया व देश की खराब माली हालत को देखते हुए नए कर लगाए। वे 1992 में बिल क्लिंटन के हाथो चुनाव हार गए। यह वह व्यक्ति था जिसे 32 देशों की 4.25 लाख की सेना व आपरेशन डेजर्ट स्ट्राम के 1.18 अमेरिकी सैनिको की मदद से उत्कृष्ट जीत हासिल करने के कारण दुनिया भर में वाहवाही मिली थी। 

वे और उनकी पत्नी मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नापसंद करते थे। उन्होंने चुनाव में उन्हें वोट तक नहीं दिया था। इसके बावजूद उनका जीवन विवादास्पद रहा। उन्होंने काफी पहले अफगानिस्तान जा कर अल कायदा के प्रमुख व कुख्यात आतंकवादी बिन लादेन से मुलाकात की थी। वह उस समय अफगानिस्तान में सोवियत सेनाओं से मुकबला करने में अमेरिका की मदद कर रहा था। उन्होंने उसे पैसा व हथियार उपलब्ध करवाए थे। ईराक युद्ध के दौरान कथित आतंकवादियों से उगलवाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सेना के तरीको की आलोचना भी हुई थी। तत्कालीन एक रिपब्लिकन सांसद ने कहा था कि अगर यह सब जारी रहता है तो हम किसी भी व्यक्ति से कुछ भी कबूलवा सकते हैं। 

उन्हें जानवरो से बहुत प्यार था। जब वे अपनी बिल्ली व्हाइट हाउस लेकर गए तो उसके नाम के आगे इंडिया बुलाए जाने के कारण उनकी काफी आलोचना हुई व दक्षिण में उनके पुतले तक जलाए गए। वे जानवरों से काफी प्यार करते थे। उन्होंने एक कुत्ता पाल रखा है जोकि उन्हें सेना ने दिया था। यह बुजुर्ग लोगों का सामान लाने-ले-जाने व यहां तक फोन उठाने में मदद करता है। वे कहते थे कि वह पैग बनाने के अलावा हर तरह का काम कर सकता है। उनके पार्थिव शरीर के साथ यह कुत्ता तक वहां जाएगा जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

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