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तब तो घृणित अदला-बदली?

विवेक सक्सेना
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पिछले दिनों अगस्ता-वेस्टलैंड हैलीकाप्टर डील के दलाल क्रिश्चियन मिशेल को दुबई से भारत लाए जाने के बाद अटकले जोर पकड़ने लगी कि उसे एक राजकुमारी को दुबई को सौंपे जाने, उसकी कीमत के बदले में भारत लाया गया है। अहम बात यह है कि भारत सरकार ने अभी तक इस तरह की किसी खबर का खंडन नहीं किया है। इस बारे में जो जानकारी हासिल हुई है वह बेहद चौंकाने वाली है और यह साबित करती है कि किस तरह से हमारी सरकार ने उस राजकुमारी के मानवाधिकारों की ऐसी-तैसी करते हुए उसके पिता व दुबई के प्रधानमंत्री को उसे उस पर जुल्म ढहाने के लिए सौंप दिया।

कमोबेश यह मामला एक मसाला हिंदी फिल्म जैसा है जिसमें जब एक अत्याचार का शिकार कोई व्यक्ति इंसाफ के लिए पुलिस के पास जाता है तो वह उसे अपराधी को सौंप देता है जिससे कि उसे अपनी जान का खतरा था। यह मामला अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ता जा रहा है। लतीफा मोहम्मद बिन रशीद अल मखतूम एक दुबई के शाही परिवार की 38 वर्षीय राजकुमारी है। वह दुबई के शासक व प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन रशीद अल मखतूम की बेटी है। शेख ने उसकी मां से शादी की थी जिनका नाम हुरिया अल अहमद मसीह है वे अल्जीरिया की है। 

वह राजकुमारी 4 मार्च 2018 से लापता है। उसे भारतीय सीमा से करीब 40 किलोमीटर दूर अंर्तराष्ट्रीय सीमा में तब पकड़ लिया गया था जबकि वह राजनैतिक शरण के लिए अमेरिकी दूतावास जाने की कोशिश कर रही थी। उसे पकड़ने में दुबई की सशक्त सेना व भारतीय तटरक्षक सेना का विशेष हाथ रहा बताते हैं। वह आसमान में विमान से कूदकर गोता लगाने वाली एक प्रशिक्षित स्काईडाइवर है। उसने अपने पकड़े जाने से पूर्व अपना एक वीडियो जारी किया था जिसमें उसे यह कहते दिखाया गया था कि आप लोग मुझे अंतिम बार देख रहे हैं। इसके बाद मैं कितने अत्याचारों की शिकार बनूंगी इसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। 

अब तक जो खबरें आई है उनके मुताबिक वह अपने पिता की मनमानी व अत्याचारों के कारण काफी परेशान थी। खबर यह है कि उनसे छुटकारा पाने के लिए वह 24 फरवरी 2013 को फिनलैंड के नागरिक टीना जौहियानेन के साथ अपने देश से भागी व आगे चलकर अमेरिकी फ्रांसीसी नागरिक हर्व जौबर्ट की नौका (याच) में सवार हो गई ताकि वे लोग वहां से भाग सके। उसने 26 फरवरी को ब्रिटेन में वकील राधा स्टर्लिग से संपर्क किया। जौबर्ट ने 26 फरवरी 2018 को अपनी यात्रा समाप्त करने के संबंध में एक भारतीय पत्रकार से संपर्क किया। 

दावा है कि 4 मार्च 2018 को राजकुमारी लतीफा जौबर्ट व जौहियानेन अपनी नौका के तीन फिलीपिनी नागरिको समेत हिंद महासागर से गायब हो गई। यह घटना तब घटी जब वे लोग भारतीय सीमा के काफी करीब थे व लोग गोवा पहुंचने ही वाले थे। तब से लेकर आज तक उन लोगों के बारे में सुना ही नहीं गया। इस बारे में विदेशी अखबार ‘डेली मेल’ ने 9 मार्च को पहली बार खबर छापी। अपने गायब होने के पहले राजकुमारी ने 39 मिनट का एक वीडियो तैयार किया था। उसका कहना था कि अगर वह लापता हो जाए तो उस हालत में उसका वह वीडियो सार्वजनिक कर दिया जाए। 

इस वीडियो में उसे यह कहते बताया गया था कि अपने पिता के अत्याचारों व व्यवहार के कारण वह देश छोड़ कर भाग रही है। हालांकि भारतीय तट रक्षको ने इस तरह की कोई भी घटना होने से ही इंकार कर दिया। मगर फिनेलैंड के नेशनल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन ने वहां के विदेश मंत्रालय के साथ मिल कर राजकुमारी लतीफा व अपने नागरिक के जबरन अपह्त किए जाने के मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पौत 20 मार्च 2018 को संयुक्त अरब अमीरात के फुजाराय बंदरगाह के पास देखी गई। उसके नाविक भी उस पर स्वार थे। अगले दिन वह नौका श्रीलंका के लिए चली गई। इस पर जौबर्ट सहित तीन नागरिक सवार थे। 

वह 2 अप्रैल को श्रीलंका पहुंच गई। जौबर्ट एक रिटायर नौ-सेना अधिकारी व फ्रांसीसी जासूस था। उसे पता था कि जौबर्ट को दुबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था व वह बुरका पहन कर स्कूबा गौताखोर बनकर वहां से गोते लगाते हुए फरार हो गया था। उसने 2010 में अपनी इस कारनामे पर किताब लिखी। जिसे पढ़कर शेख लतीफा ने भी दुबई से भागने का फैसला किया। जौडियान उसे मार्शल खेलों का प्रशिक्षण देता था। वह अपने भाई की मदद से जौबर्ट की पौत तक एक नाव के जरिए पहुंची। 

जौबर्ट व उनकी पत्नी इस अपहरण के चश्मदीद गवाह है जिन्होंने अमीरत पुलिस व कोस्ट गार्डो को उसे जबरन ले जाते हुए देखा था। उनके मुताबिक वह उस समय अपनी जिदंगी बचाने के लिए चीखे भर रही थी। तब से आज तक न तो उसे किसी ने देखा और न ही उसके बारे में कुछ सुना है। इस घटना के बारे में ब्रिटिश व फिलीपिंस के अखबारों ने जमकर छापा व सोशल मीडिया पर भी उसका खुलासा ह्यूमन राइट वाच ग्रुप व एमनेस्टी इंटरनेशनल सरीखे संगठन सक्रिय होकर उसका पता बताने की मांग करने लगे। 

इस बारे में तमाम संगठनों ने भारत सरकार व संयुक्त अरब अमीरात की सरकारों से सवाल भी पूछे मगर किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। दुबई सरकार ने कहा है कि हो सकता है कि इस पौत में कोई विदेशी हाथ हो। ये खबरें छपी कि इस अपहरण में भारत की अहम भूमिका थी। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनके लोगों ने संयुक्त अरब अमीरात के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन रशीद अल माखूतम के अनुरोध पर यह अपहरण किया था कि उसके बदले वह क्रिश्चियन मिशेल को भारत को सौपेंगा। वहीं फिनलैंड सरकार की चुप्पी के कारण उसकी भी जबरदस्त आलोचना हुई है। हालांकि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने संयुक्त अरब अमीरात व भारत सरकार से इस मामले की जानकारी देने की मांग की है ताकि उस युवती का पता लगाया जा सके।

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