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जदयू को झारखंड से बड़ी उम्मीद

जब से नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी पार्टियों का गठबंधन बनाने का प्रयास शुरू किया है तब से उनकी पार्टी जदयू की उम्मीदें झारखंड में बढ़ गई हैं। नीतीश ने पहले तो झारखंड को ध्यान में रख कर प्रदेश के अपने पुराने नेता खीरू महतो को राज्यसभा में भेजा। इसका मकसद बिहार की तरह झारखंड में भी कोईरी-कुर्मी समीकरण को मजबूत करने और पार्टी का पुराना आधार हासिल करना था। हालांकि खीरू महतो इसमें कोई खास कारगर नहीं हो पा रहे हैं। फिर भी पार्टी की ओर से मेहनत में कोई कमी नहीं रखी जा रही है। पिछले एक हफ्ते में जनता दल यू के दोनों शीर्ष नेताओं के साथ साथ कम से कम तीन बड़े नेताओं ने प्रदेश का दौरा किया है और संगठन को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की है।

बुधवार को नीतीश कुमार रांची पहुंचे और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता व प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। नीतीश की मुलाकात का मकसद विपक्षी गठबंधन पर चर्चा करना और हेमंत को बिहार में होने वाली बैठक के लिए आमंत्रित करना था। लेकिन इससे प्रदेश की जदयू कमेटी में जोश आया है और वे जेएमएम के साथ तालमेल की संभावना देख रहे हैं। नीतीश की यात्रा से एक दिन पहले बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और झारखंड के प्रभारी अशोक चौधरी ने रांची का दौरा किया और तीन दिन रांची में रूके। पार्टी नेताओं के साथ बैठक, प्रेस कांफ्रेंस, नया दफ्तर बनाने सहित कई कार्यक्रमों में उन्होंने हिस्सा लिया। उनसे पहले जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने रांची की दौरा किया था और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिले थे। सो, एक हफ्ते में ललन सिंह, अशोक चौधरी और फिर नीतीश कुमार का रांची दौरा अनायास नहीं है। ध्यान रहे एक समय झारखंड विधानसभा में जदयू के छह विधायक थे और भाजपा की सरकार उसके समर्थन से बनी थी। राज्य की करीब 24 फीसदी आबादी कुर्मी की है, जिसके नेता बिहार में नीतीश कुमार हैं। राष्ट्रीय स्तर पर उनका कद बढ़ता है तो पार्टी को झारखंड में इसका लाभ मिल सकता है।

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