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विपक्ष के लिए सीट बंटवारा आसान नहीं

कांग्रेस ने सीट बंटवारे पर बातचीत के लिए कमेटी बना दी है। उस कमेटी में ऐसे वरिष्ठ नेताओं को रखा है, जिनता विपक्षी गठबंधन के प्रादेशिक नेताओं के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। इसके बावजूद कांग्रेस के लिए सीट बंटवारा मुश्किल होने जा रहा है। यह भी कह सकते हैं कि पूरे विपक्ष के लिए सीट बंटवारे में मुश्किल आने वाली है। इसके कई कारण हैं, जिनमें से एक मुख्य कारण यह है कि सारी प्रादेशिक पार्टियां चाहती हैं कि कांग्रेस कम सीटों पर चुनाव लड़े और उनके लिए ज्यादा सीट छोड़े। दूसरा कारण यह है कि कई राज्यों में अभी गठबंधन ही तय नहीं है और तीसरा कारण यह है कि कई जगह तालमेल करके लड़ने की बजाय अकेले लड़ना ज्यादा बेहतर विकल्प है।

पहली समस्या सीटों की संख्या को लेकर है। तमाम प्रादेशिक पार्टियां चाहती हैं कि कांग्रेस कम सीटों पर लड़े। इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण तो यह है कि हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में कांग्रेस की हार हुई है, जिससे प्रादेशिक पार्टियों का हौसला बढ़ा है और दूसरा कारण यह है कि पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा है। इस वजह से राज्यों में कांग्रेस के सांसदों और विधायकों की स्थिति के आधार पर पार्टियां तालमेल करने की बात कह रही है।

दूसरी ओर कांग्रेस ने बहुत ऊंचाई से मोलभाव शुरू किया है। जैसे पिछले दिनों दिल्ली में बिहार प्रदेश के नेताओं के साथ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की बातचीत हुई तो बिहार कांग्रेस के नेताओं ने 10 लोकसभा सीटों की मांग रखी। अगर राजद, जदयू, कांग्रेस और लेफ्ट तीनों लड़ते हैं तो कांग्रेस के लिए तीन से चार सीट की संभावना बनती है लेकिन कांग्रेस ने 10 सीटें मांगीं। इसी तरह कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में 20 सीटों की मांग रखी है। झारखंड में उसे आठ से नौ सीटें चाहिए। दिल्ली और पंजाब दोनों जगह कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी से ज्यादा सीटों की मांग की है। कांग्रेस का यह रवैया देख कर विपक्षी पार्टियों ने भी मोलभाव का स्तर ऊंच कर दिया है।

कई राज्यों में अभी गठबंधन तय नहीं है। बिहार में जनता दल यू को लेकर संशय है और इस बात की चर्चा हो रही है नीतीश कुमार फिर से भाजपा के साथ जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो समीकरण बदल जाएगा। तब हो सकता है कि कांग्रेस को 10 सीटें मिल जाएं। इसी तरह उत्तर प्रदेश की तस्वीर भी साफ नहीं है। बसपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस की बसपा से बात हो रही है। वैसे एक खबर यह भी है कि सपा, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के बीच शुरुआती बातचीत हो गई है। फिर भी 15 जनवरी तक इंतजार करना होगा। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने और केरल में सीपीएम ने ऐलान कर दिया है कि कोई तालमेल नहीं होगा। इसलिए वहां सीट बंटवारे की बात ही नहीं होगी। दिल्ली और पंजाब में भी अभी फैसला नहीं हुआ है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच तालमेल होगा या नहीं।

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