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चुनाव आयोग का फटाफट फैसला

चुनाव आयोग ने घोषित कर दिया कि हरियाणा के चुनाव में कुछ भी गड़बड़ी नहीं हुई है। सब कुछ बिल्कुल ठीक है और रूल बुक से सारे काम हुए हैं। चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को चिट्ठी लिखी है और साथ ही 16 सौ पन्नों से ज्यादा के दस्तावेज भेज हैं, जिनमें हर सवाल का जवाब दिया गया है। इसके बावजूद हकीकत यह है कि चुनाव आयोग किसी भी मामले के तकनीकी पहलू में नहीं गया है। आयोग का फोकस इस बात पर है कि हर बिंदु पर कांग्रेस के उम्मीदवार या उनके अधिकृत प्रत्याशी मौजूद थे और सारे काम उनकी मौजूदगी में हुए हैं। यह सही है कि ईवीएम में मॉक पोल, फिर मतदान के बाद उनको सील करना और गिनती के समय सील खोलना यह सब काम सभी पार्टियों के प्रत्याशियों की मौजदगी में होता है। लेकिन सिर्फ इससे यह साबित नहीं होता है कि मशीन में कोई तकनीकी छेड़छाड़ नहीं की गई है।

चुनाव आयोग इस तकनीकी पहलू में नहीं गया कि आखिर 10 घंटे की पोलिंग के बाद किसी ईवीएम की बैटरी 99 फीसदी चार्ज कैसे रह सकती है? यहां तो सबसे अच्छी बैटरी भी एक निश्चित समय में डिस्चार्ज हो जाती है या उसका चार्ज कम हो जाता है। ईवीएम तो 10 घंटे या उससे ज्यादा समय तक इस्तेमाल होती है और उसके बाद कई दिन तक बंद रहने के बाद उसे गिनती के लिए खोला जाता है। फिर भी कुछ मशीनों की बैटरी अगर 60 फीसदी चार्ज रही और कुछ 99 फीसदी चार्ज रही तो आयोग को बताना चाहिए कि ऐसा कैसे हुआ। क्या कुछ मशीनों की बैटरी दोबारा चार्ज की गई थी या बैटरी बदली गई थी? बहरहाल, ऐसे तकनीकी पहलुओं की जांच आने वाले दिनों में होगी क्योंकि अनेक उम्मीदवारों ने मशीनों पर सवाल उठाया है और जांच के लिए पैसे जमा कराएं हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने एक फैसला दिया था, जिसमें कहा था कि अगर दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को मशीन की गड़बड़ी का शक है तो वह नतीजे के एक हफ्ते के अंदर इसकी शिकायत कर सकता है और चुनाव आयोग इंजीनियरों की एक टीम से मशीनों की जांच कराएगा। इसका खर्च उम्मीदवारों को देना होता है।

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