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लालू यादव ने नीतीश की ताकत बढ़ाई

बिहार में लालू प्रसाद और नीतीश कुमार क्या अंदरखाने कोई खेल रच रहे हैं? पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है लेकिन भाजपा के नेता आशंकित हैं। उनको लग रहा है कि कोई खिचड़ी पक रही है। असल में बिहार में 15 और 16 फरवरी के घटनाक्रम के बाद भाजपा के नेता सावधान हुए हैं। 15 फरवरी को राज्यसभा के लिए नामांकन के आखिरी दिन लालू प्रसाद अपने दोनों उम्मीदवारों के नामांकन के लिए विधानसभा पहुंचे तो उसी समय नीतीश कुमार विधानसभा से निकल रहे थे। यह संयोग कतई नहीं था कि सीढ़ियों पर दोनों की मुलाकात हुई। नीतीश जान बूझकर ऐसे समय निकले जब लालू से आमना सामना हो और जब दोनों मिले तो बड़ी आत्मीयता से मिले। नीतीश ने लालू प्रसाद के दोनों बाजू पकड़ लिए और हंसते हुए दोनों की फोटो आई। तेजस्वी यादव भी साथ में थे।

इसके अगले दिन यानी 16 फरवरी को जब तेजस्वी सासाराम पहुंचे राहुल की यात्रा में शामिल होने तो लालू प्रसाद सोनपुर निकल लिए। पटना से पत्रकार उनके पीछे पड़े और सोनपुर में नीतीश को लेकर तीन सवाल पूछे। पहला, क्या नीतीश फिर आएंगे तो लालू उनका स्वागत करेंगे? लालू ने कहा- आएंगे तब देखेंगे उन्होंने इनकार नहीं किया। दूसरा, क्या नीतीश के लिए दरवाजा खुला हुआ है? लालू ने कहा- दरवाजा खुला ही रहता है। तीसरा, नीतीश क्या प्रधानमंत्री पद के योग्य हैं? लालू- उनमें कोई कमी नहीं है। लालू प्रसाद के इन तीन जवाबों ने भाजपा नेताओं की नींद उड़ाई है।

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हालांकि यह तय है कि नीतीश कुमार अभी कहीं नहीं जा रहे हैं। लोकसभा का चुनाव वे भाजपा के साथ ही लड़ने जा रहे हैं। लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद कुछ भी हो सकता है। लालू प्रसाद ने दरवाजा खुला रखा है क्योंकि उनको पता है कि तेजस्वी को अगर कोई मुख्यमंत्री बना सकता है तो वह नीतीश कुमार हैं। जब तक नीतीश भाजपा के साथ रहेंगे तब तक राजद के जीतने की संभावना नहीं है। विधानसभा चुनाव में राजद को फायदा तभी है, जब या तो नीतीश उसके साथ लड़ें या अकेले लड़ें। तभी उन्होंने दरवाजा खुला रखा है।

अगर दो दिन के इस घटनाक्रम को तात्कालिक संदर्भ में देखें तो एकमात्र लाभार्थी नीतीश कुमार दिखते हैं। लालू प्रसाद ने भाजपा के साथ उनकी मोलभाव करने की क्षमता बढ़ा दी है। अभी तक कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार बैकफुट पर हैं और भाजपा अपने हिसाब से उनको लोकसभा की सीटें देगी। अब वह बात नहीं है। नीतीश अपने हिसाब से मोलभाव करेंगे। सीटें लेंगे और सीटों की अदला-बदली भी करेंगे। उन्होंने बता दिया कि लालू प्रसाद के यहां उनका इंतजार हो रहा है। इसलिए भाजपा अभी उनके साथ कोई खेला नहीं कर सकती है। लोकसभा चुनाव तक नीतीश ने भाजपा को बैकफुट पर ला दिया है। उसके बाद की उसके बाद देखेंगे।

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