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पासवान परिवार का झगड़ा शाह सुलझाएंगे

Chirag Paswan Pashupati Paras

Chirag Paswan Pashupati Paras

केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस और उनके भतीजे चिराग पासवान का विवाद नहीं सुलझ रहा है। भाजपा की ओर से बताया जा रहा है कि प्रदेश के नेताओं ने कोशिश कर ली है और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी कोशिश कर चुके हैं। लेकिन दोनों मानने को तैयार नहीं हैं। दोनों इस बात के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं कि वे एक साथ एनडीए में रहेंगे और दूसरी विवाद यह है कि पशुपति पारस हाजीपुर सीट छोड़ने को राजी नहीं हैं। Chirag Paswan Pashupati Paras

ध्यान रहे वह सीट उनके बड़े भाई रामविलास पासवान की है और उन्होंने ही अपनी सीट पारस को दी थी। 2019 के चुनाव में जब रामविलास पासवान राज्यसभा गए तो उन्होंने अपनी जीती हाजीपुर सीट से पारस को चुनाव लड़ाया था। सो, वे सीट नहीं छोड़ रहे हैं, जबकि चिराग पासवान वह सीट हर हाल में लेना चाहते हैं।

दूसरी ओर कहा जा रहा है कि भाजपा दोनों को साथ बनाए रखना चाहती है। इसलिए कहा जा रहा है कि अमित शाह अब पंचायत करेंगे। गौरतलब है कि छह सांसदों वाली लोक जनशक्ति पार्टी टूटी थी तो पशुपति पारस के साथ पांच सांसद थे और चिराग अकेले रह गए थे। लेकिन भाजपा को पता है कि रामविलास पासवान की विरासत चिराग के साथ है।

इसलिए वह चिराग को ज्यादा सीटें देने पर राजी है। एक फॉर्मूले के मुताबिक चिराग को चार और पारस को दो सीटें मिलेंगी। इसमें एक प्रस्ताव यह है कि पारस के एक या दो सांसदों को भाजपा अपने चुनाव चिन्ह पर लड़ा सकती है। लेकिन पेंच यह है कि चिराग अपने लिए अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित दो सीट चाहते हैं।

अभी दो सीटें- हाजीपुर और समस्तीपुर पारस खेमे के पास है, जबकि चिराग के पास जमुई सीट है। सो, पासवान परिवार का विवाद सुलझाना बड़ा सिरदर्द है। लेकिन भाजपा और जदयू के नेता उम्मीद कर रहे हैं कि अमित शाह इसका कोई न कोई रास्ता निकाल देंगे।

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