राजद, कांग्रेस की सीटों की जिद

बिहार में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने सीटों की ऐसी जिद बनाई है, जिससे तालमेल अभी तक अटका हुआ है। बुधवार को नई दिल्ली में सात घंटे की माथापच्ची के बाद भी गठबंधन में सीट का बंटवारा फाइनल नहीं हुआ। इसका कारण यह है कि दोनों बड़ी पार्टियां और उनके साथ साथ कुछ छोटी पार्टियां सीटों के लिए अड़ी हैं। इसके उलट कर्नाटक में तुरंत फैसला हो गया क्योंकि जेडीएस ने जिद नहीं की। कांग्रेस ने वहां भी जिद की तभी 12 सीट से शुरू करने वाली जेडीएस आठ सीट पर आई। जेडीएस ने गठबंधन की खातिर अपनी जिद छोड़ी। कांग्रेस हर जगह सहयोगियों को दबा कर ज्यादा सीट लेने का प्रयास कर रही है। इसी वजह महाराष्ट्र, बिहार आदि राज्यों में गठबंधन अटका है।

कांग्रेस 12 सीटों पर अड़ी थी और बड़ी मुश्किल से अब दस सीटों पर राजी हुई है। इसी तरह राजद 22 सीटों पर अड़ी थी और बहुत मुश्किल से एक सीट कम करने पर राजी हुई है। इस वजह से उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा और जीतन राम मांझी की पार्टी हम को सीट देने में दिक्कत हुई। मांझी इस बात पर अड़े थे कि वे रालोसपा के बराबर सीट लेंगे। दूसरी ओर रालोसपा पांच सीट पर अड़ी थी। हालांकि छह सात सीटें छोड़ कर कांग्रेस के पास मजबूत उम्मीदवार नहीं हैं। रालोसपा में उपेंद्र कुशवाहा और हम में मांझी के अलावा कोई उम्मीदवार नहीं है। पर सब ज्यादा सीटों पर अड़े हैं और माना जा रहा है कि सीटों की बोली लगाई जा रही है। जन अधिकार पार्टी, लोकतांत्रिक जनता दल और विकासशील इंसान पार्टी के नेता भी सीटों के लिए अड़े हैं।

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