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कन्हैया का चुनाव लड़ना मुश्किल

सीपीआई के नेता और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके ऊपर देशद्रोह के आरोप लगे हैं और दिल्ली पुलिस ने आरोपपत्र दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में दायर कर दी है। 19 जनवरी को इस मामले की सुनवाई होगी और सारे देश की नजरें इस पर रहेंगी। आरोप तय होने के बाद सुनवाई चलती रहेगी। ऐसे में कन्हैया कुमार को बिहार में महागठबंधन का उम्मीदवार बनाना राजद और कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किल होगा। अगर उनको गठबंधन का उम्मीदवार बनाया गया तो भाजपा को पूरे प्रदेश में गठबंधन को भारत विरोधी दिखाने में आसानी होगी। उसका प्रचार बहुत तीखा होगा। 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तीन साल पहले जब यह मामला आया था तब जेएनयू जाकर कन्हैया और उनकी टीम के समर्थन किया था। पर तीन महीने के बावजूद तीन साल बाद आरोपपत्र दायर होने के 36 घंटे बाद तक राहुल ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इससे जाहिर होता है कि वे कन्हैया का समर्थन करने से होने वाले नुकसान को बेहतर समझ रहे हैं। तभी उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और साथ ही भाजपा विरोधी दूसरी पार्टियों के नेता भी इस पर चुप रहे हैं। कन्हैया का बचाव करने की जिम्मेदारी उनकी पार्टी सीपीआई और खुद उनके ऊपर ही छोड़ दी गई है।  

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