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चुनाव बाद की तैयारी में कांग्रेस

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में जिस तेजी से परिदृश्य बदल रहा है, वैसा पहले शायद ही किसी चुनाव में हुआ होगा। चुनाव शुरू हुआ था तब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा आसानी से जीतती दिख रही थी और राजस्थान में कांग्रेस की जीत पक्की मानी जा रही थी। सुदूर तेलंगाना में टीआरएस की जीत भी पक्की दिख रही थी। लड़ाई सिर्फ मिजोरम में दिख रही थी, जहां कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट का मुकाबला था है और कांग्रेस पर दस साल की एंटी इन्कंबैंसी भारी पड़ रही थी। 

जैसे जैसे चुनाव आगे बढ़ा तस्वीर बदलने लगी। कांग्रेस मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मुकाबले में आ गई तो राजस्थान में भाजपा ने कांग्रेस के पसीने छुड़ा दिए। उधर तेलंगाना में भी कांग्रेस का गठबंधन टीआरएस पर भारी पड़ने लगा। कांग्रेस को लग रहा है कि वह भाजपा शासित राज्यों में तख्तापलट कर सकती है और तेलंगाना भी टीआरएस से छीन सकती है। सो, कांग्रेस ने चुनाव बाद की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। 

कांग्रेस के जानकार सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेताओं को यह फीडबैक है कि चारों राज्यों में नजदीकी नतीजे आ सकते हैं और सरकार बनाने के लिए अतिरिक्त विधायकों की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए कांग्रेस को दो स्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। एक तरफ तो अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति है तो दूसरी ओर छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों को अपने साथ लाना है। गोवा और मणिपुर के अनुभव से सबक लेकर कांग्रेस ने समय से पहले ही तैयारी शुरू कर दी है। इस रणनीति को लेकर छत्तीसगढ़ के नेताओं से राहुल गांधी ने मीटिंग की है। प्रभारी महासचिव पीएल पुनिया और कांग्रेस संगठन से जुड़े नेता राहुल से मिले। बैठक में प्रदेश के नेताओं ने बताया कि उन्होंने ऐसे निर्दलीय नेताओं की पहचान की है, जो चुनाव जीत सकते हैं। अजित जोगी और मायावती की पार्टी से चुनाव लड़ रहे नेताओं से भी संपर्क किया गया है। जरूरत पड़ने पर जोगी और मायावती से भी बात की जाएगी। त्रिशंकु विधानसभा बनने की स्थिति में कांग्रेस तुरंत अपने विधायकों को एक जगह इकट्ठा करके उन्हें किसी रिसोर्ट में ले जाएगी ताकि तोड़फोड़ न हो सके। 

राजस्थान में भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता छोटी पार्टियों के संपर्क में हैं। प्रदेश के पुराने नेता चंद्रराज सिंघवी से कांग्रेस नेताओं ने मुलाकात की है और छोटी पार्टियों व निर्दलियों का समर्थन जुटाने में उनकी मदद मांगी है। शरद यादव भी इस काम में कांग्रेस की मदद करेंगे। तेलंगाना में भी कांग्रेस ने अंदरखाने एमआईएम के नेताओं और दूसरे मजबूत निर्दलीय उम्मीदवारों से संपर्क किया है। यह पहला मौका है, जब अहमद पटेल राजस्थान और तेलंगाना के माइक्रो चुनाव प्रबंधन में शामिल हुए हैं। 

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