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तेजस्वी यादव का आरक्षण का दांव

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपने पिता लालू प्रसाद के रास्ते पर चल रहे हैं। उन्होंने यादव और मुस्लिम वोट आधार की राजनीति से बाहर निकल कर कुछ पहल की है पर उनको पता है कि वोट की राजनीति में इस पहल का ज्यादा असर नहीं होने वाला है। इसलिए वे अपने पिता की तर्ज पर अपनी छवि पिछड़ों के मसीहा वाली बना रहे हैं। तभी उन्होंने आरक्षण का दांव खेला है। 

ध्यान रहे पिछले चुनाव में राजद और जदयू ने आरक्षण के मसले पर ही भाजपा के गठबंधन को हराया था। उसी लाइन को आगे बढ़ाते हुए तेजस्वी यादव ने कहा है कि राजद की सरकार बनी तो वह आरक्षण की सीमा बढ़ाएगी। उन्होंने तमिलनाडु की तर्ज पर आरक्षण देने का वादा किया है। उन्होंने कहा है कि वे तमिलनाडु की तरह 69 फीसदी आरक्षण देंगे। वे ऐसा कैसे करेंगे, इसका कोई ब्लू प्रिंट उन्होंने नहीं पेश किया है। 

उन्होंने पिछड़ों को एक करने और राजद के साथ लाने का जो दूसरा दांव चला है वह ये है कि उन्होंने आर्थिक आधार पर आरक्षण का विरोध किया है। 

ध्यान रहे बाकी सारे दलित और पिछड़े नेता चाहे वे रामविलास पासवान हों या मायावती हों या रामदास अठावलें हो सब आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात करते रहते हैं। पर तेजस्वी ने दो टूक अंदाज में कहा है कि संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात नहीं कही है इसलिए आरक्षण का आधार शैक्षणिक और सामाजिक पिछड़ापन ही रहेगा।

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