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प्रशांत किशोर पर क्यों पलटे नीतीश?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पूर्व चुनाव प्रबंधक और पार्टी के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर पर अपनी राय बदल ली है। उनको पार्टी में नंबर दो की हैसियत देने और पार्टी का भविष्य बताने के बाद नीतीश कह रहे हैं कि उनकी पार्टी परिवार वाली नहीं है और कौन पार्टी का भविष्य या उनका उत्तराधिकारी होगा यह पार्टी तय करेगी। असल में सवर्ण आरक्षण के बाद बिहार में राजनीति के अगड़ा बनाम पिछड़ा बनने की संभावना के बीच नीतीश का यू टर्न हुआ है। उनको लग रहा है कि किसी ब्राह्मण को पार्टी का भविष्य बताना कहीं चुनाव में मुश्किल न पैदा कर दे। ऊपर से उनको चुनाव में पार्टी के तमाम पुराने नेताओं के सहयोग की जरूरत है, जो प्रशांत किशोर के नंबर दो होने की वजह से नाराज हैं या उदासीन हो गए हैं। 

प्रशांत किशोर को उत्तराधिकारी बनाने के सवाल पर लोकतंत्र की दुहाई देने के बाद नीतीश कुमार ने यह खुलासा भी किया है कि उन्होंने अमित शाह के कहने पर उनको पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया था। नीतीश ने बताया कि अमित शाह ने दो बार उनको फोन किया था और पीके को जदयू में कोई पद देने के लिए कहा था। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि भाजपा के दो नेताओं ने पीके की पैरवी की। उन्होंने दूसरे नेता का नाम नहीं लिया पर संभवतः उनका इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर था। यह सब जानते हैं कि प्रशांत किशोर को शाह से ज्यादा मोदी ही पसंद करते हैं। 

बहरहाल, नीतीश ने यह खुलासा करके भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को भी मैसेज दिया है। उनको बता दिया है कि वे पीके को गंभीरता से लें और वे जो बात कह रहे हैं, उस पर अमल करें क्योंकि मोदी और अमित शाह दोनों तक उनका सीधा एक्सेस है और वे मूल रूप से उन्हीं के आदमी हैं। नीतीश को लग रहा है कि इससे सीटों के नाम तय करने और उनकी अदला बदली का काम आसान हो जाएगा। उनके इस दांव को भाजपा के नेता भी समझ रहे हैं तभी जब वे यह खुलासा कर रहे थे तो सामने बैठे भाजपा नेता सुशील मोदी मंद मंद मुस्कुरा रहे थे। 

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