बिहार भाजपा के नेता परेशान हैं

बिहार में भाजपा के कई नेता बहुत परेशान हैं। भाजपा ने जब जदयू के साथ 17-17 सीटों का तालमेल किया था तभी से कई नेताओं की नींद उड़ी थी। पर अब चुनाव की घोषणा के बाद सब बेचैन हैं कि किसकी सीट जदयू के खाते में जा रही है और किसकी टिकट कट रही है। ध्यान रहे भाजपा ने 2014 में 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से 22 पर जीती थी। यानी पिछली बार चुनाव लड़े कम से कम 13 लोगों को इस बार टिकट नहीं मिलनी है, जिनमें से पांच मौजूदा सांसद हैं।

भाजपा के जो सांसद सबसे ज्यादा परेशान हैं उनमें सारण से जीते राजीव प्रताप रूड़ी और बगल की महाराजगंज सीट से जीते जनार्दन सिंह सिगरीवाल हैं। महाराजगंज की सीट जदयू को मिलने की चर्चा है। तभी सिगरीवाल समर्थकों ने प्रचार कराया है कि वे सारण सीट से लड़ेंगे। यानी रूड़ी की टिकट कटेगी। दूसरी ओर रूड़ी के समर्थक उनके आरा सीट से लड़ने की बात कर रहे हैं, जहां से आरके सिंह जीते हैं। आरके सिंह भी खम ठोंक रहे हैं वे जरूर लड़ेंगे। पर यह सीट भी जदयू को जाने वाली है, जहां से भगवान सिंह कुशवाहा या मीना सिंह के लड़ने की चर्चा है।

इसी तरह केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव की जीती पाटलिपुत्र सीट जदयू को जा सकती है, इससे रामकृपाल यादव परेशान हुए हैं। तभी पटना साहिब से लेकर सारण तक की सीट से उनके लड़ने की अटकल लग रही है। गिरिराज सिंह की नवादा सीट लोजपा को दी जा रही है और इसलिए गिरिराज सिंह के बेगूसराय से लड़ने की खबर है। ऐसे ही वाल्मिकीनगर की सीट जदयू को मिल रही है। सो, वहां से जीते सतीश दूबे परेशान हैं। गोपालगंज की सुरक्षित सीट जदयू के खाते में जाने वाली है, जिससे वहां से जीते भाजपा के जनक राम परेशान हैं।

ओमप्रकाश यादव दो बार से सीवान सीट पर शहाबुद्दीन की पत्नी की हरा रहे हैं। पर इस बार यह सीट जदयू के खाते में जाने की चर्चा है। हालांकि कहा जा रहा है कि जदयू भी ओमप्रकाश यादव को ही टिकट दे देगी। मधुबनी सीट से पिछली बार हुकुमदेव नारायण यादव लगातार दो बार से जीत रहे हैं। उनको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पसंद भी करते हैं पर इस बार उनकी टिकट कटने की चर्चा है।

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