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सिसोदिया की रिहाई से क्या बदलेगा?

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और ईडी दोनों के मामले में जमानत दे दी और वे रिहा हो गए। दूसरी ओर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब भी जेल में हैं। तभी यह माना जा रहा है कि अब आम आदमी पार्टी की राजनीति में कुछ बदलाव हो सकता है। हालांकि इसमें किसी को संदेह नहीं है कि केजरीवाल आलाकमान हैं और जो वे चाहेंगे वही फैसला लागू होगा। तभी जेल से रिहा होते ही उनकी पार्टी के नेता उनके माता पिता और पत्नी से मिलने पहुंचते हैं। राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी जेल से रिहा होकर केजरीवाल के घर उनके माता पिता से मिलने गए तो सिसोदिया भी जेल से जिस दिन छूटे उसी दिन केजरीवाल के घर गए। केजरीवाल के माता पिता से उनकी मुलाकात की तस्वीरें पार्टी की ओर से और खुद सिसोदिया की ओर से सोशल मीडिया में प्रसारित की गईं।

केजरीवाल और सिसोदिया की गैरहाजिरी में आतिशी और सौरभ भारद्वाज उनका कामकाज संभाल रहे हैं। सिसोदिया की रिहाई से दो दिन पहले ही यह घोषणा हुई थी इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर छत्रसाल स्टेडियम में होने वाले सरकारी कार्यक्रम में आतिशी झंडा फहराएंगी। यानी केजरीवाल के बाद सरकार में उनकी नंबर दो की पोजिशन बनती है। तभी सवाल है कि सिसोदिया क्या करेंग? उनके पास पार्टी का कामकाज देखने का विकल्प है। सरकार में तो उप मुख्यमंत्री बन कर वे फिर शामिल होंगे इसमें संदेह है। केजरीवाल यह जोखिम नहीं ले सकते हैं। इस बीच आम आदमी पार्टी की ओर से कहा जाने लगा है कि उनकी पत्नी गंभीर रूप से बीमार हैं तो सिसोदिया अभी थोड़े समय तक उनके साथ रहेंगे और पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाएंगे। सरकार में उनकी वापसी केजरीवाल की रिहाई के बाद या अगले साल जनवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव में जीत के बाद ही संभव है। लेकिन अगर चुनाव से पहले केजरीवाल अगर जेल में ही रहते हैं तो संजय सिंह, सिसोदिया, आतिशी और भारद्वाज के बीच खींचतान बढ़ सकती है।

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