Loading... Please wait...

खाशोगी की हत्या से उपजे संकट

दुनिया में इस वक्त सबसे ज्यादा जिस खबर ने तहलका मचाया हुआ है, वह है सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खाशोगी की हत्या। लंबे समय से सऊदी शासक मोहम्मद बिन सलमान की आंख की किरकिरी बने खाशोगी दो अक्तूबर को तुर्की के शहर इस्तानबुल स्थित सऊदी महावाणिज्य दूत के दप्तर में घुसे थे, उसके बाद बाहर नहीं आए। सऊदी शासक के करीबी सुरक्षा एजंटों ने वहीं पर खाशोगी का सफाया कर दिया। कैसे क्या सब हो गया, इसकी जो दास्तान दुनिया के सामने आ रही है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। अमेरिका से लेकर सारे पश्चिमी देश हतप्रभ हैं और सबका इशारा सऊदी अरब की ओर ही है।

खाशोगी भी इस बात से अनजान नहीं थे कि सऊदी शासक कभी भी उनका खात्मा करवा सकते हैं। पहले लंबे समय तक सऊदी अरब में ही रहे थे। बाद में अमेरिका चले गए। खाशोगी जिस तरह के निर्भीक पत्रकार थे और खुलकर सऊदी शासक सलमान के खिलाफ रहे, वह कोई आसान काम नहीं था। उन्होंने यमन में सऊदी सरकार के सैन्य अभियान, मिस्र में तख्तापलट के खिलाफ जमकर लिखा था। इसलिए खाशोगी जानते थे कि वे सऊदी शासक सलमान के निशाने पर हैं।

खाशोगी की मौत हो चुकी है। अब तक इस मामले में जो तथ्य सामने आए हैं उनसे साफ है कि सऊदी एजंटों ने उन्हें वाणिज्य दूतावास के दफ्तर में मार डाला था। वे एक तुर्की महिला के साथ शादी के लिए जरूरी दस्तावेज लेने इस्तानबुल में सऊदी अरब के महावाणिज्य दूतावास में गए थे। उनके साथ उनकी होने वाली पत्नी भी थीं। लेकिन वे दूतावास के दफ्तर के बाहर ही रहीं, खाशोगी अंदर गए पर फिर नहीं लौट पाए। तुर्की के जांच अधिकारियों ने अभी तक सीसीटीवी कैमरों और अन्य माध्यमों से सो जो सबूत जुटाए हैं वे काफी कुछ कह रहे हैं। जांच से पता चला है कि घटना वाले दिन तड़के दो विमान सऊदी अरब से इस्तानबुल पहुंचे थे। इसके बाद दिन में सवा बारह बजे सऊदी अरब के नंबर वाली डिप्लोमेट गाड़ियों में कुछ लोग वाणिज्य दूतावास पहुंचते हैं। इसके घंटे भर बाद खाशोगी इस दफ्तर में प्रवेश करते हैं। उन्हें तत्काल घेर लिया जाता है, यातनाएं दी जाती हैं, पहले अंगुलियां काट दी जाती हैं, फिर सिर को धड़ से अलग कर दिया गया और अंत में शरीर के कई टुकड़े कर दिए गए। इसके बाद सवा तीन बजे ये एजंट दूतावास से उन्हीं गाड़ियों में लौट जाते हैं। और फिर रात नौ बजे उन्हीं दो विमानों से सऊदी अरब लौट जाते हैं। यह सारी घटना एप्पल की उस घड़ी में भी कैद हुई है जो खाशोगी ने पहने रखी थी। जिस तरह से पूरी घटना को जिस सुनियोजित और बर्बरता से अंजाम दिया गया उसमें कोई शक नहीं रह जाता कि यह सऊदी अरब सरकार के शीर्ष के इशारे पर ही हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी अरब को कड़ी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर उसका इसमें हाथ साबित हो गया तो वे उसके खिलाफ कड़े कदम उठाएंगे। लेकिन अपने हितों को देखते हुए ट्रंप के लिए ऐसा कर पाना संभव नहीं होगा। इसलिए ट्रंप के स्वर अब बदल चुके हैं। अमेरिका सऊदी अरब को सौ अरब डॉलर से ज्यादा के हथियार बेच रहा है, ऐसे में वह खाशोगी के मामले पर सऊदी अरब के खिलाफ कैसे बोलेगा।

लेकिन खाशोगी की हत्या को लेकर पश्चिमी राष्ट्रों ने जो रुख अपनाया है, वह सऊदी अरब के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। खाशोगी की हत्या के विरोध में ही आइएमएफ प्रमुख क्रिस्टीना लेगार्ड सहित यूरोप के कई देशों के नेताओं ने रियाद में होने वाले निवेशक सम्मेलन का बहिष्कार कर दिया है। सऊदी अरब और अमेरिका को दुनिया की इस आवाज को समझना चाहिए।  

201 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2019 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech