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कितनी कामयाब है प्रधानमंत्री मुद्रा योजना?

प्रधानमंत्री ने इस साल मई में मुद्रा योजना का फायदा उठाने वाले लोगों को संबोधित किया। इस योजना की सफलता का दावा किया। बाद में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बात और आगे बढ़ाई। जोड़ा कि गुजरे तीन वर्षों में केंद्र सरकार की मुद्रा योजना का लाभ उठाकर सात करोड़ 28 लाख स्व-रोजगार पाने में कामयाब हुए हैं। मगर इन दावों पर पिछले दिनों गंभीर संदेह उठ खड़े हुए जब एक आरटीआई अर्जी के जरिए ये सामने आया कि 13 लाख 85 हजार लोगों को दिए गए लगभग 11 हजार करोड़ रुपए के मुद्रा ऋण बैड लोन में तब्दील हो गए हैं। यानी इस रकम के लौटाए जाने की संभावना बेहद कम है। इनमें सबसे ज्यादा शिशु ऋण हैं, यानी जिनमें 50 हजार रुपये तक का कर्ज लिया गया था।

जानकारों का कहना है कि बिना मुद्रा लोन देने के लिए बैंकों के लक्ष्य तय कर दिए गए। उन्हें पूरा करने की होड़ में बैंकों ने बिना पूरे जमानती दस्तावेजों के बड़ी संख्या में कर्ज बांट दिए हैं। मुद्रा लोन के कारण बैंकों का एनपीए बढ़ना इस योजना से खड़ी हुई समस्या का सिर्फ एक पहलू है। दरअसल, यह दावा भी कठघरे में है कि मुद्रा योजना से करोड़ों लोगों को रोजगार मिला। खुद सरकारी आंकड़ों से यह सामने आया है कि इस योजना के तहत दिए गए लगभग 90 फ़ीसदी कर्ज 50 हजार रुपये से कम रकम के हैं। गौरतलब है कि इस स्कीम के तहत तीन श्रेणियों के कर्ज का प्रावधान हैः शिशु ऋण के तहत 50 हजार रुपये तक। किशोर ऋण क तहत 50 हजार से पांच लाख रुपये तक। और तरुण झण के तहत पांच लाख से 10 लाख रुपये तक का कर्ज मिलता है।

लेकिन अब ये साफ है 90 फीसदी से ज्यादा कर्ज शिशु श्रेणी में दिए गए, तो ये सवाल लाजिमी है कि आखिर इस छोटी रकम से कैसा कारोबार खड़ा हो सकता है और उनमें कितने लोगों को रोजगार मिलने की गुंजाइश है। शिकायतें तो भी ये भी आई हैं कि बिना बिचौलियों की मदद के मुद्रा लोन लेना भी आसान नहीं है। बिचौलिये कर्ज दिलाने के बदले कमीशन वसूलते हैं। एक तो छोटी रकम, ऊपर से वह भी अगर पूरी हाथ में ना आए, तो वैसे कर्ज से स्व-रोजगार के अवसर बनने और उनमें दूसरों को रोजगार देने की बातों पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। 

बल्कि इन तथ्यों की रोशनी में ये समझना कठिन नहीं रहता कि क्यों बड़ी संख्या में मुद्रा लोन एपीए में बदलते जा रहे हैं। दरअसल, ये खबर खुद काफी कुछ कह डालती है कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के प्रभाव का व्यापक अध्ययन करवाने का फैसला किया है। इसके तहत देखा जाएगा कि क्या मुद्रा लोन लेने वालों की आमदनी एवं जायदाद की स्थिति में कोई बदलाव आया। अध्ययन का नतीजा तो बाद में आएगा, लेकिन ये फैसला बताता है कि मुद्रा योजना की विफलता की कहानियों और इसकी हुई आलोचनाओं का असर आखिरकार सरकार पर भी हुआ है।

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