Loading... Please wait...

ऑनर किलिंग के डर में पाकिस्तानी लड़कियां

15 साल की उम्र से ही खानजैद महबूब पाकिस्तान के सिंध प्रांत के एक गांव में अपना स्कूल चला रहीं थी। खानजैद के काम और लगन से खुश होकर एक गैर सरकारी संस्था ने 2011 में स्कूल के लिए एक बिल्डिंग दे दी। हालांकि खानजदी के लिए जिंदगी इतनी आसान नहीं थी। जैसे ही उन्होंने 12वीं की पढ़ाई पूरी की उनके घरवालों का दबाव उन पर बढ़ने लगा। खानजदी कहती हैं, "मेरे चाचा और परिवार के दूसरे सदस्य मुझ पर शादी के लिए दबाव बनाने लगे और मुझसे पढ़ाना छोड़ने के लिए कहने लगे।" उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, "मेरा परिवार स्कूल बिल्डिंग पर कब्जा कर मेरी मर्जी के खिलाफ मेरी शादी करना चाहता था। " उन्होंने बताया, "मेरे एक चाचा ने मुझे अपने घर में बंद कर दिया जिसके बाद मैंने पुलिस से इमरजेंसी नंबर पर कॉल किया। पुलिस ने मुझे वहां से छुड़ा कर एक शेल्टर हाउस(संरक्षण गृह) में भेज दिया। जहां मैं कुछ महीने रही।" अब खानजैद कराची में रहती हैं।

परिवारवालों से भागने के बाद भी खानजैद की परेशानियां खत्म नहीं हुई। बकौल खानजैद, "जब मैंने शेल्टर हाउस छोड़ा था तब मेरे पास एक कौड़ी भी नहीं थी। एक पुलिस वाले ने दया कर मुझे कुछ पैसे दे दिए थे। इसके बाद जब मैं कराची पहुंची थी तो मैंने अपनी मर्जी से मेरे गांव के एक लड़के से शादी करना तय किया। मेरे इस फैसले ने मेरे परिवारवालों को भड़का दिया। उन्होंने ऐलान कर दिया कि वह मुझे और मेरे पति को जान से मार डालेंगे। उन्होंने मेरे पति के परिवार वालों की जमीन और घरों पर कब्जा कर लिया।" ये कहानी सिर्फ खानजैद की नहीं है। आज पाकिस्तान में कई लड़कियां ऑनर किलिंग के डर में जी रही हैं। देश के मानवाधिकार आयोग के मुताबिक अक्टूबर 2016 से जून 2017 तक देश में ऑनर किलिंग के तकरीबन 280 मामले सामने आए हैं।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के कई शहरों में ऑनर किलिंग एक आम बात है। इस भयानक परंपरा को सिंध में "करो-करी" कहा जाता है। देश के कई हिस्सों में यह प्रथा दशकों से चली आ रही है। कुछ मामलों में औरतों को सिर्फ पुरुषों से बात करने के चलते मार दिया जाता है। देश के सख्त कानून अब तक इस कबायली परंपरा पर लगाम नहीं लगा सके हैं। हाल ही में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक 18 साल की लड़की और उसके 21 साल के बॉयफ्रेंड को जान से मार दिया गया था। आज खानजैद को सिर्फ अपनी जान का डर नहीं है बल्कि वह अपने बच्चे के लिए भी परेशान हैं। उसने बताया, "मैं बचने के लिए हमेशा जगह बदलती रहती हूं, लेकिन मैं यह कब तक कर सकती हूं? मैं बहुत ही गरीब परिवार से हूं, मेरे पति पुलिस में काम करते हैं। हमारे पास ज्यादा कुछ नहीं है, मैं डर और मौत के साये में जी रही हूं। मैं अपने गांव वापस जाना चाहती हूं और बच्चों को शांति से स्कूल में पढ़ाना चाहती हूं।"

205 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2019 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech