शहीदों की आड़ में कांग्रेस पर हमले

देश के शहीदों की याद में राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट के पास राष्ट्रीय युद्ध स्मारक बनाया गया है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे जोश-खरोश से इसे राष्ट्र को समर्पित किया। इस स्मारक की महत्ता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यह देश का पहला राष्ट्रीय युद्ध स्मारक है। लेकिन प्रधानमंत्री ने इस मौके पर शहीदों की आड़ में सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार को निशाना बनाया। मौका शहीदों को नमन, श्रद्धाजंलि का था, लेकिन प्रधानमंत्री ने बोफोर्स तोप सौदे से लेकर उन तमाम हथियार सौदों पर कांग्रेस पर हमले किए जो कांग्रेसी राज में हुए थे। मोदी ने यह भी बताया कि कांग्रेस और भाजपा की सोच में बुनियादी फर्क ये है कि कांग्रेस के लिए फैमिली फर्स्ट है तो भाजपा के लिए इंडिया फर्स्ट।

वार मेमोरियल याकि युद्ध स्मारक का भारत के लिए अपना महत्त्व है। दुनिया के तमाम छोटे-बड़े देशों ने अपने शहीद सैनिकों की याद में युद्ध स्मारक बनवाए हैं, ताकि भावी पीढ़ियां याद रखें कि कैसे इन जांबाज सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए अपने को कुर्बान कर डाला था। लेकिन ऐसा शायद ही कहीं देखने को मिलेगा कि युद्ध स्मारक जैसे पवित्र और सम्मानीय स्थल को राष्ट्र को समर्पित करते हुए प्रतिद्वंदियों को बेनकाब किया जाए। यह युद्ध स्मारक 1947 से 1999 तक करगिल में शहीद सैनिकों की याद में बनाया गया है। करीब पौने दो सौ करोड़ की लागत से बना यह स्मारक में सारे चक्र हैं- अमर चक्र, वीरता चक्र, त्याग चक्र और सुरक्षा चक्र। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने सबसे पहले तो यही संदेश दिया कि पूर्व की सरकारों ने ऐसा स्मारक बनाने में भी साठ साल की देरी कर दी। उन्होंने यह भी कह डाला है कि सैनिकों और शहीदों के साथ जितना अन्याय कांग्रेस के राज में हुआ, उतना किसी ने नहीं किया। चूंकि वक्त चुनाव का है इसलिए शहीदों को भी भुनाने का कोई मौका प्रधानमंत्री हाथ से नहीं जाने देना चाहते थे।

रक्षा सौदों को लेकर प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर जिस तरह से हमले किए उससे यह स्पष्ट है कि चुनाव में कांग्रेस के शासनकाल के रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाया जाएगा। इसीलिए प्रधानमंत्री ने यह सवाल उठाया कि बोफोर्स से लेकर हेलिकॉप्टर खरीद तक की सारी जांच एक ही परिवार तक क्यों पहुंचती है। शहीदों को श्रद्धांजलि के नाम पर प्रधानमंत्री जो कुछ भी कहा, उससे संदेश यही गया कि अगर फौजियों की बेकदरी हुई, उनके साथ अन्याय हुआ तो इसके लिए दोषी केवल कांग्रेस की सरकारें रहीं और रक्षा खरीद के घोटाले एक ही परिवार ने किए। बताया गया कि सीमा पर लड़ रहे जवानों के पास हथियार तक नहीं थे, इसके लिए उनकी सरकार ने पहल की। रक्षा सौदों को उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार की कमाई का जरिया तक बताने में कोई गुरेज नहीं किया।   

प्रधानमंत्री ने इसी के साथ रफाल का भी मुद्दा उठाया और बताया कि कैसे कांग्रेस मेरे कार्यकाल के सौदे को रोकने में लगी रही और यूपीए के शासन में किस तरह से महंगे विमान खरीदे जा रहे थे। हालांकि रफाल सौदे को लेकर मोदी सरकार भी कठघरे में है और जवाब देते नहीं बन रहा। इसीलिए प्रधानमंत्री ने अपने कार्यकाल में आज तक मीडिया से कोई सीधा संवाद नहीं किया। वे मन की बात कहने और जनता से सीधा संवाद करने में ज्यादा भरोसा रखते हैं। दरअसल, युद्ध स्मारक का लोकार्पण ऐसा अवसर था जिस पर क्षुद्र राजनीति से बचा जाना चाहिए था। लेकिन मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक को भी चुनावी सभा में बदलने में कोई संकोच नहीं किया।

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