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रीगलः जहां बची अब सिर्फ यादें

(image) दिल्ली के कनॉट प्लेस में रीगल और रिवोली ऐसे दो सिनेमा हॉल हैं जो युवाओं और बुज़ुर्गों सभी को आकर्षित करते थे। रविवार को यहां अधिकतर छात्रों की ही भीड़ दिखाई देती थी, लेकिन यादों की बात करें तो अपने प्रतिद्वंदी ओडियन और प्लाज़ा से रीगल कहीं अलग था। इस सिनेमाघर की एक याद जुड़ी है जयपुर की महारानी गायत्री देवी से जो यहां 'गॉन विद द विंड' फ़िल्म के रीपीट शो देखने आती थीं। 1939 में रिलीज़ हुई इस फ़िल्म का प्रीमियर रीगल सिनेमाघर में भी रखा गया था, इसके बाद भी सालों तक यहां फ़िल्म के कई शो दिखाए गए। साल 1972 में क्लार्क गेबल और विवीयन ली अभिनीत इस फ़िल्म को देखने महारानी और जयपुर राज परिवार के कुछ लोग रीगल आए। इसका कारण था कि क्लार्क गेबल ने कुछ वक्त पहले महारानी से कहा था कि वो दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत दस महिलाओं में से एक हैं। शो के ख़त्म होने के बाद एक व्यक्ति ने सुरक्षाकर्मियों से घिरी महारानी गायत्री देवी से बात करने की कोशिश की। वो फ़िल्म के बारे में पूछे उस सवाल का जवाब देने के लिए एक लम्हे के लिए रुकीं। ‘ये प्रशंसा करने योग्य फ़िल्म है’ कहते हुए वो आगे बढ़ गईं। जाड़े की हवा में उनके बाल उड़ रहे थे और झीनी साड़ी और चमकदार चप्पलों में वो आकर्षक लग रही थीं। एक और याद जुड़ी है फ़िल्म 'द रोब' की स्क्रीनिंग से। इस फ़िल्म में यीशू को सूली पर चढ़ाए जाने के बाद उनकी पहनी पोषाक कैसे एक धनी यहूदी परिवार के लिए कीमती सामान बन गया, इसकी कहानी दिखाई गई थी। उस समय के मुख्य पादरी जोसेफ फर्नांडेज़ के नेतृत्व में दिल्ली के ईसाई समुदाय के लोगों की भीड़ रीगल सिनेमा में उमड़ पड़ी थी। 'पहले सिर्फ़ गाने गाए थे, रोल तो अब मिल रहे हैं'। जीसस एंड मेरी कॉन्वेंट की नन भी अपनी माला लिए सिनेमा में फ़िल्म देखने पहुंची थीं। पूरी फ़िल्म के दौरान कुछ लोग तो 'पेटर नोस्टर और आवे मरिया' प्रार्थना भी गाने लगे थे। बाद में पादरी ने उन्हें नीची आवाज़ में गाने के लिए कहा ताकि सिनेमा में बैठे और लोगों को इस कारण कोई परेशानी ना हो। एक बार जब रीगल में अभिनेता राज कपूर की फ़िल्म दिखाई जा रही थी तो उस समय सांसद रहे पृथ्वीराज कपूर फ़िल्म देखने के लिए संसद भवन से सीधे रीगल सिनेमा पहुंचे थे। कुर्ता पाजामा पहने जब पृथ्वीराज कपूर सिनेमाघर में घुस रहे थे तो उनको सुनाई पड़ा कि दर्शकों में से एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को कह रहा था, ‘देखिए, आवारा के पिता।’ ये सुनना था कि वो ठिठक गए। वो पीछे मुड़े और ऐसा कहने वाले को चिल्ला कर चुप रहने के लिए कहा। इससे पहले बॉम्बे में इस बात के लिए वो एक व्यक्ति को चांटा जड़ चुके थे। वो स्पष्ट कह चुके थे कि वो राज कपूर के पिता हैं किसी आवारा के नहीं. ('आवारा'नाम की एक फ़िल्म में राज कपूर ने अभिनय किया था।) राज कपूर के छोटे भाई शशि कपूर और ज़ीनत अमान की फ़िल्म 'सत्यम शिवम सुंदरम' रीगल में दिखाई गई। स्क्रीनिंग के लिए शशि कपूर और ज़ीनत अमान सिनेमाघर पहुंचे थे, उन पर गेंदे के फूलों की पत्तियां बरसाई जा रही थीं। बस इसी दौरान पुरानी दिल्ली के मुबारक ख़ान नाम के एक व्यक्ति अपने आप को ख़ूबसूरत अदाकारा ज़ीनत अमान के नज़दीक जाने से रोक नहीं पाए और उन्हें चकोटी काट ली। ज़ीनत चिल्ला पड़ीं और मुड़ीं, वो उसे ढूंढने लगीं जिसने ये किया था, लेकिन तब तक वो भीड़ में ग़ुम हो चुके थे। गुस्से से लाल शशि कपूर ने भीड़ से कहा कि वो काबू में रहें नहीं तो वो लौट जाएंगे। इसी वक्त वहां पुलिस पहुंची और बिना टिकट आए लोगों के वहां से हटा कर सड़क के दूसरी तरफ़ कर दिया। यहां से दर्शक तालियां और सीटी बजा रहे थे और हाथ हिला रहे थे. हरी घास से भरे इस इलाके में आज पालिका बाज़ार बन गया है। इस बीच जामा मस्जिद की मटिया महल की एक गली में मुबारक ख़ान अपने कारनामे के बारे में गर्व से लोगों को बता रहे थे। एक बूढ़े हाजी ने उनकी बातों को सुना और उन्हें चेतावनी दी कि वो आइंदा से किसी महिला के साथ ऐसा ना करें, चाहे वो फ़िल्मों में काम करने वाली महिला ही क्यों ना हों। 1973 का वक्त 'बॉबी' फ़िल्म के लिए रीगल के सामने इतने लोग जमा थे कि आप यकीन ही नहीं कर सकते। फ़िल्म में राज कपूर के बेटे ऋषि कपूर थे जो राजा की भूमिका निभा रहे थे। फ़िल्म में उनके साथ थीं डिंपल कपाड़िया जो प्रेम नाथ की बेटी बनी थीं, जो एक मछुआरे की भूमिका में थे। सेंड, स्टीफ़न, हिंदू, किरोड़ीमल कॉलेजों के छात्र फ़िल्म देखने के लिए बड़ी संख्या में जुटे थे। लेडी श्रीराम कॉलेज और जीज़स और मेरी कॉलेज की की छात्राएं भी फ़िल्म देखने के लिए आई थीं। ऐसी अफ़वाह फैली थी कि डिंपल असल में राज कपूर की बेटी हैं जिन्हें बॉम्बे के एक अमीर परिवार ने गोद लिया है। कॉलेज की महिलाओं ने इस तकह की टिप्पणियों का विरोध किया और वहां मौजूद लड़कों से कहा कि वो हद में रहें या अपने घर जाएं और उन्हें शांति से फ़िल्म देखने दें। इस घटना का बड़ा असर देखने को मिला और इस तरह की अफ़वाह फिर नहीं सुनाई दी। रीगल के शानदार इतिहास से कई और घटनाएं और नामी हस्तियों के नाम जुड़े हैं। कभी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन और भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी इस सिनेमाघर में आए थे। राज कपूर की 'मेरा नाम जोकर' और 'संगम' फ़िल्मों की स्क्रीनिंग के साथ रीगल के सिनेमा दिखाने के शानदार सफ़र का अंत हो चुका है और हमारी यादों में छोड़ गया है रीगल सिनेमाघर का नाम।
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