शनिवार फुरसत

पूरक रहा रंगमंच फिल्मों का

तकनीकी क्रांति ने आज फिल्मों को भले ही एक अलग पहचान दे दी हो लेकिन फिल्में रंगमंच का ही विस्तार तो है।भारतीय फिल्मों के इतिहास में यह तथ्य बेहद मजबूती से और पढ़ें....

रंगमंच से मिला मजबूत आधार

ऐसे ढेरों कलाकार हुए हैं जिन्होंने रंगमंच से शुरुआत कर फिल्मों में धाक जमाई। किसान परिवार में नौवीं संतान के रूप में जन्मे अक्किनेनी नागेश्वर राव को और पढ़ें....

फिल्मों में प्रेम के बदलते मायने

यह संयोग नहीं है कि पिछले कुछ समय में रिलीज हुई कई फिल्मों में प्रेम और रिश्तों की एक नई व्याख्या दिखाई गई है। यह समाज में बदल रही मानसिकता का असर है जिसका और पढ़ें....

उन्मुक्त होता प्रेम

यह सही है कि पिछले कुछ सालों में प्रेम की फिल्मी अभिव्यक्ति ने शालीनता की सीमा लांघ दी है। लेकिन यह सब अचानक नहीं हुआ। अतीत से इसका सिलसिला लगातार जुड़ता और पढ़ें....

समय की बलिहारी

शुरुआती दौर में पौराणिक व ऐतिहासिक आख्यानों और अलिफ लैला की कहानियों से बाहर निकल कर फिल्मों ने अपनी सामाजिक कुरीतियों पर चोट करने वाली और सद्भाव का और पढ़ें....

कब सधेगा दीपिका का निशाना?

श्रीश -- तुर्की के सैमसन में हुई तीरंदाजी की विश्व कप प्रतियोगिता में दीपिका ने कांटे के संघर्ष में कांस्य पदक जीत कर जता दिया कि उनकी प्रतिभा और अंतिम और पढ़ें....

आसान नहीं होता फिल्मों में दाखिला

यह जानने की जिज्ञासा आम तौर पर सभी की होती है कि फिल्मी दुनिया में प्रवेश का सबसे आसान रास्ता क्या है? एक धारणा यह है कि फिल्मी परिवार में जन्म लेने से और पढ़ें....

दूसरे क्षेत्रों की लोकप्रियता भी काम आई

मॉडलिंग, सौंदर्य प्रतियोगिता में जलवा दिखाने वालों के लिए फिल्मों में प्रवेश हालांकि पांच दशक पहले ही शुरू हो गया था लेकिन बीस साल में यह रास्ता ज्यादा और पढ़ें....

संयोग का भी रहा सहारा

एक सामान्य मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे अक्षय कुमार ने गुजारे के लिए बैंकाक के होटल में जूठे बर्तन तक धोए। वेटर से शैफ बनने पर उन्होंने मार्शल आर्ट और पढ़ें....

रंचमंच से फिल्मों की ओर

रंगमंच की दुनिया फिल्मों से काफी अलग है। शुरू में ऐसा नहीं था। मूक फिल्मों के दौर में फिल्मों पर रंगमंच का खासा प्रभाव था जो फिल्मों को आवाज मिलने के बाद और पढ़ें....

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