Loading... Please wait...

बायोपिक फिल्में, गोरखधंधा अजब!

श्रीशचन्द्र मिश्र
ALSO READ
(image) विशाल भारद्वाज की योजना तो चालीस के दशक की स्टंट क्वीन नाडिया पर फिल्म बनाने की थी। ‘रंगून’ में नाडिया, जूलिया हो गईं। उसका अंदाज नाडिया वाला ही रहा और संदर्भ भी पुराना लेकिन विशाल भारद्वाज ने ‘रंगून’ को नाडिया के फिल्मी सफर तक केंद्रित रखने की बजाए उसे नया विस्तार दिया। दूसरे विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि में उन्होंने एक त्रिकोणात्मक प्रेम कथा बुनी और उसमें नेताजी सुभाष चंद्र की आजाद हिंद फौज के सहारे देशभक्ति का छौंक भी लगा दिया। एक बायोपिक को ज्ञात-अज्ञात इतिहास से जोड़ कर किया गया यह प्रयोग हालांकि ज्यादा सफल नहीं हो पाया लेकिन जीवनीपरक या सच्ची घटनाओं पर फिल्म बनाने के मौजूदा सिलसिले को उन्होंने एक सुविधाजनक फार्मूला जरूर थमा दिया। अब इसका उपयोग करने में फिल्मकार कितनी रचनात्मकता दिखा पाएंगे, कहा नहीं जा सकता। फिलहाल इस तरह की फिल्मों की जो बाढ़ आई है उसमें ‘नीरजा’, ‘तलवार’ जैसी फिल्में भी बनीं जिनमें मूल घटना को संवेदनात्मक स्तर तक उभारा गया लेकिन ढेरों ऐसी फिल्में भी आईं जो मनोरंजक बनने के चक्कर में दिशा से भटक गईं। किसी हस्ती पर बायोपिक बनाने या नई पुरानी सच्ची घटनाओं को फिल्मानें की होड़ इतनी तेज हो गई है कि कई फिल्मकार उसके चक्कर में होश गंवाते जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक नहीं दो फिल्में बनाने की तैयारी हो रही है। यह मोदी की लोकप्रियता को भुनाने का प्रचारात्मक फंदा है या सचमुच उनके जीवन का निरपेक्ष मूल्यांकन करने का प्रयास, यह तो तभी पता चल पाएगा जब फिल्में रिलीज होंगी। फिलहाल यह कोशिश उसी तरह की है जैसे मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही उन पर दजर्नों किताबें छप गई थीं। मोदी पर फिल्म बनाने का इरादा भी तभी कुलबुलाया था। प्रकाश झा इसे लेकर काफी उत्साहित भी थे लेकिन यह पता चलने पर कि सांसद परेश रावल मोदी पर फिल्म बनाने में अतिरिक्त रूचि दिखा रहे हैं तो उहोंने कदम पीछे खींच लिए। परेश रावल की योजना अब साकार होने को है। फिलहाल फिल्म की पटकथा लिखी जा रही है। फिल्म में परेश रावल मोदी की भूमिका करेंगे। हालांकि उनकी शर्त है कि वे तभी शूटिंग शुरू करेंगे जब पटकथा से वे पूरी तरह संतुष्ट हो जाएंगे। केतन मेहता की फिल्म ‘सरदार’में परेश रावल ने सरदार पटेल की भूमिका की थी। उनकी प्रतिभा पर संदेह नहीं है लेकिन क्या मोदी के व्यक्तित्व में वे खुद को ढाल पाएंगे? इसी से जुड़ा सवाल यह है कि कार्यकाल के बीच में मोदी का मूल्यांकन करना क्या न्याय संगत होगा? क्या यह बेहतर नहीं होगा कि सार्वजनिक जीवन से अलग होने के बाद मोदी के गुण-दोष को परखा जाए? उनकी जीवन यात्रा के उतार चढ़ाव को दिखाने का वही उपयुक्त समय भी होगा। नरेंद्र मोदी पर एक और फिल्म बनाने की तैयारी है। उसमें विक्टर बनर्जी मोदी की भूमिका निभाएंगे। वे बंगला सिनेमा के ख्याति प्राप्त अभिनेता हैं। ‘दूसरी दुल्हन’ व ‘भूत’ सरीखी कुछ हिंदी फिल्मों में भी उन्होंने अभिनय किया है। लेकिन उनके सामने भी वही समस्या होगी जो परेश रावल के मामले में है। दोनों ही नरेंद्र मोदी के रूप में उपयुक्त नहीं दिखेंगे। पिछले कुछ समय से विभिन्न क्षेत्र की जानी मानी हस्तियों पर फिल्म बनाने का चलन बढ़ा है। ऐसी कुछ फिल्में आ भी चुकी हैं और उन्हें पसंद भी किया गया है। बायोपिक यानी जीवन परक फिल्में दुनिया भर में बनती रही हैं। लेकिन उनमें उन्हीं हस्तियों को लिया गया जिनका जीवन प्रेरणा देने और इतिहास का रुख बदल देने वाला रहा। जीवित या अपने क्षेत्र में सक्रिय व्यक्तियों पर बायोपिक बनाने पर आम तौर पर संकोच किया गया। भारत में उलटी धारा बह रही है। राज कुमार हिरानी संजय दत्त पर फिल्म बना रहे हैं। क्या यह मजाक नहीं है कि एक तरफ उनकी फिल्म आएगी और दूसरी तरफ उनकी जिंदगी को भुनाया जाएगा? संजय दत्त की जिंदगी में उतार-चढ़ाव खूब आए लेकिन उनकी अपनी प्रवृत्तियों की वजह से। उससे कोई प्रेरणा मिलने का सवाल ही नहीं है। फिर संजय दत्त की भूमिका में रणबीर कपूर का होना क्या उस बायोपिक को हास्यास्पद नहीं बना देगा? डील डौल और अंदाज का फर्क भी तो कोई मायने रखता है। अनुराग बसु की फिल्म में रणबीर कपूर किशोर कुमार का भी रूप धरने वाले हैं। यह फिल्म अगर बनी तो मजाक ही साबित होगी। क्रिकेटर अजहरुद्दीन पर बनी फिल्म ‘अजहर’ में पात्रों का चयन करने में सावधानी नहीं बरती गई है। इमरान हाशमी अजहर जैसे नहीं दिखे। इसीलिए फिल्म पिट गई। और सुशांत सिंह राजपूत धोनी के व्यक्तित्व के आसपास नहीं फटक पाएंगे। गीतकार साहिर लुधियानवी और लेखिका अमृता प्रीतम की प्रेम कहानी पर फिल्म ‘गुस्ताखियां’ बनाने की योजना दो साल से चर्चा में है। गाड़ी अटकी रही उपयुक्त पात्र न मिल पाने की वजह से। साहिर की भूमिका के लिए फरहान अख्तर व अर्जुन कपूर का नाम चला। फिर इरफान खान पर आम राय बनी। अब सुना है कि यह विषय संजय लीला भंसाली ने थाम लिया है। खबर है कि शाहरुख साहिर बनेंगे और ऐश्वर्य राय अमृता प्रीतम। ‘पान सिंह तोमर’ में इरफान खान, ‘मेरी कॉम’ में प्रियंका चोपड़ा और ‘भाग मिल्खा भाग’ में फरहान अख्तर को मिली प्रसिद्धि का यह कमाल है कि हर सितारा इन दिनों आंख मूंद कर बायोपिक करने को तत्पर है। माफिया डॉन दाऊद इब्राहीम की बहन हसीना पारकर की जिंदगी के कथित भावनात्मक पक्ष को उभारने वाली फिल्म ‘हसीना-द क्वीन आफ मुंबई ‘ में श्रद्धा कपूर हसीना की भूमिका कर रही हैं। इशा कोपिकर चाहती हैं कि किसी फिल्म में उन्हें इंदिरा गांधी या किरण बेदी की भूमिका करने का मौका मिल जाए। यह इच्छा अकेली इशा की ही नहीं है। समय-समय पर सुष्मिता सेन, तबु, प्रियंका चोपड़ा आदि फिल्म में इंदिरा गांधी या किरण बेदी दिखने की आतुरता जता चुकी हैं। इन दोनों हस्तियों पर अगर कभी फिल्म बनी तो उनके निर्माताओं के सामने यह बड़ी उलझन खड़ी हो जाएगी कि वे किसे चुनें? ‘मेरीकॉम’ निर्देशित करने वाले उमंग कुमार ने जब पाकिस्तान की जेल में मारे गए सरबजीत सिंह की बहन का रोल करने का ऐश्वर्य राय को प्रस्ताव दिया तो उन्होंने तत्काल हां कर दी। अपहृत विमान के यात्रियों के लिए अपनी जान गंवाने वाली नीरजा भनोट बनने के लिए सोनम कपूर तैयार हो गईं। हिंदी फिल्मों में पिछले कुछ समय से एक अलग ही दौर चल रहा है। ऐसे जीवन वृत्तों की तलाश बढ़ गई है, जिन पर फिल्म बनाई जा सके। कलाकारों में भी जीवनी परक फिल्मों में काम करने का उत्साह बढ़ रहा है। आए दिन किसी न किसी हस्ती की जीवनी पर फिल्म की योजना सामने आ रही है। हस्तियों की जीवनी पर आधारित बायोपिक के करीब दो दर्जन प्रोजेक्टों पर काम शुरू हो गया है। कुछ फिल्मी हस्तियों पर फिल्म बनाने का सिलसिला भी शुरू हुआ है। इस कड़ी में राजीव मेनन विख्यात शास्त्रीय गायिका भारत रत्न एमएमस सुब्वुलक्ष्मी पर फिल्म बनाना चाहते हैं। गुरुदत्त पर फिल्म बनाने का काम पटकथा लिखने तक सीमित रह गया। बायोपिक के लिए विख्यात या कुख्यात लोगों पर भी निर्माताओं का मोह हिलोरे मार रहा है। नए विषय की तलाश में निर्माता विख्यात हस्तियों की जीवन गाथा को भुनाने के फेर में अति उत्साही भी हो रहे। एक निर्माता ने हिम्मत की थी जवाहरलाल नेहरू और लेडी माउंटबेटन के रिश्तों पर फिल्म बनाने की। विषय में रोचक रोमांटिक फिल्म के तमाम तत्व मौजूद थे लेकिन फिल्म योजना से बाहर निकल कर हकीकत का रूप नहीं ले सकी क्योंकि नेहरू परिवार ने एतराज कर दिया। तिग्मांशु धूलिया को मीना कुमारी पर फिल्म बनाने का आइडिया आया। इस बढ़ते उत्साह की वजह यह है कि बायोपिक के लिए सितारे आसानी से उपलब्ध है। एक समय था जब बड़े सितारे बायोपिक में काम करने से हिचकिचाते थे। ‘मांझी द माउंटेन मैन’ में दशरथ मांझी की भूमिका करने को कोई बड़ा सितारा राजी नहीं हुआ। यह अलग बात है कि केतन मेहता ने वह भूमिका नवाजुद्दीन सिद्दीकी को सौंप कर उन्हें स्टार बना दिया। आज तस्वीर बदल गई है। साइना नेहवाल या सानिया मिर्जा पर कोई फिल्म बनती है तो हर बड़ी हीरोइन उसमें काम करने को तैयार हो जाएंगी। सभी को चर्चित हस्ती चाहिए। कलाकारों की चाहत की तो यह हालत है कि वे अपनी तरफ से हस्तियों का नाम प्रस्तावित कर रही हैं। यह होड़ हीरोइनों में कुछ ज्यादा ही है। ‘लव ब्रेकअप्स जिंदगी’, ‘हीरोइन’, ‘बेशर्म’ व ‘हवाईजादा’ में काम कर चुकीं दक्षिण की अभिनेत्री पल्लवी शारदा को मधुबाला की जिंदगी काफी दिलचस्प लगती है। विद्या बालन बेनजीर भुट्टो व सुचित्रा सेन बनने को लालायित हैं। इस दौड़ में अलग तरह की पहल आमिर खान ने की। हरियाणा की फोगट बहनों ने कुश्ती में कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में पदक तो जीते ही हैं, उन सामाजिक बंदिशों को भी तोड़ा है जिसमें लड़कियों के लिए कुश्ती करना हेय दृष्टि से देखा जाता था। इसकी शुरुआत की महावीर पहलवान ने। उन्होंने परिजनों और गांव वालों के तानों की परवाह न करते हुए अपनी बेटियों व भतीजी को पहलवानी के गुर सिखाए। महावीर पहलवान को इस बात का हमेशा मलाल रहा कि उनके योगदान को उपयुक्त मान्यता नहीं मिली। आमिर ने ‘दंगल’में महावीर पहलवान की संघर्ष यात्रा को ऐसा निभाया कि ‘दंगल’ हिंदी फिल्मों के इतिहास की सर्वाधिक हिट फिल्म हो गई। लेकिन यह हुआ विषय के प्रति पूरी ईमानदारी बरतने की वजह से। यह जरूरी है कि प्रेरणादायक हस्तियों पर फिल्में बने लेकिन इसके लिए गंभीर रिसर्च और विषय के निर्वाह में ईमानदारी की जरूरत है। ऐसी फिल्मों को चटपटा और ग्लैमरस बनाने के मोह से बचना चाहिए। एक आदर्श जीवनी को फिल्मी रूप देते समय उसमें थोड़ी बहुत नाटकीयता आ जाना स्वाभाविक है। लेकिन बायोपिक में औसत मसाला फिल्मों के तत्व तो न हों। खास बात यह है कि हस्ती का चयन करते समय उसकी प्रासंगिकता पर विशेष ध्यान दिया जाए। क्यों ऐसा हो कि चार्ल्स शोभराज पर फिल्म बनाने वाली एकता कपूर को बायोपिक के लिए कोई और हस्ती न दिखे? ऐसी नौबत क्यों आए कि भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवासन रामानुज पर ब्रिटेन में फिल्म बने और भारत के अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में एक मेहमान प्रस्तुति की तरह दिखाई जाए। जरूरी नहीं है कि किसी जानी पहचानी हस्ती पर बायोपिक बने। ऐसी कई गुमनाम हस्तियां हुई हैं जिनकी गाथा को आज दिखाना प्रासंगिक होगा। राम माधवानी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘नीरजा’ एक मिसाल है। फिल्म उस जांबाज एअर होस्टेस नीरजा भनोत पर केंद्रित है जिसने 1986 में कराची में अगवा किए गए विमान के यात्रियों की जान बचाने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी थी। नीरजा को मरणोपरांत ‘अशोक चक्र’ जरूर मिला लेकिन उसके बाद उन्हें भुला दिया गया। कृत्रिम पैर के सहारे माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली अरुणिमा सिन्हा पर फिल्म बननी चाहिए। फरहान अख्तर फिल्म बनाना भी चाहते हैं। इस सिलसिले में वे पिछले साल अरुणिमा से मिले भी। अड़चन यह आई कि अरुणिमा ने फिल्म की कमाई का 15 फीसद हिस्सा उन्नाव (उत्तर प्रदेश) में विक्लांग खिलाड़ियों के लिए बन रही अकादमी को देने की मांग की जबकि फरहान एक मुश्त लेकिन छोटी रकम देने पर सहमत हुए। अरुणिमा की मांग व्यावहारिक है। वे अपने संघर्ष का मुआवजा नहीं चाहतीं। 2011 के ट्रेन हादसे में बायां पैर गंवाने के बाद 21 मई 2013 को कृत्रिम पैर से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर उन्होंने जिंदगी का मुकाबला करने का जो जज्बा दिखाया उसे वे अपन जैसे विकलांग खिलाड़ियों से साझा करना चाहती है। आर्थिक मदद उन्हें खेल अकादमी के लिए चाहिए। अपनी किताब ‘वॉर्न अगेन ऑन द माउंटेन’की रॉयल्टी अरुणिमा पहले ही अकादमी के नाम कर चुकी हैं। करोड़ों में फिल्म बनाने वाले किसी भी निर्माता को आखिर अरुणिमा की मांग मानने में एतराज क्यों हो? सत्य घटना पर फिल्म बने तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। लेकिन सच्ची घटना किसे माना जाए, यह निर्माता के विवेक पर है। पिछले दिनों रिलीज हुई निर्देशक राज कृष्ण मेनन की फिल्म ‘एअरलिफ्ट’ को इस मायने में आदर्श कहा जा सकता है कि उसमें 1990 में कुवैत पर इराक के हमले के दौरान वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने का अभियान दिखाया गया है जो भारतीय होने का स्वाभिमान जगाता है। लेकिन दूसरी तरफ ‘अलीगढ़’के बारे में क्या कहा जाए? अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के समलैंगिक प्रोफेसर श्रीनिवास रामचंद्र सिरस की कहानी किसे प्रेरणा देगी? शेफ विकास खन्ना पर फिल्म बनाने की भी तैयारी है। इसके लिए नवाजुद्दीन सिद्दीकी से बातचीत की गई है। उनकी शर्त है कि स्क्रिप्ट में दम होने पर ही वे फिल्म करेंगे। जाहिर है कि एक शेफ की जिंदगी में फिल्मलायक तत्व तलाशना आसान नहीं होगा। बायोपिक बनाने का मोह निर्माताओं में इस कदर हिलोरे मार रहा है कि अनुराग कश्यप ने एक तरफ तो सीरियल क्लिर रमन राघव पर फिल्म बना डाली तो दूसरी तरफ शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथ आनंद की जिंदगी पर फिल्म बनाना चाहते हैं। समस्या यह है कि मुख्य भूमिका किसे दी जाए? खतरा एक यह भी है कि कहीं मिल्खा सिंह की तरह विश्वनाथन को भी नचा न दिया जाए? अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह को हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह की कहानी फिल्म के लिए उपयुक्त लग रही हैं। शिव सेना के संस्थापक बाल ठाकरे पर फिल्म ‘साहेब’ बनाने की घोषणा उनकी पुत्रवधु स्मिता ठाकरे ने पिछले साल की थी। कनाडा से फिल्म निर्माण का कोर्स करने वाले और ‘पी के’ में राज कुमार हिरानी के सहायक रहे स्मिता के बड़े बेटे राहुल ने फिल्म का जिम्मा संभाला है। बाल ठाकरे की 23 जनवरी 2017 को जन्म शताब्दी के मौके पर फिल्म को रिलीज करने की योजना थी। पटकथा का काम पूरा हो गया लेकिन अभी यह तय नही ंहै कि ठाकरे और उनके करीबियों की भूमिका कौन करेगा? जीवनीपरक फिल्मों की इस होड़ का हिस्सा बनने में कुछ हस्तियों ने अनिच्छा भी जताई है। ऑस्कर विजेता संगीतकार ए आर रहमान की जिंदगी पर वृत्त फिल्में बन चुकी हैं, कुछ किताबें आई हैं, खुद रहमान अपनी पहली फिल्म ‘99 सांग्स’से मिले अनुभवों को एक किताब की शक्ल दे रहे हैं। लेकिन अपने जीवन पर वे कोई फिल्म बनते नहीं देखना चाहते। कांति शाह ने पिछले दिनों एक फिल्म ‘मैं सनी लियोनी बनना चाहती हूं’ शुरू की। फिल्म पोर्न स्टार सनी लियोनी की जिंदगी पर आधारित है। सनी फिल्म के खिलाफ हैं और वे निर्माता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के बारे में सोच रही हैं।
280 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2019 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech