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के-ब्यूटी भारत में पैठ बनाने को तैयार

सियोल। सैमसंग, हुंडई और एलजी ऐसे नाम है जो भारत के हर घर में जाने जाते हैं, लेकिन दक्षिण कोरियाई उत्पादों की धाक अब सिर्प कार और इलेक्ट्रॉनिक्स तक ही सीमति नहीं रह गया है। कोरियाई पॉप स्टार और फिल्में दुनियाभर में धमाल मचा रही हैं और इस कड़ी में नया नाम के-पॉप और के-ड्रामा का जुड़ गया है, जो के-ब्यूटी यानी कोरियाई ब्यूटी है।

के-ब्यूटी की लोकप्रियता कोरियाई स्किन केयर उत्पादों, या 'फंक्शनल' सौंदर्य प्रसाधनों के बढ़ते प्रभाव का प्रतिबिंब है, जो त्वचा को स्वस्थ और सुंदर रखने के लिए उपयोग की जाती है। इन उत्पादों की रेंज काफी बड़ी है, जिसमें हाइड्रेटिंग स्नेल स्लाइम फेस मास्क से लेकर एंटी-एजिंग ग्रीन टी सीरम तक शामिल हैं। स्थानीय बाजार में मांग के चलते यह उद्योग काफी हद तक बढ़ गया है। कहा जाता है कि कोरियाई महिलाएं और पुरुष त्वचा की देखभाल करने जैसी बातों को गंभीरता से लेते हैं और इसमें विभिन्न उपचारों और उत्पादों पर समय, ऊर्जा और पैसा खर्च करना शामिल है।

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की कर्मचारी सोई-ली के मुताबिक, उनके लिए मेकअप रूटीन कहीं बढ़कर है, यह एक तरह से उनकी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है। 27 वर्षीय ली ने कहा, "मैं मेकअप पर कम से कम एक घंटा हर रोज देती हूं। त्वचा देखभाल पर कोरिया में हम में से अधिकतर लोग ध्यान देते हैं। कुछ लोग दूसरों की अपेक्षा अपनी सुदंरता पर ज्यादा ध्यान भी देते हैं। अच्छा दिखने का एक दबाव होता है लेकिन हम मशहूर हस्तियों द्वारा प्रचार किए जाने वाले सौंदर्य प्रसाधनों के पीछे नहीं भागते बल्कि यह देखते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा है। कोरियाई उत्पादों की बढ़ती मांग न सिर्फ इसकी वराइटी व किस्मों के संबंध में बढ़ी है बल्कि गुणवत्ता और फंक्शनैलिटी के संबंध में भी बढ़ी है।

जो कोरियाई कंपनियों जैसे ब्यूटी कॉस्मेटिक कंपनी लिमिटेड तको नए उत्पादों और उपचारों के लिए और ज्यादा रिसर्च और विकास करने के लिए प्रेरित कर रहा है। ब्यूटी कॉस्मेटिक कंपनी सहअध्यक्ष ओह हान सुन के मुताबिक, "ग्राहक महज ऐसा उत्पाद नहीं चाहते जो उन्हें अस्थायी रूप से सुंदर दिखाए बल्कि वे स्वस्थ और सुंदर त्वचा चाहते हैं और वह भी नैचुरल तरीके से। इसलिए, हम बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ऑर्गेनिक और नैचुरल उत्पादों पर ध्यान दे रहे हैं।

कोरियाई 'फंक्शनल' कॉस्मेटिक्स का बाजार अन्य देशों जैसे चीन, थाईलैंड तक बढ़ गई है और कॉस्मेटिक बाजारों में लंबे समय से धाक जमाए अमेरिकी और फ्रांस उत्पादों को टक्कर देने के लिए यूरोप और अमेरिका भी पहुंच रहा है। कोरियाई कंपनियों की निगाहें भारतीय बाजार पर भी है, लेकिन फिलहाल भारतयी बाजारों में इनकी पहुंच सीमित तौर पर ही है। ओह ने कहा, "भारतीय बाजारों के लिए हमारे कई उत्पाद तैयार हैं, लेकिन समस्या बहुत ज्यादा कागजी खानापूर्ति का होना और सही वितरकों के मिलने को लेकर है।

लेकिन, हम भविष्य में भारतीय बाजारों में अपने उत्पादों को अच्छा प्रभाव छोड़ते देख रहे हैं। हालांकि, इस स्थिति में बदलाव आने के आसार हैं, क्योंकि भारतीय संगठनों और लोगों ने इस संदर्भ में बढ़ते अवसरों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। सांसद उदित राज को पिछले साल दक्षिण कोरियाई प्रांत चुंगबुक के गवर्नर द्वारा 'स्वास्थ्य एवं सौंदर्य प्रसाधन' एंबेसडर की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था। राज व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नवगठित अपने संगठन सीपीटीआई के जरिए कोरियाई कंपनियों की राह आसान बनाने पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर में भारत में व्यापार और संयुक्त उद्यम के बड़े असर हैं और वह इसे बढ़वा देना चाहते हैं लेकिन समस्या ज्यादा कीमतों को लेकर है, जिससे निपटने की जरूरत है।

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