जलवायु परिवर्तन की संवेदनशीलता से अवगत कराएगा विशेष मानचित्र

नई दिल्ली। आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी मंडी और आईआईएससी बेंगलुरु के अनुसंधानकर्ताओं ने भारत के 12 हिमालयी राज्यों के लिए जलवायु परिवर्तन की संवेदनशीलता दर्शाने वाला मानचित्र तैयार किया है जिससे इन संवदेनशीलता से निपटने के लिए प्राथमिकता के आधार पर संसाधन आवंटन में मदद मिलेगी। टीम ने एक बयान में कहा कि यह एक अनोखा अभियान था क्योंकि पहली बार सभी 12 भारतीय हिमालय क्षेत्र (आईएचआर) राज्यों के लिये एक ही ढांचा इस्तेमाल किया गया है। इसके कारण तुलनीय राज्य स्तरीय और राज्य के अंदर जिला स्तरीय संवेदनशीलता को बताने वाले मानचित्र का निर्माण हुआ है।

अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि ऐसे अभियान की आवश्यकता इसलिए थी क्योंकि यह तथ्य है कि आईएचआर जलवायु परिवर्तन एवं संवदेनशीलता के लिहाज से सर्वाधिक संवदेनशील क्षेत्रों में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के अधिकतर हिस्सों में लगातार दीर्घकालिक बदलाव हुए हैं और बीते दशकों में अत्यधिक तापमान और बारिश की घटनाएं बढ़ी हैं। इस तरह के तुलनीय आकलन संवेदनशीलता पर साझा समझ बनाने के लिये अधिकारियों, निर्णय करने वाले लोगों, कोष मुहैया कराने वाली एजेंसियों और विकास विशेषज्ञों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। इस मानचित्र से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कौन सा हिमालय क्षेत्र अधिक संवेदनशील है और ऐसा क्या है जो उन्हें संवेदनशील बनाता है तथा सरकार कैसे इन संवदेनशीलताओं से निपट सकती है। इन 12 हिमालयी राज्यों में असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के पर्वतीय जिले तथा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड एवं जम्मू कश्मीर शामिल हैं।

159 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।