भाजपा बनी राजा की पैदल सेना!

पता नही लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी, रामलाल या वसुंधरा राजे, शिवराज सिंह चौहान आदि नेता और भाजपा के विधायक, सांसद पिछले 55 महीने पर क्या सोचते होंगें? ये मोदी-शाह की आरती और उसके प्रसाद के अलावा क्या प्राप्त हुआ देखते हैं? मेरा मानना है इन तमाम नेताओं, खांटी भाजपाइयों की मोदी के देवालय में पंडे-पुजारियों वाली हैसियत भी नहीं है। मंदिर के बाहर, सीढ़ियों पर जैसे भीखमंगे बैठे रहते हैं वैसी दशा इन नेताओं, सच्चे-पुराने भाजपाइयों की है। दो कौड़ी की औकात नहीं। इसका प्रामाणिक सबूत मोदी के आगे कातर नजरों से आडवाणी के पचपन महीने में दिखलाई दिए फोटो हैं। हां, ये इतना भर संतोष कर सकते हैं कि प्रभु नरेंद्र मोदी, हनुमान अमित शाह उनकी और देखने की कृपा बनाए हुए हैं। दोनों सबको सेवादार बनाए रखे हुए हैं। इनसे जयकारे, हुंकारे लगवाते रहते हैं। इन दिनों आप वो वीडियो देख रहे होंगे, जिसमे नरेंद्र मोदी नारे बोलते हैं और मंच पर बैठे भाजपा नेता भी वैसे ही हाथ खड़े करके नीचे बैठे दर्शनार्थियों याकि पैदल सेना के साथ नारे लगाते हैं कि देश की रक्षा के लिए, जन-जन की रक्षा के लिए, भारत की एकता के लिए, सुशासन की राजनीति के लिए, खाने के अन्न के लिए, वोट फॉर इंडिया!  

हकीकत में यह वोट फॉर इंडिया नहीं, बल्कि वोट फॉर नरेंद्र मोदी है। पिछले पचपन महीने में जो हुआ है उसका लब्बोलुआब है इंडिया इज मोदी, मोदी इज इंडिया। वह तब हुआ जब पहले मोदी इज भाजपा, भाजपा इज मोदी बना। मोदी-शाह ने 55 महीने में सबसे पहले सुनिश्चित यहीं किया कि पूरी भाजपा अपने अन्न (सत्ता) के लिए नरेंद्र मोदी के आगे कटोरा ले कर खड़ी हो। मोदी ने दिल्ली में सत्ता की चाबी ली नहीं कि वे पूरी भाजपा की संजीवनी बन गए। अपनी उंगली पर सत्ता का गोवर्धन दिखलाते हुए भाजपा और जनता दोनों को बताया कि वे हैं तो संजीवनी है। कल सोशल मीडिया पर एक इमेज देखने को मिली- छोटे-मोटे भेद मिटा दो, महासमर की बेला है, राष्ट्र की खातिर करो समर्थन, मोदी लड़ रहा अकेला है।

अब कोई बताए कि 55 महीने में भाजपा में सारी लीडरशीप खत्म कर अकेले बनने, अकेले गोवर्धन पर्वत उठाने, श्रीकृष्ण- विष्णु भगवान के अवतार की मूर्ति बनने का संकल्प जब खुद मोदी ने साधा है तो कौन सा राष्ट्र, कैसा राष्ट्र, कौन सी पार्टी, क्या विचारधारा सब तो अकेले मोदी की कथित 56 इंची छाती से प्रकट भय हैं! महासमर भी उनका बनाया है और राष्ट्र भी उनका पर्याय व एक अकेला राजा वाली हिरोगिरी खुद की तो अपने आप फिर होगा जब तक सूरज चांद रहेगा मोदी और भारत रहेगा। मोदी की 56 इंची छाती में सुरक्षित भारत का प्रकटीकरण है, श्रीमुख से ब्रह्मांड के दर्शन हैं और उनके कोल्हू से निकले घी-दूध-तेल में सवा सौ करोड़ लोग तरबतर हैं तो भाजपाइयों को तो कटोरा लेकर बैठे ही रहना है। मोदी के दर्शन भर से कटोरा भरा पूरा बना रहेगा।

ऐसी मूर्खता आजाद भारत के इतिहास में इमरजेंसी के वक्त भी थी। इंडिया और कांग्रेस दोनों इंदिरा गांधी के पर्याय बने थे। इंदिरा है तो देश है और कांग्रेस है। पर तब कांग्रेस के चंद्रशेखर, मोहन धारिया, रामधन जैसे कुछ नेताओं ने ऐसा मानने से इनकार किया था। बाद में जगजीवन राम, हेमवती नंदन बहुगुणा ने बागी बन स्वाभिमान की रीढ़ की हड्डी दिखलाई थी। लेकिन पिछले 55 महीने में हिंदुओं की कथित असली पार्टी भाजपा ने दुनिया को दिखाया है कि कथित असली हिंदू का अर्थ, भाजपा नेताओं का अर्थ बिना रीढ़ की हड्डी वाली पैदल सेना है। बिना बुद्धि की वानर सेना है।      

मैं भाजपा को करीबी से देखता रहा हूं। मेरा असंख्य नेताओं, पार्टी चेहरों पर ध्यान रहा है लेकिन पिछले 55 महीने की हकीकत है जो नरेंद्र मोदी, अमित शाह के दो चेहरों के अलावा दूसरे किसी पर गौर नहीं बना। न इन दिनों पता है कि कौन पार्टी का महासचिव है और प्रदेशों में कौन-क्या है! इसलिए क्योंकि 11 करोड़ सदस्यों का जुमला फेंक कर मोदी-शाह ने पूरी भाजपा को पैदल सेना में तब्दील किया है। सबको नारे लगाने वाले, हिज मास्टर वॉयस उर्फ भोंपू, सेवादार बना दिया है। पार्टी में तीसरे किसी चेहरे का कोई मतलब नहीं है। ले दे कर एक राजा है और दूसरा सेनापति। सेनापति राजा के लिए सैनिकों को हांकता है और पानीपत की तीसरी लड़ाई का बिगुल बजा कर आह्वान बनाता है कि मुसलमानों की बस्तियों में जाओ और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाओ। नरेंद्र मोदी हुंकारा मारते हैं छोड़ेंगे नहीं और सेनानी मैदान में कश्मीरियों को पकड़ ठोक डालते हैं। राजा चौबीसों घंटे अपने घंटे-घड़ियालों से खुद और दूसरों से शोर बनवाए रखता है, ललकारता रहता है और सेनापति बुलंद आवाज में पैदल सेना को झोंके रहता है कि मोदीजी की पूजा नहीं की तो देश मर जाएगा। हिंदुओं को यमराज समूल मार देंगे। सो, जयकारा लगाना है, लड़ना है और भारत को देशद्रोहियों से मुक्त बनाना है!

अब देशद्रोही कौन? जवाब है कि वह हर शख्स, हर वह जच्चा-बच्चा जो राजा पर सवाल करे। राजा के खिलाफ राजनीति करे। राजा के खिलाफ लिखे। राजा की तुगलकी मनमानी में मीनमेख निकाले। अंहकार के रावण को लोकतंत्र के लिए सत्यानाशी बताए। हां, आजाद भारत के 70 साल के इतिहास की यह अभूतपूर्व, अकल्पनीय बात है कि पूरे देश को 55 महीने में पानीपत की तीसरी लड़ाई बना दिया है और भाजपा का हर जच्चा-बच्चा राजा और सेनापति की तूताड़ी बजा रहा है। चुनाव सबका साथ सबका विकास पर नहीं, बल्कि पानीपत की तीसरी लड़ाई के नाम पर लड़ रहे हैं!  भाजपा 55 महीने में ऐसी पैदल सेना बन गई है, जिसमें न मार्गदर्शक मंडल की एक बार बैठक है। न संसदीय बोर्ड का मतलब है और न केंद्रीय चुनाव समिति या प्रदेशों की कोर कमेटियों का मतलब है। ऐसे ही न महासचिव और पदाधिकारियों का मतलब है। सब निराकार, बिना किसी हैसियत, बिना विचार, बुद्धि और बिन बहस की उस अवस्था में हैं, जिसमें ध्येय सिर्फ राजा का जयकारा और राजा की गुलामी है।

मैं इस बात को पहले भी लिख चुका हूं कि 55 महीने में नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने प्रमाणित किया है कि हिंदुओं के डीएनए, जिंस में गुलाम अनुभव की पिटाई से वह कोई नुक्स पैंठा है, जिसके चलते प्रमाणित होता है कि हिंदुओं को किसी न किसी तरह की गुलामी में जीना ही है। डर कर, बच कर, खौफ में जीते हुए वह इस मूर्खता में रहता है कि इंदिरा या मोदी नहीं रहे तो मर जाएंगें। नेहरू की मृत्यु के बाद भारत का क्या तो मोदी दुबारा नहीं बने तो देश खत्म! हिंदू को डर, खौफ, मूर्खता में जीना है और मूर्ति विशेष की भक्ति में रमना है। सोचें संघ के मोहन भागवत, सुरेश जोशी, दत्तात्रेय से ले कर आडवाणी, डॉ. जोशी, राजनाथ सिंह, गडकरी आदि तमाम नेताओं के दिमाग के उन तंतुओं पर, जिनमें इतना भी भान नहीं बना कि 55 महीने में मोदी ने उन्हें कैसा पथभ्रष्ट, भिखमंगा बनाया है। नरेंद्र मोदी ने यदि सरदार पटेल की सबसे ऊंची मूर्ति बनाई तो पटेल हैं तो कांग्रेस के। प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न दिया है तो वे हैं तो कांग्रेस के। धीरूभाई अंबानी को भारत विभूषण बनाया तो वे थे तो कांग्रेस की क्रोनी पैदाइश। गांधी के चश्मे में स्वच्छ भारत रखा तो वह क्या संघ-भाजपा को सावरकर, गोलवलकर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आइडिया से भाजपा को साफ–स्वच्छ बनाना है या गांधी के चश्मे के फ्रेम को इनके आइडिया में रंगा बताना है?

मोदी-शाह ने भाजपा का, संघ का, संघ के कथित हिंदू यज्ञ का सब कुछ बदल डाला। चाल-चेहरा-चरित्र बदल दिया। मंत्र बदल दिए। हवन सामग्री बदल दी। विचार- आध्यात्मिकता को खत्म कर उसे घंटे-घड़ियालों के शोर में, जुमलों में बदल डाला और जिंदा लोगों को मुर्दा-कातर चेहरों में तब्दील किया। जिंदा कौम के विचार को मॉब लिंचिंग, अपने ही देश में पानीपत की तीसरी लड़ाई में बदल डाला और बावजूद इसके कोई सुध लेने, बोलने की स्थिति मे नहीं। संघ-भाजपा में सब सीढ़ियों पर कटोरा लिए कातर भाव टकटकी लगाए बैठे हैं महाराज कृपा रखिएगा।

उफ! हिंदू चेहरों की कायरता, बेबसी, रीढ़हीनता का यह आलम और सवा सौ करोड़ लोगों को भरमाना कि वे इस्लाम के जेहादियों से लड़ेंगे। आंतक से मुक्त बनाएंगे। देश को सुरक्षित करेंगे। जरा कल्पना करें कि भगवानजी के मंदिर की सीढ़ियों पर कटोरा लिए बैठे भिखारियों, पंडे-पुजारियों का बोलना, कीर्तन करना कि हमें वोट दो, हम सुरक्षा देंगे। हमसे है देश सुरक्षा। हम है 56 इंची छाती वाले। सो, भाजपा रही होगी कभी राजनीति का, स्वाभिमानी-विचारवानों, स्वतंत्रचेता लोगों का लोकतांत्रिक जमावड़ा, अखाड़ा। अब तो वह है राजा, सेनापति की नतमस्तक पैदल सेना। सोचें, 55 महीने में दुनिया में किस पार्टी का ऐसा अधोपतन हुआ?

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