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तो मोदी के पीएम होंगे नीतीश!

मैंने बहुत पहले लिखा था कि मोदी-जेटली ने नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बन सकने का सपना दिखाया हुआ है। उसके बाद खबर थी कि अमित शाह ने प्रशांत किशोर को नीतीश कुमार के यहां प्लांट कराया। नीतीश कुमार के ही हवाले मालूम हुआ कि प्रशांत किशोर हकीकत में मोदी-शाह के आदमी हैं न कि उनके। तभी कांग्रेस और बाकी पार्टियों में वह अफवाह विश्वास में बदली की प्रशांत किशोर को कांग्रेस में भी मोदी-शाह ने प्लांट कराया तो जगन मोहन आदि के यहां भी मोदी के गेम प्लान से प्रशांत किशोर चुनावी विशेषज्ञता बेच रहे हैं। तभी  यह खबर हैरानी वाली नहीं थी कि उद्धव ठाकरे के यहां भी प्रशांत किशोर पहुंचे हैं। नरेंद्र मोदी, अमित शाह जब उद्धव ठाकरे से केमिस्ट्री नहीं बना पा रहे हैं तो प्रशांत किशोर परोक्ष तौर पर चुनाव लड़ाने की विशेषज्ञता के ठेके के हवाले शिव सेना को मैनेज करेंगे। 

वही होता लगता है। उद्धव ठाकरे और शिव सेना के नेताओं को प्रशांत किशोर ने समझाया है कि नरेंद्र मोदी वापिस प्रधानमंत्री नहीं बन रहे हैं। प्रधानमंत्री तो कोई और बनेगा। खबर अनुसार उन्होंने शिव सेना के नेताओं की बैठक में नीतीश कुमार का नाम लिया। पर अपनी राय में यह भी मुमकिन है कि उन्होंने उद्धव ठाकरे को थ्योरी बेची हो कि अभी आप यदि भाजपा से, मोदी-शाह के कहे अनुसार सीट बंटवारा कर लें, रिश्ता बनाए रखें तो चुनाव के बाद आप भी प्रधानमंत्री बन सकते हैं। इसलिए कि संघ और भगवा ताकतें नीतीश कुमार को नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे का प्रधानमंत्री बनाना पसंद करेंगी! 

हां, प्रशांत किशोर भाजपा से शिव सेना का एलायंस बनवाए रखने, सीट बंटवारे की सहमति का मिशन लिए हुए भी हो सकते हैं। आखिर नीतीश कुमार ने यह बताया हुआ है कि वे तो अमित शाह के आदमी हैं! हालांकि अपना मानना है कि वे मूलतः नरेंद्र मोदी के हैं।  

सोच सकते हैं नीतीश के पीएम बनने की बात कितनी फालतू! पर राजनीति संभावनाओं का खेल है। यह भी तय मानें कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपनी सभाओं की भीड़ को समझ रहे हैं। मोदी को खुद वापिस प्रधानमंत्री बनने के अवसर कम लग रहे होंगे तो वे सिनेरियो बूझते हुए आगे अपनी सुरक्षा के लिए, सीबीआई-ईडी जैसी एजेंसियों से अपने बचाव की चिंताओं में वैसी सरकार, प्रधानमंत्री बनवाने का विकल्प भी सोचे हुए होंगे, जिससे उनका बचाव रहे। अपनी थीसिस है कि नरेंद्र मोदी की पहली कोशिश अरूण जेटली को अगली खिचड़ी में प्रधानमंत्री बनाने की होगी। भाजपा को 150 से 180 सीटें मिलीं तो एनडीए के उद्धव ठाकरे हों या नीतीश कुमार कोई भी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने को तैयार नहीं होगा। न ही फिलहाल तटस्थ नजर आ रहे नवीन पटनायक या जगन मोहन या चंद्रशेखर राव किसी सूरत में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने का समर्थन देंगे। गुजराती सेठ लोग पैसे की कितनी ही बोरियां खोलें, चंद्रशेखर राव या जगन मोहन व नवीन पटनायक के लिए पैसा मतलब वाली बात नहीं है। उन्हें दिल्ली की सत्ता में सीधी-खुली धमक चाहिए तो ये इसके लिए किसी क्षत्रप को या बिना जनाधार वाले नेता को प्रधानमंत्री बनाना चाहेंगे। फिर यदि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने अरूण जेटली को स्वीकार्य बनवाने की कोशिश की तो यह भी संभव है कि भाजपा के अगली संसद में चुने सांसद सीधे मोदी को ठेंगा बताएं और संघ भी सहमत नहीं हो। 

तभी नीतीश कुमार के लिए अरूण जेटली ने गाजर लटकाई हुई है तो नरेंद्र मोदी, अमित शाह बिहार की लोकसभा सीटों के बंटवारे में भाजपा की जीती सीटें भी जनता दल यू के लिए छोड़ने को तैयार हुए हैं। मामूली बात नहीं है जो भाजपा ने 2014 में बिहार में 22 सीटें जीतीं। मगर अगले चुनाव में वह 17 ही सीटों पर चुनाव लड़ेगी। नीतीश कुमार और उद्धव ठाकरे को जैसे भी हो एलायंस में बनाए रखा जाए, इसकी कोशिश ही चुनाव जीतने से ज्यादा प्रधानमंत्री नहीं बन सकने की स्थिति में अपने विकल्प बनाने के मोदी-शाह के रोडमैप वाली बात है। 

और इसे शिव सेना के आला जमावड़े में प्रशांत किशोर ने लीक कर दिया। ‘द इकॉनोमिक टाइम्स’ में छपी खबर के अनुसार शिव सेना के नेताओं को प्रशांत किशोर ने बताया कि लोकसभा त्रिशुंक आई तो भाजपा (मोदी) के लिए अपने नेतृत्व में सरकार बनाना संभव नहीं होगा। तब गैर-एनडीए पार्टियों के ‘लगभग एक सौ सांसद’ नीतीश कुमार जैसे व्यक्ति को गैर-कांग्रेसी सरकार का नेतृत्व करने के लिए चुनेंगे। 

उन्होंने आगे आंध्र की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, तेलंगाना की टीआरएस, ओड़िशा की बीजू जनता दल और तमिलनाडु की अन्ना डीएमके पार्टी का नाम लिया। मतलब ये नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनाए जाने के संभावी समर्थक हो सकते हैं। 

क्या मुंगेरी लाल का सपना है! पहली बात नीतीश कुमार और उनकी पार्टी बिहार में दस लोकसभा सीटें भी जीत जाए तो बड़ी बात होगी। मान ले दस-बारह सीट जीते तब भी 15 सीट जीते चंद्रशेखर राव क्या नीतीश के लिए गद्दी छोड़ेंगे? आज की तारीख में क्षत्रपों में सर्वाधिक महत्वकांक्षी कोई है, प्रधानमंत्री पद का दो टूक मिशन लिए कोई है तो वह चंद्रशेखर राव हैं। फिर जगन रेड्डी को भ्रष्टाचार, मनी लॉडरिंग के भयावह आरोपों की जांच को प्रशांत किशोर ने चाहे जितना नरेंद्र मोदी से (सीबीआई-ईडी पूरी तरह आंख मुंदे हुए है) दबवाया हुआ है मगर जगन मोहन की बदनामी इतनी अधिक है कि मोदी-शाह के चाहने के बावजूद संघ-भाजपा उनसे परोक्ष नाते को भी तैयार नहीं होंगे। किस मुंह नीतीश कुमार या अरूण जेटली अपने गले जगन मोहन को लगा उनके समर्थक प्रधानमंत्री बनने का पैंतरा चलेंगे? अपन ने हिसाब लगाया हुआ (रविवार को गपशप में राज्यवार फिर बताऊंगा) है कि अगले चुनाव में जगन मोहन, नवीन पटनायक, चंद्रशेखर राव, अन्ना डीएमके की कुल सीटें 55 का आंकड़ा पार नहीं करने वाली हैं। एनडीए 170 पर अटकेगी तो 55 जोड़ लें तब भी 225 सीटों पर मोदी-जेटली-प्रशांत किशोर कैसे रोडमैप को आगे बढ़ा सकेंगें?

मगर नरेंद्र मोदी–अमित शाह की जान क्योंकि अटकी हुई है और राजनीति संभावनाओं का खेल है तो प्रशांत किशोर चुनाव बाद किंगमेकर की खामोख्याली में यदि हैं तो हैं! कोई क्या कर सकता है? अपनी शुभकामना कि वे नीतीश कुमार को या उद्धव ठाकरे को प्रधानमंत्री बनाएं! उन्होंने 2014 में चाय पर चर्चा के जुमले पर नरेंद्र मोदी के ‘किंगमेकर’ होने का जलवा बनाया तो आगे भी क्यों न नीतीश कुमार, उद्धव ठाकरे या जगन रेड्डी के सामने प्रधानमंत्री पद की गाजर लटकवा कर वापिस किंगमेकर बनने का ख्याल पकाएं! 

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