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त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में रही चहल पहल

बांसवाड़ा(राजस्थान)। अरावली पहाड़ियों से घिरे शताब्दी पुराने त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में कुछ दिन की चहल पहल के बाद एक बार फिर शांति पसरी है। विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही बीते लगभग दो महीनों में यहां पूर्व, मौजूदा तथा भावी विधायकों और उनके समर्थकों की खूब रौनक रही थी।

आम मान्यता के अनुसार राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में सफलता के लिये लोग त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में मन्नत मांगते हैं और देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी कई बार इस मंदिर में आई हैं। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अशोक पांचाल ने बताया कि मंदिर में चुनाव के दौरान चुनावी उम्मीदवारों के आने से दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ जाती है क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार अपनी सफलता के लिये माता का आशीर्वाद प्राप्त करने आते है। उन्होंने बताया कि नामांकन पत्र भरने के बाद उम्मीदवारों की संख्या विशेष तौर पर बढ़ जाती है।

राजधानी जयपुर से 516 किलोमीटर दूर त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में हाल ही में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ-साथ अन्य कई उम्मीदवारों ने पूजा अर्चना कर माता का आशीर्वाद लिया। 2013 के विधानसभा चुनाव की मतगणना और 2014 के लोकसभा चुनावों के परिणाम के दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे त्रिपुरा सुंदरी मंदिर से ही परिणामों पर नजर रखे हुए थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी मंदिर का दौरा किया था। उस समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, राजस्थान के पूर्व राज्यपाल एस के सिंह, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी, पूर्व मंत्री गुलाब सिंह शक्तावत, कनकमल कटारा, भवानी सिंह राजावत, वासुदेव देवनानी, कालीचरण सराफ, भवानी जोशी, महेन्द्र जीत सिंह मालवीय और अन्य कई नेता मंदिर में आते रहे हैं। यह मंदिर राजा कनिष्क के समय से 'शक्ति पीठ' के नाम से लोकप्रिय है। 1483 ईसवीं के दौरान शिलालेख पर त्रि—उरारी (त्रिपुरारी) शब्द पाया गया था। पांच फुट की काली पत्थर से बनी त्रिपुरा सुंदरी की प्रतिमा 18 शस्त्रों को लिये शेर पर विराजमान है। बांसवाडा, डूंगरपुर, गुजरात, मालवा, मारवाड के शासक त्रिपुरा सुंदरी के उपासक थे।

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