स्वामी वासुदेवानंद की पेशवाई निकली

प्रयागराज। विश्व के सबसे बड़े धार्मिक समागम कुम्भ के लिए स्वामी वासुदेवानंद की हाथी, घोड़े और बैंड बाजों के साथ भव्य पेशवाई निकली। स्वामी वासुदेवानंद के रथ के आगे भगवान आदि शंकराचार्य, ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य पीठोद्धारक ब्रह्मलीन स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती, ब्रह्मलीन स्वामी शानतानंद सरस्वती, एवं ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानंद महाराज का चित्र सुसज्जित रथ पर रखा गया था। इस रथ के पीछे ठाकुर जी श्री राधा कृष्ण की मनोहरी झांकी थी।

स्वामी वासुदेवानंद की पेशवाई आदि शंकराचार्य मंदिर-ब्रह्मनिवास अलोपीबाग से गाजे-बाजे, ढ़ोल नगाड़ों के बीच प्रारम्भ हुई। स्वामी वासुदेवानंद महराज शंकराचार्य के फूलों से सजे लगभग 20 फिट ऊंचे रथ पर सवार थे। काशी सुमेरू पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रनंद सरस्वती, अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं जूना अखाड़ा के संरक्षक श्री महंत हरि गिरी, प्रेम गिरी, विद्यानंद सरस्वती के अलावा परहंस आश्रम के पीठाधीश्वर टीकरमाफी, श्री दण्डी सन्यासी प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष स्वामी विमलदेवाश्रम, महामंत्री स्वामी ब्रह्माश्रम समेत बड़ी संख्या में संत, महात्मा और नागा सन्यासियों ने पेशवाई देखने वाले सड़क किनारे कतारबद्ध खड़े श्रद्धालुओं को आर्शीवादस्वरूप पुष्प पुष्प वर्षा करते चल रहे थे।

पेशवाई में हाथी, घोड़ा, ध्वज पताकाओं एवं झंडा एवं बैनर की इस भव्य पेशवाई में दंडी सन्यासी स्वामी मुकुन्दानंद, स्वामी विवेकानंद ब्रह्मचारी, आत्मानंद ब्रह्मचारी, विशुद्धानंद ब्रह्मचारी, आचार्य पंडित छोटेलाल मिश्र समेत बड़ी संख्या में सनातन वैदिक धर्माचार्य एवं श्रद्धालु सम्मलित रहे। पेशवाई में सात हाथी नौ ऊंट और 12 घोड़े पर महात्मा सवार होकर चल रहे थे। त्रिवेणी मार्ग पर स्थित जूना अखाडा के मंत्री नारायण गिरी समेत वरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्वामी वासुदेवनंद का स्वागत किया।

यह पेशवाई देश के सबसे बड़ा अखाड़ा जूना और आवाहन के विशेष संयोजन में निकला। भगवान आदिशंकराचार्य मंदिर ब्रह्मनिवास अलोपी बाग से चुंगी चौकी और त्रिवेणी मार्ग होते हुए गंगा पार झूंसी स्थित सेक्टर 15 में ब्रदिकाश्रम पीठ शिविर में पहुंचा।

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