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कुंभः आस्था सब पर भारी

कुंभनगर। इसे आस्था की परकाष्ठा ही कहा जायेगा कि मौनी अमावस्या के अवसर पर देवों के बरसाये गये अमृत का रसपान करने की अभिलाषा का साथ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में डुबकी लगाने को व्याकुल लाखों स्नानार्थियों ने कुंभ मेला क्षेत्र में खुले आसमान के नीचे रात गुजारी। देश के कोने कोने से प्रयागराज पहुंचे श्रद्धालुओं की भीड़ से रविवार को ही सारा शहर गुलजार हो चुका था।

बाहरी जिलों और प्रदेशों से आने वाले वाहनो को शहर के बाहरी छोर पर अस्थायी रूप से बनायी गयी पार्किंग में जगह दी जा रही थी। वहां से संगम क्षेत्र में पहुंचने की जद्दोजहद में लाखो श्रद्धालुओं ने कदमो से गंगा की रेती तक का सफर कई कई घंटो में पूरा किया।

शाम होते होते पूरा संगम क्षेत्र श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भर गया था। सफर से थके मांदे लाखों श्रद्धालुओं ने रेती को ही अपना बिस्तर बना लिया। हाड़ कंपाऊ ठंड की परवाह किये बगैर महिला, पुरूष ,बुजुर्ग और बच्चे रेती पर इर्द गिर्द फैल गये। फिसलन से बचने के लिये कुंभ प्रशासन ने दो रोज पहले ही कई टन पुआल रेती पर डलवाई थी। कई श्रद्धालुओं ने फैली पुआल को बीनकर उसे चादर बना लिया जबकि ठंडी रेत ने उनके बिस्तर का काम किया।

संगम की रेती पर श्रद्धालुओं के सैलाब से सहमे प्रशासन ने रविवार रात 1125 से ही मौनी अमावस्या के स्नान का एेलान कर दिया था। इसके पीछे उसका मकसद श्रद्धालुओं को संगम क्षेत्र से विदा करने का था। कुंभ प्रशासन को भलीभांति पता था कि यदि स्नानार्थियों का जमावड़ा इसी तरह बढ़ता रहा तो सोमवार की भोर शाही स्नान के समय भीड़ को संभालना नामुमकिन हो जायेगा।

उधर, मौनी अमावस्या और सोमवती अमावस्या के अदभुद योग में स्नान का पुण्य लाभ लेने को बेकरार श्रद्धालु सुरक्षा बलाें को चकमा देते हुये भोर तक इंतजार करते रहे जबकि विदेशी सैलानी और मीडिया ने इस दिलचस्प नजारे को कैमरो में कैद करने के लिये सारी रात कड़ी मशक्कत करते दिखायी पड़े।श्रद्धालुओं की भीड को नियंत्रित करने के लिये कुंभ प्रशासन ने जिग जैग की व्यवस्था की है। लाल और काली सड़क के बीच खाली पड़े मैदान में बल्लियों से घेर कर जिग-जैग (भूल भुलैया) तैयार किया गया है। मात्र एक किमी की परिधि में तैयार इस भूल भुलैया में श्रद्धालु को कतारबद्ध ढंग से एक निर्धारित स्थान के भीतर ही घूमना है। भीड़ को जिग जैग में घुसने के बाद निकलने में कम से एक से डेढ़ घंटे का समय लग रहा है।

इतना समय प्रशासन को भीड़ पर नियंत्रण करने के लिए पर्याप्त रहेगा।कुम्भ अपर मेला अधिकारी दिलीप कुमार त्रिगुनायत ने बताया कि संगम तट पर अधिक भीड़ होने, पीछे से और अधिक आने वाली भीड़ को नियंत्रित करना ही इसका मुख्य उद्देश्य है। संगम नोज की भीड़ छंटने के साथ जिग-जैग में फंसे श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने का मौका दे दिया जायेगा। इस तरह नोज पर भीड़ को नियंत्रि किया जा सकेगा।

अधिक भीड़ बढने पर किसी प्रकार की भी अनहोनी होने की आशंका बढ़ सकती है। हालांकि मेला प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।पश्चिम बंगाल के मिदनापुर से आयी अपर्णा दास ने कहा कि मौनी अमावस्या के पर्व पर कुंभ में डुबकी लगाने के लिये वह और उनका परिवार व्याकुल है मगर इससे पहले वह अखाड़ो के शाही स्नान का पुण्य लाभ लेना पसंद करेगी।

शनिवार को ही वे सपरिवार प्रयागराज पहुंच गयी थी। उन्होने टेंट सिटी में डेरा जमाने के लिये भरसक प्रयास किये मगर उन्हे असफलता ही मिली। आखिरकार उनके परिवार को दो रातें खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ी मगर उन्हे खुशी है कि कुंभ स्नान के साथ साथ उनके परिवार को पवित्र अखाड़ों के दर्शन का मौका मिला।कर्नाटक के हुबली से पधार विनोद ने कहा कि कुंभ के लिये उत्तर प्रदेश सरकार के प्रबंध काबिल ए तारीफ है। टेंट सिटी की शोभा अद्वितीय है हालांकि उन्हे यहां ठहरने का मौका नहीं मिल सका। शहर के एक होटल में उन्हे महंगे दाम पर एक कमरा मिला मगर कुंभ में स्नान के लिये यह कीमत ना के बराबर है।

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