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विदेशियों के लिए कुंभ कौतूहल का केंद्र

कुंभनगर। गंगा,यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में अद्भुद,अकल्पनीय और अनूठे कुम्भ में मौनी अमावस्या का हर लम्हा श्रद्धा और भक्ति की बयार से ओतप्रोत नजर आया वहीं सुरक्षा के लिहाज से एक ही दिन में दो करोड़ से अधिक स्नानार्थियों की मेला क्षेत्र में मौजूदगी खासकर विदेशी मीडिया और सैलानियों को अचरज में डालने के लिये पर्याप्त थी।

संगम की रेती में रविवार रात से ही आस्था का समंदर हिलोरें मारने लगा था जो सोमवार सुबह होते होते जनसैलाब में तब्दील हो चुका था। हर हर गंगे के उदघोष के साथ संगम में डुबकी लगाने का सिलसिला लगातार जारी रहा। इस दौरान सुरक्षा बल के जवान भीड़ को संभालने की मशक्कत करते रहे। भोर से शुरू हुये कुुंभ के दूसरे शाही स्नान में अखाड़ों की दिव्यता और आैलौकिकता ने हर किसी का मन मोह लिया।

रेती पर दौड़ते नागा साधुओं की एक झलक पाने के लिये श्रद्धालु देर रात कतारबद्ध तरीके से बैरीकेडिंग के दोनो तरफ जमे हुये थे। नागाओं ने संगम में डुबकी लगाने के बाद भस्म का लेप किया वहीं सजे धजे रथों में सवार विभिन्न अखाड़ों के मठाधीशों ने अपने अनुयायियों के साथ संगम में स्नान किया। त्रिशूल,तलवार और अन्य शस्त्रों से सुसज्जित नागाओं और बाबाओं की दिव्यता भोर की बेला में अद्धुत चमक बिखेर रही थी। डेनमार्क से आये सैलानी रिचर्ड हैनरी ने कहा “ कुंभ वाकई लाजवाब है।

आस्था का कोई जवाब नहीं। नदियों के प्रति भारतीयों का सम्मान और श्रद्धा देखने के काबिल है। यह भारतीय संस्कृति की विविधता काे दर्शाने के लिये काफी है। मैं इस बार अकेला आया हूं। उम्मीद करता हूं कि अगली बार मेले में परिवार भी साथ आ सके। ” चीन से पधारे दंपत्ति हे कू जियान ने कहा “ नागा साधु वास्तव में शोध का विषय है। उनका मस्त मौला अंदाज हर एक से जुदा है। कुंभ के मौके पर दूसरी बार भारत आने का मौका मिला है। नदी के तट पर होने वाला यह धार्मिक आयोजन काबिल-ए-तारीफ है वहीं सुरक्षा इंतजामों के लिये यहां की सरकार और सुरक्षा एजेंसियां बधाई के पात्र हैं।

इतने विशाल आयोजन को मुकाम तक पहुंचाना कतई आसान नहीं है।  भारतीयों की मेजबानी और हौसले का उनका परिवार तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता है। ” श्रीलंका के अरविंद डी सिल्वा ने कहा कि ‘अनेकता में एकता’ का प्रतीक कुंभ की महिमा का वर्णन करना असंभव है। यह एक बेमिसाल आयोजन है जो भारतीय संस्कृति की विविधता को दर्शाता है। मेला क्षेत्र में सफाई और अन्य सुविधाये बेमिसाल है। इसके लिये भारत सरकार बधाई की पात्र है। श्रीलंका और भारत पौराणिक रूप से भी जुड़े हैं

और दोनो देशों के बीच सांस्कृतिक सद्भाव दुनिया को एकजुट रखने में मदद करेगी। इस बीच दूसरे शाही स्नान पर्व की शुरूआत परम्परा के मुताबिक श्री पंचायती  महानिर्वाणी अखाड़ा ने की। शिविर से तड़के 5.15 बजे शाही जुलूस के साथ निकले नागा साधु और संत निर्धारित समय से करीब आधा घंटा पहले यानी पौने छह बजे संगम तट पर पहुंचे । उसके साथ अटल अखाड़ा ने भी शाही स्नान किया। अखाड़ों के संगम तट पर पहुंचने से पहले सुरक्षा अधिकारियों ने रास्ते को बिल्कुल साफ सुथरा करा दिया था लेकिन श्रद्धालुओं और मीडिया कर्मियों की भीड़ के आगे सुरक्षा इंतजाम नाकाफी साबित हुये।

शोभा यात्रा के बीच में फोटो जर्नलिस्ट अपने काम को अंजाम दे रहे थे जिसे साधु संत प्रोत्साहित भी करते दिखायी पड़े। कई साधुओं के हाथाें में मोबाइल फोन थे जिससे वह सेल्फी लेते भी दिखायी पड़े वहीं कई साधु संतों ने विभिन्न मुद्रायें धारण कर फोटोग्राफरों का काम आसान कर दिया।

इस बीच श्रद्धालुओं की भीड़ भी शोभा यात्रा के बीच में घुस गयी जिसने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल कर रख दी। इस दौरान सुरक्षा कर्मी सीटी बजा बजा कर भीड़ को पीछे धकेलते रहे। उधर, हवा में घूमते ड्रोन कैमरे अौर फूल बरसाते हेलीकाप्टर हर किसी के अाकर्षण का केन्द्र बने।कुंभ की कवरेज करने आये कई विदेशी पत्रकार बात करते दिखायी पड़े कि इतने बड़े हुजूम की सुरक्षा वाकई चुनौती भरी थी जबकि देश के कोने कोने से आये श्रद्धालु सुरक्षाबलों के हौसलाें और सरकार के इंतजामों की दाद देते हुये कह रहे थे कि मेले में आये भक्तों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तो पतित पावनी गंगा मईया निभा रही है।

मेला क्षेत्र में रविवार तडके से ही वाहनो का प्रवेश निषेध कर दिया गया था। रोडवेज बसों और अन्य निजी वाहनो के लिये शहर के बाहरी छोरों पर अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था की गयी थी जबकि वहां से सिविल लाइंस तक के लिये कुंभ शटल में मुफ्त यात्रा का इंतजाम किया गया था। सिविल लाइंस से संगम तक जाने के लिये केवल पैदल लोगों को इजाजत दी जा रही थी। प्रयागराज के मंडलायुक्त आशीष गोयल ने कहा , कुंभ के छह स्नान पर्वो में सबसे अधिक मान्यता माैनी अमावस्या पर्व की है। इस नाते भीड़ का उमड़ना स्वाभाविक है। इसके लिये सभी जरूरी इंतजामों किये गये हैं।

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