Loading... Please wait...

मकर संक्रांति का महत्व

मकरसंक्रांति का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व के साथ साथ समाजिक उत्सव के रूप में बड़ा ही महत्व पूर्ण स्थान है। ज्योतिष शास्त्र में इस पर विस्तार से विचार किया गया है। सृष्टि के आरम्भ में परम पुरुष नारायण ने अपनी योगमाया से अपनी प्रकृति में प्रवेश कर सर्वप्रथम जल में अपना आधान किया। इस कारण से इन्हें हिरण्यगर्भ भी कहा जाता है। सर्वप्रथम होने कारण ये आदित्य देव भी कहलाते हैं। इस वर्ष 15 जनवरी 2019 को मनाई जाएगी।

संक्रांति पौष मास में सूर्य से मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। वैसे तो संक्राति साल में 12 बार हर राशि में आती है, लेकिन मकर और कर्क राशि में इसके प्रवेश पर विशेष महत्व है। जिसके साथ बढती गति के चलते मकर में सूर्य के प्रवेश से दिन बड़ा तो रात छोटी हो जाती है। जबकि कर्क में सूर्य के प्रवेश से रात बड़ी और दिन छोटा हो जाता है।

मकर संक्रांति की कथा

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार इस विशेष दिन पर भगवान् सूर्य अपने पुत्र भगवान् शनि के पास जाते है, उस समय भगवान् शनि मकर राशि का प्रतिनिधित्व कर रहे होते है। पिता और पुत्र के बीच स्वस्थ सम्बन्धों को मनाने के लिए, मतभेदों के बावजूद, मकर संक्रांति को महत्व दिया गया। ऐसा माना जाता है कि इस विशेष दिन पर जब कोई पिता अपने पुत्र से मिलने जाते है तो उनके संघर्ष हल हो जाते हैं और सकारात्मकता खुशी और समृधि के साथ साझा हो जाती है। इसके अलावा इस विशेष दिन की एक कथा और है, जो भीष्म पितामह से जुडी हुई है, जिन्हें यह वरदान मिला था कि उन्हें अपनी इच्छा से मृत्यु प्राप्त होगी। जब वे बाणों की सज्जा पर लेटे हुए थे तब वे उत्तरायण के दिन की प्रतीक्षा कर रहे थे और उन्होंने इस दिन अपनी अपनी आँखें बंद की और इस तरह उन्हें इस विशेष दिन पर मोक्ष की प्राप्ति हुई।

मकर संक्रांति का महत्व

मकर संक्रांति किसानों के लिए बहुत अधिक महत्वपूर्ण होती है, इसी दिन सभी किसान अपनी फसल काटते है। मकर संक्रांति भारत का सिर्फ एक ऐसा त्यौहार है जो हर साल 14 जनवरी को ही मनाया जाता है। यह वह दिन होता है जब सूर्य उत्तर की ओर बढ़ता है। हिन्दूओं के लिए सूर्य एक रोशनी, ताकत और ज्ञान का प्रतीक होता है। मकर संक्रांति त्यौहार सभी को अँधेरे से रोशनी की तरफ बढ़ने की प्रेरणा देता है। एक नए तरीके से काम शुरू करने का प्रतीक है। मकर संक्रांति के दिन, सूर्योदय से सूर्यास्त तक पर्यावरण अधिक चैतन्य रहता है यानि पर्यावरण में दिव्य जागरूकता होती है इसलिए जो लोग आध्यात्मिक अभ्यास कर रहे है वे इस चैतन्य का लाभ उठा सकते है।

मकर संक्रांति पूजा विधि

जो लोग इस विशेष दिन को मानते है वे अपने घरों में मकर संक्रांति की पूजा करते है इस दिन के लिए पूजा विधि को नीचे दर्शाया गया है-

•    सबसे पहले पूजा शुरू करने से पहले पूण्य काल मुहूर्त और महा पुण्य काल मुहूर्त निकाल ले, और अपने पूजा करने के स्थान को साफ़ और शुद्ध कर ले। वैसे यह पूजा भगवान् सूर्य के लिए की जाती है इसलिए यह पूजा उन्हें समर्पित करते है।

•    इसके बाद एक थाली में 4 काली और 4 सफेद तीली के लड्डू रखे जाते हैं। साथ ही कुछ पैसे भी थाली में रखते हैं।

•    इसके बाद थाली में अगली सामग्री चावल का आटा और हल्दी का मिश्रण, सुपारी, पान के पत्ते, शुद्ध जाल, फूल और अगरबत्ती रखी जाती है।

•    इसके बाद भगवान के प्रसाद के लिए एक प्लेट में काली तीली और सफेद तीली के लड्डू, कुछ पैसे और मिठाई रख कर भगवान को चढाया जाता है।

•    यह प्रसाद भगवान् सूर्य को चढ़ाने के बाद उनकी आरती की जाती है।

•    पूजा के दौरान महिलाएं अपने सिर को ढक कर रखती हैं।

•    इसके बाद सूर्य मंत्र ‘ॐ हरं ह्रीं ह्रौं सह सूर्याय नमः’ का कम से कम 21 या 108 बार उच्चारण किया जाता है।

मकर संक्रांति को मनाने का तरीका

मकरसंक्रांति के शुभ मुहूर्त में स्नान, दान, व पूण्य का विशेष महत्व है। इस दिन लोग गुड़ व तिल लगाकर किसी पावन नदी में स्नान करते है। इसके बाद भगवान् सूर्य को जल अर्पित करने के बाद उनकी पूजा की जाती हैं और उनसे अपने अच्छे भविष्य के लिए प्रार्थना की जाती है। इसके पश्चात् गुड़, तिल, कम्बल, फल आदि का दान किया जाता है। इस दिन कई जगह पर पतंग भी उड़ाई जाती है। साथ ही इस दिन तीली से बने व्यंजन का सेवन किया जाता है। इस दिन लोग खिचड़ी बनाकर भी भगवान सूर्यदेव को भोग लगाते हैं, और खिचड़ी का दान तो विशेष रूप से किया जाता है। जिस कारण यह पर्व को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा इस दिन को अलग अलग शहरों में अपने अलग अलग तरीकों से मनाया जाता है। इस दिन किसानों के द्वारा फसल भी काटी जाती हैं।

भारत में मकर संक्रांति त्यौहार और संस्कृति

भारत वर्ष में मकर संक्रांति हर प्रान्त में बहुत हर्षौल्लास से मनाया जाता है। लेकिन इसे सभी अलग अलग जगह पर अलग नाम और परंपरा से मनाया जाता है।

उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार में इसे खिचड़ी का पर्व कहते है।

तमिलनाडु : तमिलनाडु में इसे पोंगल त्यौहार के नाम से मनाते है।

गुजरात : उत्तरायण नाम से इसे गुजरात और राजस्थान में मनाया जाता है।

हरियाणा : मगही नाम से हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में यह मनाया जाता है।

पंजाब : पंजाब में लोहड़ी नाम से इसे मनाया जाता है जो सभी पंजाबी के लिए बहुत महत्व रखता है, इस दिन से सभी किसान अपनी फसल काटना शुरू करते है और उसकी पूजा करते है।

असम : माघ बिहू असम के गाँव में मनाया जाता है।

कश्मीर : कश्मीर में शिशुर सेंक्रांत नाम से जानते है।

विदेशों में मकर संक्रांति के त्यौहार के नाम

भारत के अलावा मकर संक्रांति दुसरे देशों में भी प्रचलित है लेकिन वहां इसे किसी और नाम से जानते है।

नेपाल में इसे माघे संक्रांति कहते है।

थाईलैंड में इसे सोंग्क्रण नाम से मनाते है।

म्यांमार में थिन्ज्ञान नाम से जानते है।

कंबोडिया में मोहा संग्क्रण नाम से मनाते है।

श्री लंका में उलावर थिरुनाल नाम से जानते है।

लाओस में पी मा लाओ नाम से जानते हैं।

67 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2019 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech