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मोदी उत्तराखंड को देंगे विकास की सौगात: डॉ रावत

नैनीताल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने आगामी उत्तराखंड के दौरे पर 3340 करोड़ की राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना का शुभारंभ करेंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से संचालित होने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से प्रदेश के सर्वांगीण विकास का खाका तैयार किया गया है।

श्री मोदी आगामी 14 फरवरी को रुद्रपुर के दौरे पर आ रहे हैं। वे परियोजनाओं का शुभारंभ करने के बाद एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इस परियोजना का उद्देश्य पहाड़ों से पलायन को रोकना, किसानों की आय बढ़ाना एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन करना है। इसके अलावा इसके तहत प्रदेश में संचालित होने वाली दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के स्वरूप को भी वृहद किया गया है तथा इसे अधिक लोक कल्याणकारी बनाया गया है।

प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं सहकारिता राज्यमंत्री ड़ॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि इस परियोजना के माध्यम से कलस्टर आधारित कृषि के विकास के साथ-साथ सहवर्ती उत्पादों में वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण, भंडारण एवं विपणन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करके किसानों को अधिक से अधिक लाभ एवं उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाना है। इस परियोजना को सहकारी संस्थाओं तथा दुग्ध विकास, भेड़ बकरी पालन एवं मत्स्य पालन जैसे सहकारी क्षेत्रों पर केन्द्रित की गयी है।

उन्होंने बताया कि परियोजना के प्रमुख घटकों में बहुद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (एम-पैक्स) का सुदृढ़ीकरण कर आधुनिकतम तकनीक के बल पर सहकारी सामूहिक खेती को बढ़ावा देना है। सहकारी समितियों में कृषि औद्यानिकी, जड़ी-बूटी, सगंध पौध, होम स्टे एवं ई मंडी आदि के सम्यक विकास को शामिल किया गया है।

सहकारिता मंत्री ने आगे कहा कि परियोजना में सहकारी डेरी फार्म की स्थापना एवं दुग्ध समितियों के सदस्यों को दुधारू पशुओं के लिये राज्य सहायता एवं ऋण की व्यवस्था की गयी है। समिति सदस्यों को प्रदेशभर में 20 हजार दुधारू पशु उपलब्ध कराये जायेंगे तथा 5266 पशुपालकों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

परियोजना में राज्य के सीमांत व लघु कृषकों का विशेष ध्यान रखा गया है। इसके तहत भेड़ बकरी पालन को त्रिस्तरीय सहकारिता समिति के माध्यम से सुदृढ़ करके कृषकों की आय बढ़ायी जाएगी। खास बात यह कि भेड़-बकरियों से मिलने वाले उत्पादों की ब्राडिंग की जाएगी।

डॉ. रावत ने आगे कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मात्स्यिकी विकास को भी शामिल किया गया है। इस परियोजना के तहत सीमांत जिलों में ‘ट्राउट फार्मिंग परियोजना संचालित की जाएगी। ट्राउट फार्मिंग के विकास के लिये प्रदेश में आठ ट्राउट हैचरियों की स्थापना की जाएगी। परियोजना के क्रियान्वयन से प्रदेश में आधारभूत संरचना का विकास कर तीन से पांच वर्षों में 55 हजार प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है जबकि माना जा रहा है कि इससे प्रदेश के छह लाख लोग लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों की आय दुगनी करने के लिये प्रदेश में 1 अक्टूबर 2017 से दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना प्रारंभ की गयी है जिसके माध्यम से किसानों को दो प्रतिशत ब्याज पर एक लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसके माध्यम से अभी तक एक लाख 62 हजार 750 किसानों को ऋण उपलब्ध कराया गया है।

डॉ रावत ने कहा इस परियोजना के माध्यम से लघु एवं सीमांत तथा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सहकारी समिति के किसान एवं अकृषक सदस्यों को एवक लाख एवं स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक ब्याजरहित ऋण उपलब्ध करया जाएगा। इसके तहत कृषि से संबंधित समस्त सेक्टरों व कृषि आधारित पापड़, अचार, बुनाई-सिलाई-कढाई, डेरी, मुर्गी मधुमक्खी, मत्स्य पालन, पोलट्री, मशरूम उत्पादन समेत तमाम प्रयोजन शामिल हैं।

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