Loading... Please wait...

उप्र व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहने वाले एक मात्र राजनेता थे तिवारी

नई दिल्ली। देश में दो राज्यों के मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त करने वाले नारायण दत्त तिवारी ने न सिर्फ आजादी की लड़ाई बल्कि भारतीय राजनीति में भी अपनी विशिष्ट योगदान दिया और पहाड़ के एक साधाराण गांव से चलकर राष्ट्रीय राजनीति में शिखर तक पहुंचे। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे श्री तिवारी ने आंध्र प्रदेश के राज्यपाल,योजना के आयोग के उपाध्यक्ष तथा केंद्रीय मंत्री के रूप में अपना विशेष योगदान दिया था।

भारत छोड़ो आंदोलन में जेल जाने वाले श्री तिवारी ने छात्र नेता के रूप में अपना राजनीतिक कैरियर शुरू किया और कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी तथा कांग्रेस पार्टी में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। बाद उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर तिवारी कांग्रेस से अलग पार्टी बनायी और उसके अध्यक्ष रहे।

कांग्रेस संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी का निर्वाह करने वाले श्री तिवारी जीवन के आखरी समय में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। वह तीन बार उत्तर प्रदेश तथा एक बार नवगठित उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रहे। श्री तिवारी का जन्म 18 अक्टूबर 1925 में उत्तराखंड में नैनीताल जिले के बलूती गांव में पंडित पूर्णानंद तिवारी के घर पर हुआ था। श्री तिवारी वन विभाग में अधिकारी थे लेकिन महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने नौकरी छोड़ दी और आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। उनका पुत्र नारायण दत्त तिवारी भी अपने पिता से प्रभावित होकर बाद में आजादी की लड़ाई में कूद गए और भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1942 में उन्हें गिरफ्तार कर नैनीताल जेल भेज दिया गया। उनके पिता पूर्णानंद तिवारी पहले से ही इस जेल में बंद थे और दोनों 15 महीने की सजा काटने के बाद 1944 में रिहा किए गए।

उनकी आरंभिक शिक्षा हल्द्वानी, बरेली तथा नैनीताल में हुई। बाद में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यायल से राजनीति शास्त्र में उच्च शिक्षा हासिल की। श्री तिवारी अत्यंत प्रतिभाशाली छात्र थे और उन्होंने एमए की परीक्षा में विश्वविद्यालय में टॉप किया था। इसी विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल करने वाले श्री तिवारी 1947 में इसी विश्वविद्यालय में छात्र संगठन के अध्यक्ष चुने गए। छात्र राजनीति उनके सियासी जीवन की पहली सीढ़ी थी। श्री तिवारी का 1954 में डॉ. सुशीला सनवाल से विवाह हुआ था। डॉ. सुशीला तिवारी का 1993 में निधन हो गया था।

उत्तर प्रदेश की पहली विधानसभा में नैनीताल सीट से सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य रहे श्री तिवारी आजादी के तत्काल बाद कांग्रेस की लहर के बावजूद वह विधानसभा पहुंचे। प्रदेश विधानसभा के पहले चुनाव में 431 सदस्यों में से सोशलिस्ट पार्टी के 20 सदस्य थे। वह 1957 के चुनाव में भी राज्य विधानसभा के लिए चुने गए।

श्री तिवारी 1963 से कांग्रेस में शामिल हुए और 1965 में काशीपुर विधानसभा क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए और पहली बार मंत्रिपरिषद में शामिल किए गए। श्री तिवारी ने 1968 में जवाहरलाल नेहरू युवा केंद्र की स्थापना में अहम भूमिका निभायी थी।

जनवरी 1976 को श्री तिवारी पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने लेकिन 1977 के जयप्रकाश आंदोलन की वजह से 30 अप्रैल को उनकी सरकार को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद वह तीन अगस्त 1984 को दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और 1985 में एक बार फिर राज्य की कमान संभाली। वह तीसरी बार वह जून 1988 से दिसम्बर 1989 तक इस पद पर रहे।

श्री तिवारी 1980 में नैनीताल लोकसभा सीट से लोकसभा में पहुंचे। उन्होंने इस चुनाव में एक लाख से अधिक मतों के अंतर जीत हासिल की थी। वह केंद्र में कई मंत्रालयों में मंत्री रहे। वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश के विभाजन के बाद उत्तराखंड राज्य बनने पर 2002 से 2007 तक वहां की पहली निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री रहे। वर्ष 2007 में आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया लेकिन एक विवाद में घिरने पर उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा।

श्री तिवारी को श्री रोहित शेखर ने 2008 में अपना जैविक पिता बताकर सनसनी फैला दी और उन्हें न्यायालय की चौखट तक घसीट लिया। आखिर न्यायालय ने अपने फैसले में उन्हें रोहित शेखर का जैविक पिता घोषित किया। इसके बाद श्री तिवारी ने 2014 में श्रीमती उज्ज्वला से विवाह किया जो रोहित शेखर की मां हैं।

161 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2018 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech