मथुरा में प्रथम बकरा वीर्य प्रयोगशाला: पाठक

मथुरा। बकरी पालन को प्रोत्साहन करने के लिए केन्द्र सरकार की योजना के तहत उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित दीनदयाल उपाध्याय वेटेरिनरी विश्वविद्यालय में बकरों के वीर्य की राज्य में प्रथम प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से बकरियों की नश्ल सुधार भी किया जाएगा।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 के एम एल पाठक ने रविवार को यहां बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत बकरी पालन को प्रोत्साहन करने के लिए केन्द्र सरकार की इस योजना के लिए 22 करोड़ की धनराशि प्रदेश सरकार के माध्यम से विश्वविद्यालय को दी गई है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा इसके लिए आवश्यक उपकरण भी मिले हैं। उन्होंने बताया कि इस धनराशि से बकरियों के शेड़ आदि के साथ एक काम्प्लेक्स बनाया जा रहा है तथा बकरी के दूध की प्रोसेसिंग लैब बनकर तैयार हो गई है। इसके तहत पशुपालन के क्षेत्र में काम कर रही एनजीओ बैफ से विश्वविद्यालय का अनुबंध भी हो गया है। यह संस्था गांवों में जाकर बकरियों का कृत्रिम गर्भाधान भी करेगी तथा बकरे का जितना वीर्य लेगी उसका पैसा भी देगी। कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से बकरियों की नश्ल सुधार भी किया जाएगा। मांग होने पर यहां से अन्य जिलों केा भी वीर्य भेजा जाएगा। इसके लिए बहुत अच्छी नश्ल के बकरे मगां लिये गए हैं।

श्री पाठक ने बताया कि इस योजना के तहत पहला बकरी फार्म विश्वविद्यालय में बनाया गया है जहां पर बकरी के दूध को बढ़ाने का प्रयास होगा, क्योंकि बकरी का दूध बहुत अधिक पौष्टिक होता है तथा जब डेंगू और चिकनगुनिया बीमारियों का सीजन आता है तब यह 2000 रूपए प्रति लीटर तक बिकता है। उन्होंने बताया कि इसकी मार्केटिंग के लिए प्रादेशिक कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन से विश्वविद्यालय का अनुबंध हो चुका है। इस योजना के तहत ब्रज क्षेत्र एवं बुन्देलखण्ड को पहले लिया जाएगा तथा विश्वविद्यालय बकरी पालन और उसके दूध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए महिला किसानों को लगातार प्रशिक्षित करेगा। इस प्रकार से यह येाजना महिला सशक्तीकरण में मील का पत्थर साबित होगी।

श्री पाठक ने बताया कि महिला सशक्तीकरण एवं किसान की आय दोगुनी करने की दिशा में जहां गांव की महिलाओं को बकरी पालन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा वहीं कृत्रिम गर्भाधान से बकरी की नश्ल को सुधारा जाएगा, जिससे महिलाओं को बकरी का अधिकतम दूध मिल सके। इसके साथ ही महिलाओं को मजरेला चीज बनाने की तरकीब भी बताई जाएगी जिससे उन्हें बकरी पालन से अधिक आर्थिक लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि अधिक स्वादिष्ट और विटामिनयुक्त होने के कारण मजरेला चीज़ का बाजार भाव 2500 रूपए प्रति किलो है तथा एक किलो बकरी के दूध में 200 से 250 ग्राम तक मजरेला चीज प्राप्त किया जा सकता है। इसकी होटलों तथा विदेशी नागरिकों द्वारा बहुत अधिक मांग की जाती है।

उनका कहना था कि मजरेला चीज भैंस के दूध से भी बनाया जा सकता है लेकिन बकरी के दूध से बने मजरेला चीज की मांग अधिक होती है। उन्होंने बताया कि महिला किसानों से कहा जाएगा कि वे डेंगू आदि के मौसम में ही केवल दूध बेंचे तथा शेष वर्ष में मजरेला चीज बनाकर बेंचे। उन्होंने बताया कि अब नई तकनीक के तहत बकरी को चरने के लिए बाहर ले जाने की जरूरत नही है तथा बकरी को भी गाय भैंस की तरह खूंटे से बांधकर रख सकते हैं।

प्रो0 पाठक के अनुसार यह योजना जब लोगों को लाभदायक दिखने लगेगी तो युवाओं के लिए यह रोजगार का साधन भी बनेगी क्योंकि उद्यमी (इन्टरप्रेन्योर) इस क्षेत्र में आएंगे और वे बकरी का अपना फार्म बनाएंगे तथा मांग के अनुरूप बकरी का दूध और मजरेला बेंचकर लाभ कमाएंगे। बकरी को एटीएम बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे किसी समय मीट , दूध या मनी प्राप्त किया जा सकता है तथा इससे कोई धार्मिक प्रतिबद्धता भी नहीं जुड़ी है।

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