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उद्धव ने ठोकी आखिरी कील!

उद्धव ठाकरे 2019 में महानायक होंगे। उन्होंने 2018 के खत्म होते-होते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ले कर जो बात कही है वह 2019 में मोदी सरकार का अंत है। इसलिए क्योंकि अपने को संभव नहीं लगता कि चौकीदार चोर है की बात पर उद्धव ठाकरे नरेंद्र मोदी से माफी मांगे। अब यदि उन्होंने माफी नहीं मांगी तब बावजूद इसके क्या नरेंद्र मोदी उनसे चुनावी एलायंस करेगें? जब राहुल गांधी की तर्ज पर जनसभा में उद्धव ठाकरे कह चुके है कि ‘अब दिन बदल गए हैं। चौकीदार ही चोर बन गए हैं।’ तो भाजपा को जवाब तो देना होगा। गले में बांहे डालकर क्या अमित शाह एलायंस करेंगे? महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ऐलान कर चुके हैं कि समय का इंतजार कीजिए, उचित जवाब दिया जाएगा।

भाजपा का जवाब या तो सरेंडर करके उद्धव ठाकरे को पटाने का होगा या औकात दिखाते हुए अकेले चुनाव लड़ने का है। शिवसेना और महाराष्ट्र की राजनीति के जानकारों का कहना है कि उद्धव ठाकरे का पहला मकसद है लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को हरवाना। फिर भले शिवसेना एक सीट न जीते। भला क्यों ऐसा मकसद है? इसलिए कि लोकसभा चुनावों में भाजपा हारी तो मोदी-शाह के बाद की भाजपा पूरी तरह महाराष्ट्र में शिवसेना पर निर्भर होगी। उद्धव ठाकरे पूरे देश में मोदी-शाह की विरोधी ताकतों, भाजपा-संघ के भीतर के भी लोगों के महानायक माने जाएंगे। लोकसभा के बाद विधानसभा चुनाव होने है। उद्धव ठाकरे और शिवसेना तब नंबर एक स्थिति में होंगे!

मगर अपना मानना है कि यह तब संभव है जब एनसीपी  के शरद पवार और कांग्रेस के राहुल गांधी इस दिशा में कुछ राजनीति करे। लोकसभा की 48 सीटों में भाजपा को बरबाद करने की कीमत के रूप में एनसीपी-कांग्रेस एलायंस चुपचाप अगली प्रदेश सरकार के लिए उद्धव ठाकरे की सरकार बनवा दे। यह मुश्किल नहीं है। राहुल गांधी और शरद पवार दोनों को लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र की राजनीति करनी है। लोकसभा की 48 सीटों पर यदि उद्धव ठाकरे मोदी-शाह को हराने का रोल अदा करते हैं तो विधानसभा चुनाव में एनसीपी भी शिवसेना को वायदा कर सकती है। 

मोटे तौर पर पूरा मामला इस बात पर टिका है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को सभी 48 सीटों पर हराने के लिए शरद पवार, राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे, मनसे के राज ठाकरे कितना गहरा निश्चय किए हुए है। अपना मानना है कि उद्धव ठाकरे ने ‘चौकीदार ही चोर बन गये हैं।’ का जुमला बोल बता दिया है कि वे किसी सूरत में नरेंद्र मोदी की बतौर प्रधानमंत्री वापसी नहीं चाहते हैं। इसके लिए वे कुछ भी करंेगे! 

जब ऐसा है तो शरद पवार, राहुल गांधी, अशोक चव्हाण उनसे गुपचुप तालमेल क्यों नहीं बनाएंगे? उद्धव ठाकरे, शिवसेना, उसका अखबार सामना ने जितनी आलोचना नरेंद्र मोदी की पिछले चार वर्षों में की है उतनी तो राहुल गांधी और उनके नेशनल हैराल्ड अखबार ने नहीं की है। इसलिए उद्धव ठाकरे का स्टेंड दो टूक है। वे मोदी-शाह के हाथों हुए अपमान, विधानसभा चुनाव में धोखे को नहीं भूल सकते हैं। सत्ता की साझेदारी में हुई जलालत से बुरी तरह घायल हुए पड़े हैं।

मतलब उद्धव ठाकरे अब गिड़गिड़ाते हुए, मॉफी मांगते हुए नरेंद्र मोदी-अमित शाह से लोकसभा के एलायंस में सीटों की सौदेबाजी नहीं करेगें। उलटे मोदी और अमित शाह को मुंबई जा कर उनके आगे सरेंडर हो कर उन्हें मनाना होगा। यह कोशिश जितनी होगी प्रदेश में हवा बनेगी कि भाजपा हार रही है तभी ठाकरे के घर जा कर उनके पांव पड़े और एलायंस बनाया। 

हां, मोदी-शाह पिछले सप्ताह जिस अंदाज में चिराग पासवान के आगे गिड़गिड़ाएं, उनके टीवी पर महज दो इंटरव्यू ने अमित शाह की नींद उड़ाई और ताबड़तोड़ बिहार में अपनी जीती 23 सीटों को घटा कर 17 सीट पर चुनाव लड़ने की सहमति दी, रामविलास पासवान को असम से राज्यसभा में लाने की जैसे घोषणा की उससे जाहिर है मोदी-शाह अंततः मुंबई जा कर उद्धव ठाकरे के आगे गिड़गिड़ाएं। सवाल है अमित शाह इस साल पहले भी मुंबई में ठाकरे के घर जा कर गिड़गिड़ा चुके हैं। उससे कुछ फर्क नहीं पड़ा तो अब तो तीन प्रदेशों में कांग्रेस से हारने, चुनाव में भाजपा की दो सौ कम सीटे रहने के अनुमान की हवा में उद्धव ठाकरे क्यों सुनेंगे? विधानसभा चुनाव के नतीजों ने भी ठाकरे को चौकीदार चोर बोलने को प्रेरित किया होगा। 

उद्धव ठाकरे के बयान के बाद फडणवीस की टिप्पणी आई तो संघ समर्थित मराठी अखबार 'तरुण भारत' ने पूछा कि तब शिवसेना सरकार से क्यों नहीं बाहर हो जाती है? अपनी जगह यह ठाकरे को घेरने वाली बात है लेकिन असल सवाल तो यह है कि उद्धव ठाकरे ने चौकीदार चोर बोला और नरेंद्र मोदी, भाजपा बरदास्त करने को मजबूर है। यदि शिवसेना भी कांग्रेस-राहुल गांधी की तरह नरेंद्र मोदी को बदनाम कर रही है तो उससे मोदी-शाह को एलायंस तोड़ना चाहिए या रखना चाहिए? ज्यादा अपमानजनक, बदनामी वाली स्थिति मोदी-शाह की है या उद्धव ठाकरे की?  

पर सवाल लोकसभा की 48 सीटों का है। अभी इनमें से 41 सीटों को भाजपा-शिवसेना ने जीता हुआ है। इसमें भाजपा की 26 सीटे है। सो तय माने कि मोदी, शाह या देवेंद्र फडनवीस कतई उद्धव ठाकरे को कोई जवाब नहीं दे सकते है। उद्धव ठाकरे ही जवाब देगें। उन्ही के पास चाभी है और वे फिलहाल इस मत के है कि कुछ भी हो जाए 2019 के लोकसभा चुनाव से नरेंद्र मोदी की सरकार नहीं बनने देनी है। तभी सोलापुर जिले में पढ़रपुर की रैली में चौकीदार चोर का बयान 2019 के चुनाव की निर्णायक कील है। 

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