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कांग्रेस तब पगला जाएगी!

और राहुल गांधी गलतियां करेगें। नतीजतन नरेंद्र मोदी के लिए मई 2019 में लोकसभा की 200 सीटे जीत सकना संभव होगा! हां, मैं भारी बात लिख दे रहा हूं लेकिन दीवाल पर लिखा दिख रहा है कि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस जीती तो फूल कर ऐसी कुप्पा होगी कि लोकसभा चुनाव की चिंता किए बना राहुल गांधी प्रदेशों में ऐसी सरकारे बनवाएंगे जिनकी जनसंवाद, जनसंपर्क और जातियों में पैंठ जीरो होगी। ऐसा हुआ तो पांच महीने बाद राजस्थान, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़, गुजरात चारों राज्यों में मोदी मजे से साठ प्रतिशत लोकसभा सीटे ले उड़ेगे। मैं पहले भी लिख चुका हूं कि अपने लिए मौजूदा विधानसभा चुनावों का मतलब 2019 के लोकसभा चुनाव के खातिर अधिक है। इन चुनावों में जनता में भाजपा के खिलाफ माहौल होने के बावजूद राहुल गांधी ने, कांग्रेस ने जो गलतियां की है वह इस अति आत्मविश्वास से थी कि जब हम जीत रहे है तो पठ्ठों को टिकट दो। टिकट बेचों। खर्च मत करों। और एक-दूसरे को हराओं! 

हां, कांग्रेस का चुनाव प्रबंधन बहुत खराब है। बावजूद इसके छतीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना चारों राज्यों में यदि कांग्रेस जीती तो राहुल गांधी, उनके नौजवान पठ्ठे और पुराने घाघ कांग्रेसी सब पगला जाएगें। होश खो बैठेगे। अपनी हवा, अपना राज आया मान ऐंठ में होंगे। तब उत्तर प्रदेश, दिल्ली, झारखंड, बिहार में एलायंस होना मुश्किल होगा। राहुल गांधी और कांग्रेसियों को यह तर्क तब नहीं जंचेगा कि दिल्ली में आप पार्टी से एलायंस होना चाहिए या झारखंड में जेएमएम की प्रमुखता में एलायंस हो। बतौर बानगी झारखंड में अभी हो रहे उपचुनाव पर गौर करे। उपचुनाव में जेएमएम ने इनोस इक्का की पार्टी के लिए सीट छोड़ी। मगर कांग्रेस ने इसकी जरूरत समझने के बजाय जेवीएम- राजद के साथ मिलकर अपना अलग उम्मीदवार उतारा। मतलब जेएमएम की बजाय कांग्रेस अपनी धुरी पर खेल रही है। जान ले यदि झारखंड में लोकसभा चुनाव तिकोना हुआ तो 14 सीटों में से फिर मोदी-शाह मजे से 8 से 10 सीटे जीतेगे। 

तभी अपनी सोच है कि कांग्रेस का दिमाग न फिरे, वह जमीन पर रहे इसके लिए जरूरी है कि कांग्रेस अभी एक-दो राज्यों में हारे। कांग्रेस की हवा पंचर हो। मगर दूसरी तरफ लग रहा है कि चारों राज्यों में मोदी सरकार की नोटबंदी-जीएसटी, किसान-नौजवानों पर आर्थिक मार और मौजूदा प्रदेश सरकारों-सत्तारूढ विधायकों के खिलाफ एंटी इनकंबेसी के चलते भारी अंडर-करंट है। हैरानी की बात है जो तेलंगाना जैसे प्रदेश में भी मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव और उनकी टीआरएस पार्टी ऐन मतदान से पहले उखड़ती बतलाई जा रही है। कांग्रेस-तेलूग देशम के एलायंस का जलवा बना है। मिजोरम की राजनीति अलग और क्षेत्रिय है। 

सो पांच राज्यों में से यदि सभी में भाजपा हारे और चार में कांग्रेस जीते तो कल्पना करें कि कांग्रेस कितनी पगलाएगी। राहुल गांधी अपने आपको नरेंद्र मोदी से अधिक लोकप्रिय मानने लगेगें। कांग्रेस का बाकि विपक्षी दलों के प्रति व्यवहार बदलेगा। मायावती और अखिलेश यादव कांग्रेस से चिढ़ेगे। भाजपा और संघ परिवार के खिलाफ सेकुलरवाद उठ खड़ा होगा। भाजपा की अयोध्या राजनीति के खिलाफ दिग्विजयसिंह से ले कर कन्हैया सब ऐसे–ऐसे बोल बोलेगे कि नरेंद्र मोदी को जीताने के लिए मन ही मन हिंदू इरादा बना लेगा।  

हां, अपने राजनैतिक हिसाब-किताब में नरेंद्र मोदी फिलहाल 180 सीट से नीचे है। इसकी मुख्य वजह गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़, दिल्ली, हिमाचलप्रदेश, उत्तराखंड की 101 सीटों का वह मुकाबला है जिसमें भाजपा बनाम कांग्रेस की टक्कर एकदम आमने-सामने की है। इनमें से 2014 में 98 सीटे नरेंद्र मोदी ने अपने जादू से जीती थी। यदि 11 दिसंबर को कांग्रेस की आंधी आती है और राहुल गांधी इन राज्यों में जन आधार- जनसंपर्क- विन्रम मुख्यमंत्री बना संगठन को तुरंत चुनावी चुनौती में झौंकते है तो मोदी कम से कम पचास सीटे गंवा बैठेगें। लेकिन उलटा भी हो सकता है।

इसलिए क्योंकि कांग्रेस चुनाव जीतते ही पगला जाएगी। पठ्ठों को मुख्यमंत्री बना कर नरेंद्र मोदी-अमित शाह को राहुल गांधी फिर हवा बनाने का मौका देगें। बतौर मिसाल गुजरात की स्थिति पर गौर करें। 2017 में वहा जनता ने राहुल गांधी को नेता बनाया। कांग्रेस को अच्छी सीटे दी लेकिन तब से अब तक कांग्रेस ने, राहुल गांधी ने, अहमद पटेल ने वहां कांग्रेस को लावारिश छोड़ा हुआ है। न नेतृत्व उभारा, न मुखर पटेलों को कमान दी, न लोकसभा उम्मीदवार चिंहित कर तैयारियां शुरू कराई। तभी पांच महीने बाद गुजरात में जब लोकसभा चुनाव होंगे तो मोदी-शाह 26 में से वापिस मजे से 20-22 सीटे जीत सकेंगे। 

ऐसा ही राजस्थान, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़ में कांग्रेस के चुनाव जीतने के बाद होना है। कांग्रेस को पांच महीने बाद सबसे बड़ा सदमा इन्हीं तीन राज्यों में लगना है। आप कह सकते है कि मेरी दीवाल ऐसा कैसे बता रही है? विधानसभा में जीत कर भी पांच महीने बाद लोकसभा चुनाव में हारना भला कैसे तर्कंसगत? तो पहली बात जान ले कि कांग्रेस को जनता जीता रही है। मतलब कांग्रेस न तो अपने संगठन और न अपने नेता राहुल गांधी की लोकप्रियता से जीत रही है। दूसरे नरेंद्र मोदी की दिल्ली के लिए बतौर प्रधानमंत्री जरूरत आम हिंदू में अभी कायम है। यदि राजस्थान में कांग्रेस अभी 200 में से 120 सीटे जीते तब भी लोकसभा चुनाव में मोदी का जादू इसी प्रदेश में 25 में से 20 सीटे फिर भाजपा की बनवा देगा। 

आप नहीं मानते? न माने। लेकिन इतना नोट करके रखें कि राहुल गांधी चुनाव जीतने के बाद तीनों प्रदेशों में ऐसे मुख्यमंत्री बनवाएंगें जो जनता से, प्रदेश मुख्य जातियों से, मीडिया से, जनसंपर्क से कटे अंहकारी होगे। 

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