परिवार, भ्रष्टाचार और प्रचार का सहारा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 95 मिनट के इंटरव्यू और उसके बाद पंजाब से लेकर असम और मणिपुर में दिए उनके भाषण और लोकसभा में राफेल पर अरुण जेटली व निर्मला सीतारमण के भाषण का लब्बोलुआब यह है कि विपक्ष की ओर से कोई भी बता कही जाए तो सोनिया और राहुल गांधी के परिवार को बीच में लाना है। चाहे इसके लिए जमीन के कितने भी नीचे गड़े मुर्दे क्यों न उखाड़ने पड़े। तभी राहुल गांधी ने एक अनिल अंबानी का नाम लिया तो भाजपा की ओर से कब के गुजर गए ओटावियो क्वात्रोच्चि से लेकर भारत की जेल में बंद क्रिश्चियन मिशेल तक का नाम लिया गया। राहुल ने एक अनिल अंबानी का नाम लिया तो भाजपा के सांसदों ने रॉबर्ट वाड्रा से लेकर संजय भंडारी और सुरेश मनचंदानी जैसे पता नहीं कितने लोगों का नाम ले डाला। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अपनी सभाओं में क्वात्रोच्चि को राहुल गांधी का मामा और मिशेल को उनका अंकल बता कर तंज कर रहे हैं। उन्होंने असम की अपनी सभा में शुक्रवार को कहा कि जब से विदेश से राजदार पकड़ कर आया है, तब से नामदार के आंखों की नींद उड़ गई है और चेहरा उदास हो गया है। जाहिर है सरकार और भाजपा की रणनीति भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब भ्रष्टाचार के आरोपों से देने की है। उसको तमाम प्रचार माध्यमों से लोगों तक यह बात पहुंचानी है कि परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। 

संसद से लेकर संसद के बाहर तक प्रधानंमत्री मोदी और उनके मंत्री नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर सोनिया और राहुल गांधी को निशाना बना रहे हैं। मोदी ने यह लाइन तय की, जिसे भाजपा का हर नेता दोहरा रहा है कि सोनिया और राहुल जमानत पर छूटे हैं। सवाल है कि क्या किसी मामले में आरोप लगना दोषी होने का सबूत होता है? और जमानत पर छूटा हुआ हर व्यक्ति दोषी होता है? अगर ऐसा है तो खुद मोदी और अमित शाह पर आरोप लगे थे। दूसरे अनगिनत नेता, कारोबारी हैं, जिनके ऊपर किसी न किसी तरह के आरोप लगे हैं और वे जमानत पर हैं। 

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 95 मिनट के इंटरव्यू में कहा कि मां बेटे जमानत पर हैं और पूर्व वित्त मंत्री फाइल लेकर अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका इशारा पी चिदंबरम की ओर था, जो एयरसेल मैक्सिस और आईएनएक्स मीडिया के मामले में राहत हासिल करने के लिए अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं। चाहे प्रधानमंत्री का इंटरव्यू हो या उनका भाषण हो या लोकसभा में राफेल पर हुई बहस में भाजपा नेताओं के भाषण हो, सबसे एक ही बात निकलती है और वह है कि परिवार को भ्रष्टाचार के आरोप में कठघरे में खड़ा करना और उसका प्रचार करना। अगले तीन महीने में भाजपा की ओर से यह नैरेटिव सेट किया जाना है कि कांग्रेस का नंबर एक परिवार भ्रष्ट है और चूंकि विपक्षी महागठबंधन की कमान उसी परिवार के हाथ में रहनी है इसलिए लोगों को उनकी बजाय मोदी को चुनना चाहिए। 

यह मोदी बनाम कौन के नैरेटिव का ही हिस्सा है। मोदी बनाम कौन की बहस में स्वाभाविक रूप से राहुल गांधी का नाम आ रहा है। कई प्रादेशिक क्षत्रप खुल कर कह रहे हैं और कई लोग मन ही मन ऐसा मान रहे हैं कि राहुल गांधी ही महागठबंधन के नेता होंगे। भले चुनाव से पहले उनके नाम की घोषणा न हो पर भाजपा ने यह विमर्श शुरू करा दिया है कि मोदी बनाम राहुल का मुकाबला है। या मोदी बनाम परिवार का मुकाबला है। इस मुकाबले में परिवार को भ्रष्ट साबित करना प्रचार की मुख्य थीम होने वाली है। 

तभी कांग्रेस नेताओं को यह अंदेशा है कि अगले कुछ दिन में केंद्रीय एजेंसियां कोई सख्त कार्रवाई कर सकती हैं। सीबीआई और ईडी दोनों ने आरोप लगाया है कि पी चिदंबरम पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं। दोनों ने हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की अपील की है। अगर यह अपील मंजूर हुई तो चिदंबरम को हिरासत में लिया जा सकता है। रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ भी कार्रवाई का अंदेशा जताया जा रहा है और अगस्त वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे के कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के बयानों के आधार पर सोनिया गांधी को भी पूछताछ के लिए समन जारी किया जा सकता है। 

यह सही है कि सरकार ने भ्रष्टाचार के लड़ने के लिए कोई सांस्थायिक उपाय नहीं किया। पांच साल पूरे होने को हैं और किसी न किसी बहाने से लोकपाल की नियुक्ति यह सरकार टालती रही है। विदेश में जमा काला धन लाने का वादा कब का भुलाया जा चुका है। पर चुनाव में भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाना है तो सोनिया और राहुल गांधी के परिवार को निशाना बनाया जाएगा। राफेल सौदे में सुप्रीम कोर्ट ने एक तरफ से नरेंद्र मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी है, जिसका इस्तेमाल खूब जम कर प्रचार में होगा।

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