300 छोड़ो तीस आतंकी मुंडियां नहीं!

हिंदू को कितना मूर्ख, जाहिर, काहिल, अंधा बनाएंगे?  दुनिया के पैमाने वाली कितनी शर्मनाक बात है कि हम दबाव बना रहे थे हफीज सईद, मसूद अजहर को लाने का लेकिन भक्त ढोल पीट रहे हैं कि अभिनंदन को छुड़ा लाए! देखों नरेंद्र मोदी की धाक जो अभिनंदन सकुशल घर लौट आया!  कोई माने या न माने लेकिन वैश्विक स्तर पर आज भारत की जग हंसाई है। अपने घर में इमरान खान 56 इंची छाती वाला हीरो बना है तो दुनिया के नेताओं में, डिप्लोमेसी में वह शांतिदूत माना जा रहा है। नरेंद्र मोदी और भारत की डिप्लोमेसी को न केवल डोनाल्ड ट्रंप के आगे गिड़गिड़ाना पड़ा बल्कि सऊदी अरब के शेख प्रिंस सहित कईयों से विंग कमांडर अभिनंदन को छुड़वाने की मिन्नत करनी पड़ी। डोनाल्ड ट्रंप इतने बेशर्म निकले कि वैश्विक प्रेस कांफ्रेस से दुनिया को बताया कि वे कोशिश कर रहे हंै और जल्द अच्छी खबर मिलेगी। 

उस खबर को इमरान खान ने अपनी संसद में शांति के पैगाम की नौटंकी से दुनिया को बताया। बुधवार को पाकिस्तान में इमरान खान की 56 इंची छाती, वायुसेना के भारत पर हमले, भारत के विमान के गिरने, भारतीय पायलट की नुमाइश से कई बार तालियां बजी तो गुरुवार को उन्होंने पाकिस्तानी संसद में भारत को शांति की नसीहत देते हुए अहसान जताया कि देखों हम अभिनंदन को दे रहे हैं। 

इस सब मूर्खता के साथ हम हिंदू जश्न मना रहे हैं!  जरा दिल, दिमाग में अक्ल का इस्तेमाल कर सोचंे कि हमने पाकिस्तान को सबक िसखाया या दुनिया हमें पाकिस्तान से शांति का सबक लेते हुए देख रही है?  दुनिया को हमारे लिए हफीज सईद, मसूद अजहर को सुपुर्द कराने का दबाव बनाना था या अभिनंदन को लौटाने का? डोनाल्ड ट्रंप को आंतकी, हत्यारे भारत को दिलवाने थे या अभिनंदन को?  बालाकोट में आंतकियों की बिछी लाशों के फोटों दुनिया के वैश्विक चैनलों-अखबारों में छपने चाहिए थे या अभिनंदन का फोटो छपना था? ( हां, भारत में भले झूठे टीवी चैनलों ने 300-250 आंतकियों के मारे जाने की खबरे दी तो सोशल मीडिया में 700 आतंकियों के मारे जाने के फर्जी पोस्ट, फर्जी तस्वीरें चलाई जबिक वैश्विक मीडिया ने इस सबकों फर्जी माना।)

हां, जान ले दुनिया के किसी अखबार, टीवी चैनल में पाकिस्तान के बालाकोट का एक ऐसा फोटों नहीं छपा है जिसमें मारे गए आतंकियों की लाशे या मुंडिया नजर आई हो। उलटे दुनिया के हर नामी अखबार (न्यूयार्क टाइम्स, बीबीसी से लेकर वाशिंगटन पोस्ट, डेली टेलिग्राफ, गार्जियन, रायटर एजेंसी) ने रिपोर्टर भेज कर, बालाकोट में बात करके दुनिया को बताया कि आंतकियों को भारी नुकसान जैसी कोई बात नहीं है। 

हां, मैं पाकिस्तानी मीडिया या पाकिस्तान की बात नहीं कर रहा हूं। वैश्विक मीडिया के पहले पेज, मुख्य खबरों के तौर पर छपी रपटों को देख तलाश करके 300-350 आंतकियों को मार देने की भारत में चली झूठी खबरों की हकीकत बता रहा हूं। इस बात को भी नोट करके रखें कि भारत के विदेश सचिव ने खुद अपने बयान में प्रामाणिक तौर पर कोई आंकड़ा नहीं दिया कि पुलवामा में मरे 40 जवानों की मौत का बदला 40 या 300 आतंकियों को मार कर ले लिया गया है। ले दे कर भारत सरकार, भारत के विदेश सचिव ने इस गोलमाल वाक्य में बात कहीं है कि वायुसेना के हमले में ढेरों आतंकी मारे गए होंगे। 

पर न पाकिस्तान में कोई रोता मिला, न बीबीसी, रायटर के संवाददाताओं को लाशे बिछी मिली! जबकि मोदी सरकार के प्रायोजित टीवी चैनलों ने तबाही व लाशों का मतलब 40 शहीदों के बदले में 400 आतंकियों के सिर काट लेने का हल्ला कर मूर्ख हिंदुओं में जश्न के पटाखे फूड़वा दिए थे।  

क्या कही बतौर प्रमाण एक आतंकी के कटे हुए सिर या लाशों के परखचे वाली विश्वसनीय फोटो दिखलाई दी? (झूठ में जो फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुए है वे कैसे फर्जी, झूठे है इसकी बीबीसी की रिपोर्ट कल इस अखबार में छपी थी। उसका लिंक है- https://www.bbc.com/hindi/india-47401130

ऐसे ही न पाकिस्तान में रोने-स्यापे, बदले की बात वाली एक आवाज सुनाई दी। तब हम हिंदुओं ने बुधवार को किस बात का जश्न मनाया, क्यों पटाखें फोड़े? क्यों नरेंद्र मोदी ने चुरू की जनसभा में हुंकारा मारा- मैं देश को मिटने नहीं दूंगा? इसके साथ यह भी तो बताएं कि मैंने पुलवामा के बदलें इतने आतंकियों की लाशे बिछवा दी है। पाकिस्तान को मार कर, उस पर दबाव बना कर इतनी मुंडियां, या इतने आतंकी ले आए हंै। क्या कहीं कोई ऐसी बात सुनाई दी?  

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