Loading... Please wait...

पवार, माया को क्या हुआ?

मामूली बात नहीं जो तारिक अनवर ने शरद पवार का साथ छोड़ा। सांसदी से इस्तीफा दिया। इसका अर्थ है कि शरद पवार उत्तर भारत के अपने एकलौते वफादार नेता को नहीं समझा पाए कि उन्होंने राफेल के मामले में कांग्रेस और राहुल गांधी के सुर में सुर मिला कर नरेंद्र मोदी को भ्रष्ट क्यों नहीं कहा? क्या शरद पवार की निगाह में नरेंद्र मोदी और अमित शाह सचमुच ईमानदार है? उधर दूसरा सवाल है कि जैसे शरद पवार, उनकी पार्टी एनसीपी ने राफेल का मुद्दा नहीं उठाया वैसे विपक्ष की बाकि पार्टियों ने भी क्यों नहीं उठाया? अखिलेश यादव, मायावती, चंद्रबाबू नायडू, स्टालिन, तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी आदि क्यों नहीं राफेल को चुनावी मुद्दा बनाने की जिद्द किए हुए हैं? 

जवाब कई है। पहली बात शरद पवार मुंबई के उद्योगपतियों, कारोबारियों की सर्वाधिक खबर रखने वाले नेता है। इसलिए उन्हें अंबानी, अदानी सहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के किस्सों की भरपूर खबर होगी। मगर वे, उनके खास प्रफुल्ल पटेल, उनके भतीजे अजित पंवार आदि को ले कर मोदी- फड़नवीस सरकार ने जो दबिस चार सालों में बनाई है तो वे और उनकी पार्टी दमदारी के साथ राफेल व भ्रष्टाचार के मसले पर नैतिक तौर पर स्टेंड नहीं ले सकती है। 

बावजूद इसके यह भी तथ्य है कि शरद पवार जितने नरेंद्र मोदी से घायल है तो वे मोदी-शाह-फड़नवीस से बदला लेने के लिए लोकसभा चुनाव के वक्त जितनी शिद्दत से काम करेगे उसका महाराष्ट्र में सभी जानकार अनुमान लगाए हुए हैं। और यह भी नोट करके रखंे कि वे आम चुनाव के बाद विपक्ष की सरकार बनवाने की धुरी होगे। 

हां, यह अपने आप में विचारणीय बात है कि विपक्ष के जितने वरिष्ठ नेता है, क्षत्रप है वे क्यों नहीं राफेल पर बोले है? मुझे ध्यान नहीं पड़ता की सोनिया गांधी ने राफेल पर कुछ बोला हो। सोनिया गांधी, फारूख अब्दुला, शरद पवार, शरद यादव, चंद्रबाबू नायडू, स्तालिन, ममता बनर्जी की जो वरिष्ठ जमात है वह अनौपचारिक तौर पर आपस में कार्डिनेशन रखे हुए हंै। ये सब नरेंद्र मोदी से आमने-सामने में राहुल गांधी के लिए मैदान छोड़े हुए हैं। तथ्य है कि शरद पवार और राहुल गांधी में मेल-मुलाकात और केमेस्ट्री बनी हुई है। वे एक तरह से राहुल गांधी के अनौपचारिक मार्गदर्शक है। उस नाते उन्होंने राहुल गांधी को कतई नहीं कहा होगा कि वे क्यों राफेल व नरेंद्र मोदी से सीधे टकराव मोल ले रहे हैं? 

सो इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि विपक्षी नेता जानबूझ कर प्रधानमंत्री राफेल और भ्रष्टाचार के मुद्दे राहुल गांधी पर छोड़े हुए है। मोदी-शाह के लिए यह एक जाल है। सोचे, आखिर पिछले छह महिने में क्या हुआ? मोदी-शाह और भाजपा ने अनजाने में राहुल गांधी का ग्राफ बढ़ा दिया। राहुल गांधी की इमेज हिम्मती, मोदी जैसे 56 इंची छाती वाले नेता से आर-पार की लड़ाई वाले नेता की बन गई है। यह बात ध्यान रहे है कि देश के जितने अमीर, एलिट याकि नई –पुरानी रूलिंग क्लास में नरेंद्र मोदी-अमित शाह- अरूण जेटली आज कई तरह से एक्सपोज है। छह महीने पहले तक इस जमात में इस बात पर निराशा थी कि नरेंद्र मोदी के आगे बोलने वाला नेता कौन है?  वह पूरी जमात अब चुपचाप राहुल गांधी के पीछे आ गई है। यह कांग्रेस और राहुल गांधी का रिवाइवल है। 

फिर कांग्रेस में भी आगे कौन है? केवल और केवल राहुल गांधी और उनके प्रवक्ता। इससे अपने आप तमाम पुराने नेताओं मसलन अहमद पटेल, दिग्विजयसिंह, पी. चिदंबरम, भूपिंदर सिंह हुड्डा, अशोक चव्हाण आदि से ध्यान हट गया है। उस नाते स्थिति ऐसी बन गई है कि मोदी-शाह यदि प्रफुल्ट पटेल, हुड्डा, अजित पवार, राबर्ट वाड्रा, अभिषेक बनर्जी, मायावती या अखिलेश यादव के खिलाफ कोई कार्रवाई कर विपक्ष के खिलाफ भ्रष्टाचार को हल्ला बना उन्हें घेरे तब भी राहुल गांधी का राफेल को ले कर हल्ला जनता के दिल-दिमाग में कुनबुनाता रहेगा। 

तभी अपनी थीसिस है कि राहुल गांधी को मोदी-शाह ने नेता बना दिया है। आज से तीन साल पहले कहां पप्पू के हल्ले  में जन सर्वेक्षणों में राहुल गांधी की 10-15 प्रतिशत की रैटिग हुआ करती थी और अब पच्चीस-तीस प्रतिशत के आसपास राहुल गांधी लोकप्रिय है। नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के आगे खड़े होते आंकडे आने लगे है तो यह राहुल गांधी के हल्ला बोल, उनके शोर और भाजपा द्वारा उस शौर को दिन-प्रतिदिन अपनी गालियों से प्रचारित करने से है। मोदी-शाह-भाजपा इस बात को नहीं समझ रहे है कि जो कुछ हो रहा है वह नरेंद्र मोदी के ग्राफ के आंकड़ों का टूट कर राहुल गांधी की तरफ खिसकना  है। इस सप्ताह का ताजा प्रमाण बुधवार-गुरुवार को मध्यप्रदेश के विन्ध्य याकि सतना-रीवा में राहुल गांधी के शो में भीड थी। कांग्रेसी नेता भी इस बात से आश्चर्य में थे कि टिकार्टियों के मोबलाइजेशन के बावजूद लोग इतने आए, मन से आए और कौतुक के साथ लगातार उत्साह में रहे। 

सो अपना मानना है कि शरद पवार की सहमति से ही तारिक अनवर अब कांग्रेस में शामिल हो कर बिहार में कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ेगे। 

मायावती का मामला कुछ अलग है। शरद पवार जिसे बारिकी से राजनीति कर सकते है वैसा स्वभाव मायावती का नहीं है। मायावती फूह़ड ढ़ग से आम चुनाव बाद प्रधानमंत्री पद की महत्वंकाक्षा में आगे बढ़ रही है। शरद पवार चुपचाप सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, चंद्रबाबू आदि से कार्डिनेशन, सद्भावना बना रहे है तो मायावती दलित वोटों के अपने गुमान में यह सोचे हुए है कि वे बाकि पार्टियों को दबा कर लोकसभा के लिए अपना ज्यादा सीटों को जुगाड़ बनाना चाह रही है ताकि बाद में सब झक मार कर उन्हें प्रधानमंत्री पद पर बैठाए। इसलिए छतीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान सबमें कांग्रेस को नाच नचा वे यह मैसेज दे रही है कि बसपा को सिर पर नहीं बैठाया तो तुम्हे भी नहीं जीतने देगे। 

निश्चित ही इसमें यह तथ्य अपनी जगह है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के फोकस में आज नंबर एक पर मायावती है। येन-केन प्रकारेण किसी भी तरह मायावती को शेष विपक्ष से काटने, एलायंस न होने की धारणा मायावती से ही बनवा कर नरेंद्र मोदी जनता में अपरिहार्यता की चर्चा पैठाना मोदी-शाह का फिलहाल नंबर एक मिशन है। इस मिशन में कई तरह के लोग, एजेंसियों, बोरे लिए हुए सेठो की भागदौड स्वभाविक तौर पर हो रही होगी।  

उस नाते लोकसभा के आम चुनाव की घोषणा तक विपक्ष बिखरा दिखे रहना है। एक हद तक यह भाजपा को मुगालते में रखने और कुछ हद तक मोदी सरकार की दबिस को टलवाएं रखने और अंबानी-अदानी जैसे सेठों याकि आगे के चुनावी बंदोबस्तों के आप्सन खुले रखने की विपक्ष की होशियारी भी है। ऐसी होशियारी, लुकाछुपी, चतुराई के  पेतरें तब तक दिखते रहेगें जब तक आम चुनाव की अधिसूचना न हो जाए।  

650 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2018 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech