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अच्छे दिनों का इंतजार करना होगा!

केंद्र सरकार के अंतरिम बजट से शिक्षा और रोजगार का मामला लगभग पूरी तरह से गायब रहा। बजट से ठीक पहले बेरोजगारी को लेकर हल्ला मचा था। एनएसएसओ के आंकड़े के हवाले से बताया गया कि देश में बेरोजगारी 45 साल के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। एक आंकड़ा यह भी है कि पांच साल में बेरोजगारी 230 फीसदी बढ़ी है। पर सरकार ने इन आंकड़ों की ओर ध्यान ही नहीं दिया। किसी ऐसी योजना की घोषणा नहीं हुई, जिससे एक भी रोजगार पैदा होने का दावा किया जाए सरकार ने न शिक्षा को लेकर कोई घोषणा की और न रोजगार को लेकर। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने इस भरोसे में बजट पेश किया कि विकास होगा तो रोजगार भी बढ़ेगा। पर इससे असलियत सामने नहीं आती है। सरकार तो पिछले पांच साल में जम कर विकास होने का दावा कर रही है पर हकीकत है कि यूपीए की सरकार के मुकाबले मोदी सरकार में रोजगार 53 फीसदी कम हो गया है। सवाल है कि फिर आगे के विकास से रोजगार कैसे पैदा होगा? असल में सरकार का कुल फोकस लोगों के पास कुछ अतिरिक्त पैसे उपलब्ध कराना है ताकि वे खर्च करें और विकास दर बढ़े। 

महिलाओं के लिए भी सरकार ने इस बजट में कोई घोषणा नहीं की है। वित्त मंत्री ने उज्ज्वला योजना का जरूर जिक्र किया पर उससे आगे घरेलू महिलाओं या महिला उद्यमियों के लिए कोई घोषणा नहीं की गई। सरकार ने अपनी ओर से उज्ज्वला योजना के इस्तेमाल के बारे में कोई आंकड़ा नहीं दिया पर निजी एजेंसियों के आंकड़ों के मुताबिक रसोई गैस कनेक्शन की दर तो16 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है पर इस्तेमाल की दर दस फीसदी की रफ्तार से ही बढ़ी है। एजेंसियों का मानना है कि उज्ज्वला योजना के तहत दूसरी बार सिलिंडर भऱवाने वाले लोगों में से 83 फीसदी का कहना है कि सिलिंडर भरवाना महंगा है। यहीं स्थिति शौचालय के इस्तेमाल की है। सरकार महिला सम्मान का जिक्र करते हुए करोड़ों शौचालय बनवाने की बात कर रही है पर निजी एजेंसियों का मानना है कि 44 फीसदी लोग अब भी खुले में शौच के लिए जा रहे हैं। 

बाकी लगभग हर समूह के लिए या तो पुरानी घोषणाओं को दोहराया गया या पुरानी योजनाओं का जिक्र किया गया। छोटे कारोबारियों के मामले में भी ऐसा ही हुआ तो डिजिटल इंडिया के मामले में भी ऐसा ही हुआ। सरकार ने 25 फीसदी खरीदारी छोटे कारोबारियों से करने की बात दोहराई साथ ही वित्त मंत्री ने कहा कि छोटे कारोबारियों को एक करोड़ रुपए तक का लोन 59 मिनट में पास करने का सरकार ने वादा किया है। पर सरकार ने इस बारे में कोई आंकड़ा नहीं दिया। यह नहीं बताया कि जब से इस योजना की घोषणा की गई है तब से कितने लोगों को एक घंटे से कम समय में लोन दिया गया है। इसी तरह आदर्श ग्राम योजना और स्मार्ट सिटी के बारे में भी कुछ नहीं कहा गया। 

पहली बार किसी सरकार ने बजट में दस साल का विजन पेश किया, वह भी चुनावी साल के अंतरिम बजट में! सरकार को इसे कायदे से अपने घोषणापत्र में पेश करना था पर पता नहीं क्यों उसने अंतरिम बजट में पीयूष गोयल से दस साल का दस सूत्री विजन पढ़वाया। यह काम प्रधानमंत्री को खुद करना चाहिए था। उनको यह बात बतानी चाहिए थी पांच साल पहले पांच साल में जो काम करने का उन्होंने वादा किया था उसके लिए दस साल और क्यों मांगा जा रहा है? उन्होंने पांच साल में गंगा को निर्मल बनाने का वादा 2014 में किया था तो उसके लिए 2029 की डेडलाइन क्यों तय की जा रही है? जब सरकार स्वच्छता, शौचालय और घर देने का लक्ष्य 2022 या उससे पहले का रखा है और दावा किया जा रहा है कि 90 फीसदी या उससे ज्यादा का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है तो फिर इन्हीं कामों के लिए 2029 की डेडलाइन क्यों तय किया जा रहा है? डिजिटल इंडिया, अनाज के मामले में आत्मनिर्भरता या अंतरिक्ष योजना आदि सबके लिए 2029 की डेडलाइन बन रही है। जाहिर है अच्छे दिनों के लिए अभी और इंतजार करना होगा। 

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